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    प्रवीण गुगनानी

    प्रवीण गुगनानी

    बैतूल (मध्य प्रदेश) निवासी प्रवीण गुगनानी देश के राजनीतिक घटनाक्रम के सटीक विश्लेषक के रूप में जाने जाते हैं। वे राष्ट्रीय विषयों पर नियमित लेखन करते हैं। विशेषतः चीन व कश्मीर पर उनके पचास से अधिक आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। लगभग बीस राज्यों के दैनिक समाचार पत्रों में नियमित स्तम्भ लेखक के रूप में वे सक्रीय हैं। वे प्रयोगवादी कविताएं लिखते हैं।

    उनकी दो पुस्तकें हाल ही में प्रकाशित हुईं हैं, - 1) नमो- 7, रेसकोर्स की ओर, तथा 2) नमो- 7, रेसकोर्स में प्रथम वर्ष - कांग्रेस मुक्त भारत की अवधारणा। उनकी कविता संग्रह शीघ्र ही प्रकाशित होनेवाली है। भाजपा, विद्यार्थी परिषद, विहिप के विभिन्न दायित्वों के पश्चात वर्तमान में अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, मध्य क्षेत्र के महामंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभल रहे हैं।  

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    भोपाल में आयोजित त्रिदिवसीय आयोजन लोकमंथन की अवधारणा, आकार, आवेग और अनुवर्तन की दिशा तब ही स्पष्ट हो गई थी जब इस आयोजन के एक माह पूर्व, इस आयोजन के शुभंकर लोकार्पण हेतु एक कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री अनिल माधव दवे व फिल्म अभिनेता निर्देशक व चाणक्य ..

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के विरुद्ध अपने चौतरफा घेराबंदी के अभियान के तरफ एक नया और मारक हथियार चला दिया है। हाल ही में भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने बलूचिस्तान, पाक अधिकृत कश्मीर व गिलगिट की स्वतंत्रता, वहां के लोगों ..

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    भारतीय वैश्विक नेता महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से खासे सम्बंध रहे हैं। उस नाते से भारत में सदैव ही दक्षिण अफ्रीका का व अफ्रीका में महात्मा गांधी का सशक्त व सम्मानीय उल्लेख होता रहा है। इस स्थिति के बाद भी साढ़े तीन दशक के बाद नरेन्द्र मोदी (नमो) ..

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    कश्मीर को लेकर भाजपा अर्थात राम, अपने मूल विचार पर अडिग रहे तो ही वह कश्मीर में जीवित रह पाएगी। कश्मीर के विषय में भाजपा और संघ इस बात को समझ भी रहा है; किन्तु कई बार नहीं बल्कि अधिकाशंतः परिस्थितियां ही सर्वोपरि, नियामक और निर्णायक होती हैं, भाजपा ..

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    स्वामी विवेकानन्दजी ने भारत और भारतीयत्व को कितना आत्मसात कर लिया था यह कविवर रविन्द्रनाथ टैगोर के इस कथन से समझा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा था कि - "यदि आप भारत को समझना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानन्द को पढ़िए। उनमें आप सब कुछ सकारात्मक ही ..

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    सम्पूर्ण भारत में दादरी की धूम है। नेता दादरी के पहाड़े पढ़ रहे हैं तो उनके चमचे दादरी की गिनती को अनगिनत तक गिने जा रहे हैं। धर्मनिरपेक्षता की मोक्ष भूमि बन गया है दादरी। दु:ख तो सभी को है, सम्पूर्ण भारत को है। अंततः हमारे संस्कार और हमारा देश “सर्वे ..

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    भारत में समान नागरिक संहिता पर विवाद कोई नया मामला नहीं है। केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक के विरोध में न्यायालय में हलफनामा दर्ज कराने के बाद यह विवाद पुनः उभर गया है। अब आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने तीन तलाक के मुद्दे पर विधि आयोग का बहिष्कार ..

    इस्लाम17/10/2016
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    आर्थिक सुधारों को लागू करना एक राजनीतिक दुस्साहस भरा कार्य माना जाता है। और जीएसटी का विश्वभर का जो इतिहास रहा है उस दृष्टि से तो जीएसटी को लागू करना अत्यंत व अत्यधिक दुस्साहस भरा कार्य है। जीएसटी लागू है ऐसे विश्वभर के लगभग 160 देशों का इतिहास ..

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    बाबासाहेब अम्बेडकर के विचार विश्व का प्रारम्भ इस उनके इस कथन से माना जाना चाहिए कि बौद्ध विचार को या धम्म को किसी धर्म या पंथ के रूप में नहीं, अपितु विकसित मनुष्य, समाज व राष्ट्र के निर्माण की रूपरेखा प्रस्तुत करनेवाला मार्ग माना जाना चाहिए। धर्म ..

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    जम्मू-कश्मीर में नवगठित सरकार के नौ माह पूर्ण होते होते ही मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद का निधन हो गया। सामान्यतः यह माना जा रहा था कि मुफ़्ती के बाद उनकी राजनीतिक पूंजी को पूर्व से ही संभाल रही महबूबा मुख्यमंत्री बन जाएगी। महबूबा मुख्यमंत्री बन ..

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    भारतीय जनमानस में गणेशोत्सव व दुर्गात्सव का आदर व आस्था एक स्पष्ट तथ्य है। पिछले कुछ वर्षों से इन दोनों उत्सवों पर जिस प्रकार से प्रशासन को अतीव चुस्त-चौकन्ना रहना पड़ रहा है उससे इन त्यौहारों की छवि बिगड़ नहीं रही अपितु योजनापूर्वक बिगाड़ी जा रही ..

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    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहनरावजी भागवत के आरक्षण व्यवस्था पर पुनर्विचार की आवश्यकता व्यक्त करने से वैचारिक तूफ़ान खड़ा हो गया है। संघ प्रमुख ने आरक्षण के औचित्य पर प्रश्न कतई नहीं किया है, यह स्पष्ट है।..