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    ललित गर्ग 

    ललित गर्ग 

    विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक तथा सम-सामायिक विषयों पर निरंतर लेखन करनेवाले ललित गर्ग (दिल्ली) प्रसिद्ध लेखक, स्तंभकार, पत्रकार एवं समाजसेवी हैं। जैन धर्म के विचारों को अपने लेखन से प्रसारित करनेवाले ललित गर्ग अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हैं, जिनमें राष्ट्रीय चेतना पुरस्कार (1990), आचार्य महाप्रज्ञ प्रतिभा पुरस्कार (2006), अणुव्रत लेखक पुरस्कार (2011) आदि। वर्तमान में आप ‘समृद्ध सुखी परिवार’ पत्रिका के सम्पादक के रूप में कार्यरत हैं, तथा सूर्यनगर एज्युकेशनल सोसायटी (रजि.) एवं उसके द्वारा संचालित विद्या भारती स्कूल के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।
     
    इसके पूर्व आपने अणुव्रत पाक्षिक, श्री विजय इन्द्र टाइम्स मासिक, समाज दर्पण, अनुभूति, दृष्टि, निर्गुण चदरिया (आचार्य श्री महाश्रमण अमृत महोत्सव स्मारिका), आचार्य महाप्रज्ञ प्रवास समिति पत्रिका तथा ‘उदय इंडिया’ अंग्रेजी साप्ताहिक में बतौर सम्पादक तथा युवादृष्टि में अतिथि सम्पादक के रूप में कार्य किया है। 

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    संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने ‘2017 में वैश्विक रोजगार एवं सामाजिक दृष्टिकोण’ पर हाल ही में अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार रोजगार की जरूरतों के कारण आर्थिक विकास पिछड़ता प्रतीत हो रहा है और इसमें पूरे 2017 के दौरान ..

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    देश परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, देश की तरक्की उसके शासक की नीति एवं नियत पर आधारित होती है। कोई भी बड़ा बदलाव प्रारंभ में तकलीफ देता ही है, लेकिन उसके दूरगामी परिणाम सुखद एवं स्वस्थ समाज निर्माण के प्रेरक बनते है। विमुद्रीकरण के ऐतिहासिक फैसले ..

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    लंबे समय से दिल्ली न केवल वायु प्रदूषण से बल्कि राजनीतिक प्रदूषण से भी दूषित है। आम जनजीवन की जिंदगी की परवाह किसी को नहीं है। वायु प्रदूषण, यमुना का लगातार दूषित होना, जानलेवा बीमारियों का हावी होना, दीपावली पर आतिशबाजी का धुआं होना, पड़ोसी राज्य ..

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    पाकिस्तान के हुक्मरान भारत के साथ तनावपूर्ण माहौल बनाए रखकर अपने यहां के लोगों का ध्यान गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से भटकाए रखना चाहते हैं। ऐसे में अगर वहां के लोग पाकिस्तान सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने लगें, मांग करने लगें ..

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    दीपावली के अवसर पर आमतौर से सभी अपने घरों की साफ-सफाई, साज-सज्जा और उसे संवारने-निखारने का प्रयास करते हैं। उसी प्रकार अगर भीतर चेतना के आंगन पर जमे कर्म के कचरे को बुहारकर साफ किया जाए, उसे संयम से सजाने-संवारने का प्रयास किया जाए और उसमें आत्मा ..

    विशेष21/10/2014
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    इतिहास इस बात का गवाह है कि जब-जब समाज और राष्ट्र में शोषण, अन्याय और अत्याचार बढ़ता है और मूलभूत मानवीय अधिकारों का हनन होने लगता है, तो उस समाज में इस दमन-चक्र के खिलाफ आवाज उठाने के लिए कोई महापुरुष जन्म लेता है। सावित्रीबाई फुले ऐसे ही महापुरुषों ..

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    प्रतिवर्ष 25 नवम्बर को समूची दुनिया मांसाहार निषेध दिवस मनाती है। आखिर इस दिवस को मनाने की आवश्यकता क्यों हुई? मांसाहार के अनेक नुकसान सामने आ रहे हैं, तो कुछ लोग उसके फायदे भी कम नहीं मानते हैं। लेकिन शाकाहारी भोजन के गुणों को जानकर अब पाश्चात्य ..

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    वो ब्रह्म है। कोई उससे बड़ा नहीं। वो प्रथम सत्य है और वही अंतिम सत्ता भी। वो स्वर है, ईश्वर है, ये केवल संगीत की किताबों में लिखी जाने वाली उक्ति नहीं, ये संगीत का सार है और इसी संगीत एवं स्वर−माधुर्य की साम्राज्ञी हैं लता मंगेशकर। गीत, संगीत, गायन ..

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    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बुराड़ी के भीड़भरे इलाके में मंगलवार को दिन-दहाड़े बीच सड़क पर 21 साल की एक युवती को 34 साल के एक सिरफिरे आशिक ने ढाई मिनट में कैंची से बाइस बार गोद डाला, इस रोंगटे खड़ी कर देने वाली दर्दनाक, वीभत्स, डरावनी घटना को देखकर देश ..

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    15 अगस्त, 1947 को देश में स्वतंत्रता का सूर्य उगा। सबके मन कमल खिले। सबने राहत की सांस ली पर साथ ही साम्प्रदायिकता की ऐसी भयंकर बाढ़ आई और महंगाई, भ्रष्टाचार व अपराध का कचरा पीछे छोड़ गई। धरती पर स्वार्थों का कचरा (दलदल) इस कदर फैल गया कि कल के स्वर्ण ..