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    आर.एल.फ्रांसिस

    आर.एल.फ्रांसिस

    पुअर क्रिश्चियन लिबरेशन मूवमेंट के अध्यक्ष आर.एल.फ्रांसिस विगत दो दशकों से धर्मांतरित ईसाइयों एवं वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं। शक्तिहीन, दबे-कुचले, सामाजिक रूप से पिछड़े और सताये हुए लोगों के अंदर से जब बदलाव के स्वर सुनाई देने लगे, तो इसे बड़े बदलाव के भावी संकेत के रूप में लिया जाना चाहिए।

    फ्रांसिस ने बिना रुके, बिना थके, अथक परिश्रमी फ्रांसिस ने इन दो दशकों में राष्ट्रीय और अतंरराष्ट्रीय स्तर पर इन वर्गों की मूक पीड़ा को स्वर दिए हैं। इन धर्मांतरित लोगों की पीड़ा का उल्लेख करते हुए उन्होंने चार पुस्तकें - आस्था से विश्वासघात, चलो चर्च पूरब की ओर, भंवर में दलित ईसाई, अनसुने ईसाइयों की आवाज, लिखकर चर्च नेतृत्व के अलावा समाज के प्रबुद्ध नागरिकों का ध्यान भी आर्किषत किया है। आर.एल.फ्रांसिस ईसाई मिशनरियों के बीच व्याप्त भेदभाव और कटुता के खिलाफ लगातार अपनी आवाज बुलंद किए हुए हैं। वे विभिन्न अखबारों में नियमित रूप से लिखते हैं।

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    पहले लोग 26 नवम्बर को अनाधिकारिक तौर पर संविधान दिवस के रूप में मनाया करते थे किन्तु नवम्बर, 2015 में मोदी सरकार द्वारा संविधान दिवस घोषणा किये जाने के बाद अब इसे सरकारी तौर पर मनाने की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में उम्मीद करनी चाहिए कि और कहीं भले ..

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    तीस साल से भी अधिक समय से देश की शीर्ष अदालत इस अनुच्छेद के अनुरूप देश में समान नागरिक संहिता बनाने का सुझाव देती रही है, लेकिन विभिन्न सरकारें कोई कदम उठाने से कतराती रहीं। कोर्ट द्वारा जोर दिए जाने के बाद अब विधि आयोग ने यह कदम उठाया है। देश के ..

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    ऐसी घटनाएं एक बड़े रुझान की ओर इशारा करती है। ये रुझान है धर्म गुरुओं का अपनी सत्ता चलाने की कोशिश करना और लोकतांत्रिक संस्थाओं की अवमानना करना। वे कानून और न्यायपालिका का एक तरह से माखौल उड़ा रहे हैं। कुछ हथियारबद्ध समर्थकों के दम पर यह दिखा रहे ..

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    वर्तमान समय में राजनीतिक सुविधा के हिसाब से हर कोई डॉ.आम्बेडकर को अपने-अपने तरीके से परिभाषित करने में लगा हुआ है, कुछ उन्हें देवता बनाने में लगे हैं तो कुछ उन्हें केवल दलितों की बपौती मानते हैं और कई उन्हें हिन्दुओं के विरोधी नायक के रूप में रखते ..

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    आरक्षण को लेकर कुछ समय से एक नए तरह की बेचैनी देश के कई हिस्सों में देखी जा रही है। हमारे देश की राजनीति में आरक्षण एक ऐसा मुद्दा है जो थोड़ा-बहुत हर वक्त सुलगता रहता है और जब-तब लपटों की भी शक्ल अख्तियार कर लेता है। पिछले साल गुजरात में पटेल समुदाय ..

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    आमिर खान के बयान के बाद बिहार चुनाव के नतीजों के बाद थम गई कथित असहिष्णुता पर बहस फिर गर्मा सकती है, जो देश की अंतरराष्ट्रीय जगत में नकारात्मक छवि का कारण बन सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया में घूमकर भारत की सकारात्मक छवि पेश करने और निवेशकों ..

    राय26/11/2015
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    अफ्रीका प्राकृतिक संसाधनों के मामले में बेहद समृद्ध है, तो भारत के पास आईटी जैसे क्षेत्र में कौशल हासिल है। सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों पक्षों की चिंताओं में भी बहुत कुछ साझा है, फिर वह कुपोषण से मुक्ति हो या फिर इबोला, मलेरिया और एचआईवी-एड्स जैसी ..

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    रंजिश में एक परिवार के दो मासूमों को जिंदा जला देने की घटना बेहद शर्मनाक है। विवाद कितना भी गंभीर हो किन्तु एक पूरे घर को आग के हवाले कर देना बर्बर कृत्य है। इस तरह की घटना का सम्बन्ध चाहे किसी जाति अथवा धर्म से हो, अमानवीय है। इस घटना की जितनी ..

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    नेपाल के समक्ष भविष्य में समस्याएं कम नहीं होंगी, इसके पीछे एक साजिश है। कुछ शक्तियां सालों से नेपाल का ईसाई-इस्लामीकरण कर रही थीं। उनको प्रलोभन दिया जा रहा था। नेपाल का हिन्दू राष्ट्र न होने से सबसे ज्यादा नुकसान भारत को ही होगा। इससे नेपाल में ..

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    श्रीलंका के प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने इंडिया फाउंडेशन द्वारा दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में भारत को आश्वस्त किया है कि उनके देश के सभी दल भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित सम्मेलन में विक्रमसिंघे ने कहा कि दोनों ..

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    आईएस के खिलाफ फतवा जारी कर भारतीय मुसलमानों ने दुनिया में यह संदेश दिया है कि वे आतंकवाद के खिलाफ हैं। यह फतवा दुनिया के लिए हिंदुस्तान का एक पैगाम भी है, जो बताता है कि यहां इस्लाम को सच्चे रूप में स्वीकार किया जाता है।..

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    पाकिस्तान बातचीत की टेबुल पर आने के बजाय मुंह चुराकर पलायन कर गया। इसका अंदेशा पहले से ही हो गया था। नियत तिथि से दो दिन पहले जिस तरह की हरकतें पाकिस्तान की तरफ से हुईं, उनसे ही लगने लगा था कि शायद ही वह आमने-सामने की बातचीत के लिए साहस जुटा सके।..

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    अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआइआरएफ) ने अपनी 2015 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत के अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में अपनी जो राय जाहिर की है उसमें कोई सच्चाई नहीं है। ..

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    वेटिकन पिछली कई शताब्दियों से एशिया में अपने साम्राज्य को फैलाने में लगा हुआ है और धीरे-धीरे उसने एशियाई देशों में एक मजबूत बुनयादी ढांचे का निर्माण कर लिया है। ..

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    झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड में मतान्तरण का धंधा नहीं चलेगा। भोले-भाले जनजातियों को सब्जबाग दिखाकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। भारतीय संविधान में भी कहा गया है कि लोभ, लालच या भय से मतान्तरण नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने ..

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    मराठवाड़ा में दलित और मराठा संघर्ष का इतिहास पुराना है और एट्रोसिटी कानून को हटाने के मुद्दे पर एक बार फिर दलित और मराठा आमने-सामने हैं। सारे दलित समुदाय को दोषी मानकर उसे मिले सुरक्षा के विशेषाधिकारों को छीनने की मांग गैर-वाजिब है। मराठा लंबे समय ..

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    दिल्ली के गांवोंवालों ने जो शिकायत की उससे पता चला कि उन्हें अफ्रीकी नागरिकों की जीवन शैली से काफी ऐतराज है। देर रात तक संगीत सुनना, पार्टी करना और जागना। संस्कृति और व्यवहार को लेकर शिकायत सिर्फ अफ्रीकी नागरिकों से नहीं रही है, दक्षिण दिल्ली के ..

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    राजस्थान के नागौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिनों की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में मीडिया की दिलचस्पी इस बात पर ही ज्यादा रही कि यूनिफॉर्म को लेकर बहुप्रतिक्षित बदलाव होता है या नहीं। नागौर में संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक में जो ..

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    अपने को फंसता देख सोनिया व राहुल गांधी इसे जानबूझकर राजनीतिक साजिश बताने की कोशिश कर रहे हैं। जब यह कोर्ट का मामला है, तो कांग्रेस को कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़नी चाहिए। अपना पक्ष रखना चाहिए। इसे लेकर केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने और संसद को ..

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    सरोगेसी से पैदा बच्चे की नागरिकता पेचीदा मामला है। इसलिए आठ यूरोपीय देशों- जर्मनी, फ्रांस, पोलैंड, चेक गणराज्य, इटली, नीदरलैंड, बेल्जियम और स्पेन, ने भारत सरकार को लिखा था कि वह अपने डॉक्टरों को निर्देश दें कि अगर कोई दम्पति सरोगेसी के जरिए औलाद ..

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    बाला साहब देवरस ने कहा कि यदि समाज में अस्पृश्यता पाप नहीं है, तो कुछ भी पाप नहीं है। वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने भी पिछले वर्ष विजयदशमी कार्यक्रम में सामाजिक समरसता के लिए समान अधिकार की बात की। ..

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    उच्चतम न्यायालय ने कहा कि विभिन्न समुदायों के निजी कानूनों को मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। यह टिप्पणी उस समय आई है, जब राजनीति में भी इसे लेकर थोड़ी गरमी दिख रही है।..

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    हैरानी की बात तो यह है कि जब हज के दौरान चप्पलें तक पहनने की मनाही है कि आगेवाले की चप्पलें पीछेवाले के पांव से दब जाने के कारण वह गिर न पड़े, तब इतनी सतर्कता के बावजूद क्या भीड़ का प्रबंधन इतना लचर था कि लोगों के एक-दूसरे से धक्कमधुक्की के चलते यह ..

    इस्लाम25/09/2015
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    स्कूलों में शुरू से ही अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई होती है, जिससे बच्चे हिंदी लिखना-पढ़ना नहीं सीख पा रहे हैं। हिंदी बोलना हीनता का लक्षण माना जाता है। हिंदी बोलने में ही लोगों को शर्म महसूस होती है। लोग टूटी-फूटी, ऊटपटांग अंग्रेज़ी बोल कर भी गर्व ..

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    इस फैसले में राजनीतिक स्तर पर जो मीन-मेख निकाली जा रही है, वह विरोध के लिए विरोध की प्रवृत्ति का परिचायक है। कम से कम कांग्रेस के पास को इस फैसले की आलोचना करने का नैतिक आधार बिल्कुल नहीं है। ..

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    दलित ईसाइयों ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून को दिए ज्ञापन में मांग की कि वह चर्च को अपने ढांचे में जातिवाद के नाम पर उनका उत्पीड़न करने से रोके और अगर चर्च ऐसा नहीं करता तो संयुक्त राष्ट्र में वेटिकन को मिले स्थाई अबर्जवर के दर्जें को समाप्त ..

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    सभी पंथों का सम्मान और सहनशीलता भारत की परंपरा है। यहां का बहुसंख्यक समाज दूसरे पंथों का भी उतना ही सम्मान करता है जितना वह अपने धर्म का करता है। समस्या तभी होती है जब दूसरों की आस्था में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जाए।..