undefinedनरेन्द्र मोदी की एक ही रैली ने भाजपा को प्रदेश में एकदम नई बुलन्दियों पर पहुंचा दिया। कहना न होगा कि रेवाड़ी रैली में मोदी द्वारा छोड़ा गया एक-एक तीर अचूक रहा और विपक्षी पार्टियों के लिए अत्यन्त घातक सिद्ध हुआ। आम आदमी को उनकी एक-एक बात दिल को छू गई। आम आदमी के दिल में सत्तारूढ़ प्रदेश व केन्द्र सरकार के प्रति जो दर्द भरा पड़ा है, उसे मोदी ने बड़ी सहजता से बुलन्द आवाज दी और जनता की दु:खती रग पर हाथ रखकर उनकी नजरों में सबसे बड़े हीरो बन गए।

- राजेश कश्यप

रियाणा प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी अबतक लगभग मृतप्राय: अवस्था में थी। राष्ट्रीय पार्टी होते हुए उसे अपने वजूद को बनाए रखने के लिए प्रदेश की किसी न किसी पार्टी का मुंह ताकना पड़ता था। उसकी स्थिति का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि 90 सदस्यीय विधानसभा में उसके मात्र चार विधायक ही हैं और पिछले दो लोकसभा चुनावों में दस सीटों में से एक भी सीट उनके खाते में नहीं है। हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां)- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबन्धन बनने के बाद एकमात्र हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई ही हिसार उपचुनावों में लोकसभा में पहुंचने में कामयाब हो पाए थे। हाल के सात नगर निगम चुनावों में भी भाजपा का कोई खास प्रदर्शन नहीं रहा। जब भी कोई चुनाव आता तो भाजपा को किसी दूसरी क्षेत्रीय पार्टी के साथ गठबन्धन करने के लिए मुंह ताकना पड़ता था और हर बार उसे नुकसान उठाना पड़ता था। इसके बावजूद गठबन्धन की राजनीति करना भाजपा की मजबूरी बन गई थी। यही बात हजकां-भाजपा गठबन्धन के गठन के मामले में भी लागू होती है। इस गठबन्धन में भी भाजपा को दूसरे दर्जे पर रहते हुए गठबन्धन की शर्तें तय करने को विवश होना पड़ा। इस गठबन्धन की शर्तों के मुताबिक यदि हजकां-भाजपा की संयुक्त सरकार बनती है तो पहले ढ़ाई वर्ष हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई मुख्यमंत्री बनेंगे और इसके बाद ढ़ाई वर्ष भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राम बिलास शर्मा सी.एम. की कुर्सी संभालेंगे। लेकिन, गत 15 सितम्बर को हुई नरेन्द्र मोदी की शानदार रैली के बाद सभी समीकरण एकदम बदल गए हैं।

undefined15 सितम्बर, 2013 को रेवाड़ी में हरियाणा शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित पूर्व सैनिकों की महारैली को सम्बोधित करने आए भाजपा द्वारा घोषित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी प्रदेश भाजपा के लिए ‘संजीवनी’ सिद्ध हुए। गजब संयोग की बात यह रही कि रैली से ठीक दो दिन पहले ही गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को भाजपा ने अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था। रेवाड़ी रैली में हरियाणा की जनता ने उन्हें बड़ी गम्भीरता के साथ भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखा और सुना। लोगों ने नरेन्द्र मोदी का दिल से स्वागत किया। रेवाड़ी रैली के बाद प्रदेश में भगवा और नमो: मंत्र का खूब जादू चला। नरेन्द्र मोदी के जादू ने प्रदेश भाजपा में ऐसे प्राण फूंके, जो आज तक एक से बढ़कर एक धुरन्धर लाख कोशिशों के बावजूद नहीं फूंक पाए। राजनीति के मैदान में किस पल क्या घट जाए, कहा नहीं जा सकता। यह बात प्रदेश भाजपा पर भी लागू होती है। नरेन्द्र मोदी की एक ही रैली ने भाजपा को प्रदेश में एकदम नई बुलन्दियों पर पहुंचा दिया। कहना न होगा कि रेवाड़ी रैली में मोदी द्वारा छोड़ा गया एक-एक तीर अचूक रहा और विपक्षी पार्टियों के लिए अत्यन्त घातक सिद्ध हुआ। आम आदमी को उनकी एक-एक बात दिल को छू गई। आम आदमी के दिल में सत्तारूढ़ प्रदेश व केन्द्र सरकार के प्रति जो दर्द भरा पड़ा है, उसे मोदी ने बड़ी सहजता से बुलन्द आवाज दी और जनता की दु:खती रग पर हाथ रखकर उनकी नजरों में सबसे बड़े हीरो बन गए।

गुजरात के नरेन्द्र मोदी जिस प्रकार से राष्ट्रीय पटल पर चर्चा का केन्द्र बिन्दू बने हुए थे, उससे हरियाणा सरकार को सहज अन्दाजा लग गया था कि उनकीं रेवाड़ी रैली सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर सकती है। इस रैली को फीका कैसे किया जाए, इसके लिए भी सियासी दलों ने खूब माथापच्ची की। कांग्रेस ने भी अपने तरकश के वे सभी तीर आजामये, जो उसे उचित लगे। लेकिन, सत्तारूढ़ कांग्रेस का कोई भी तीर निशाने पर नहीं लगा, उल्टा उसकी फजीहत हुई, सो अलग।

रेवाड़ी की रैली की अप्रत्याशित कामयाबी और लोगों के रूझान ने हरियाणा के सियासी दलों के पैरों तले की जमीन खिसका दी है। अब भाजपा को जबरदस्त पंख लग गए हैं। वह एकदम प्रदेश की राजनीति में छा गई है। भाजपा में आए अपार जोश और उत्साह ने कांग्रेस सहित दूसरी पार्टियों की भी नींद हराम करके रख दी है। परोक्ष रूप से कांग्रेस ने मोदी रैली की हवा निकालने के लिए कई ड्रामे रचे। रैली से दस दिन पूर्व 5 सितम्बर को प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दावा किया गया कि 6 सितम्बर को गुजरात से बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक आएंगे और नरेन्द्र मोदी की नीतियों की पोल खोलेंगे। इस बात का प्रचार-प्रसार खूब किया गया। कमाल की बात यह रही कि अगले दिन गुजरात से पूर्व सैनिक नहीं, बल्कि किसान आए और वो भी मात्र तीन। पूछने पर पता चला कि वे तो किसान हैं, लेकिन उनके पूर्वज सैनिक थे। यह बात सुनकर सरकार की भारी फजीहत हुई। हालांकि सरकार की तरफ से कहा गया कि इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं था। लेकिन, सूत्रों के अनुसार इन लोगों की पत्रकार वार्ता से लेकर लंच तक की जिम्मेदारी कांग्रेसी नेताओं की थी। जिला सूचना एवं सम्पर्क विभाग के अधिकारी भी थोड़ी दूरी बनाकर इस मामले पर नजर रखे हुए थे।

बाद में प्रदेश भाजपा प्रवक्ता वीर कुमार यादव ने भी सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर सीधा आरोप लगाया था कि ‘‘मोदी को बदनाम करने की कांग्रेस की रणनीति फेल हो गई। दावा किया गया था कि गुजरात के पूर्व सैनिक आएंगे, लेकिन पहुंचे किसान। वे राज्य बिजली एवं पर्यावरण मंत्री कैप्टन यादव की ओर से ही गुजरात से आए और तथाकथित पूर्व सैनिकों को रात्रि में ठहराने का इंतजाम किया गया।’’

इसके साथ ही कांग्रेस ने परोक्ष रूप से अन्य कई हथकण्डे भी अपनाए। रेवाड़ी रैली की धार को कुन्द करने के लिए गुजराती किसानों के धरने का स्टंट रचा गया। यह ड्रामा भी एकदम नकली सिद्ध हुआ। खुद को कुछ किसानों ने गुजराती किसान बताते हुए रैली से तीन दिन पूर्व 12 सितम्बर को रेवाड़ी में जिला सचिवालय के सामने धरना दिया। धरने पर बैठे लोगों ने ‘जवान विरोधी-किसान विरोधी, ये है गुजरात का नरेन्द्र मोदी’ आदि नारे भी लगाये। लेकिन, जल्द ही उनकी भी पोल खुल गईं। जब उनकी पोल खुली तो उन्होंने माना कि वे जीन्द जिले के आसपास के गावों से आए हैं। उनके परिजन गुजरात में कच्छ व आसपास के क्षेत्र में खेती करते हैं। इस खुलासे के बाद प्रदेश भाजपा प्रवक्ता वीर सिंह यादव ने कहा कि ‘‘मोदी के नाम से सहमे कांग्रेसी नेता फिर ओछी हरकत पर उतर आए हैं।’’ लेकिन, दूसरी तरफ कांग्रेसी नेताओं ने इस प्रकरण से भी किसी तरह का कोई लेना देना न होने का दावा किया। लेकिन, सूत्रों के मुताबिक इस धरने की सारी व्यवस्था कांग्रेसी नेताओं ने ही संभाल रखी थी।

मोदी की रैली कहीं कामयाब न हो जाए इसके लिए रेवाड़ी में लगे पोस्टरों और होर्डिंग्सों को भी जमकर निशाना बनाया गया। कहीं पोस्टरों और होर्डिंग्स को फाड़ दिया गया तो कहीं मोदी के फोटो पर कालिख पोत दी गई। इस प्रकार से कुल 55 होर्डिंग्स खराब कर दिए गए। इस घटना पर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता ने तीखे शब्दों में प्रतिक्रिया दी कि मुख्यमंत्री एवं स्थानीय मंत्री कैप्टन यादव के इशारों पर मोदी के पोस्टरों को फाड़ा जा रहा है। सभी शहरों और कस्बों में इस प्रकार की घटिया कार्यवाही प्रदेश सरकार की सोची-समझी साजिश है। हरियाणा सरकार व कांग्रेस पार्टी भाजपा कार्यकर्ताओं के धैर्य की परीक्षा न ले। कभी रेवाड़ी में गुजरात के फर्जी पूर्व सैनिकों व लोगों द्वारा पत्रकार वार्ता कराकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है तो कभी पोस्टर फाड़े जा रहे हैं।’’ भाजपा के इस आरोप का भी सरकार की तरफ से खण्डन किया गया। कैप्टन यादव ने भाजपा के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ‘‘कांग्रेस कभी ऐसी छोटी हरकत नहीं करती। हो सकता है कि इस तरह का ड्रामा भाजपा के लोगों ने खुद ही करवाया हो।’’

इसके साथ ही नरेन्द्र मोदी को किसानों की नजरों में गिराने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री ने अपने तरकश से एक तीर छोड़ा। रैली से ठीक एक दिन पूर्व भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने मोदी से सार्वजनिक अपील की। उन्होंने कहा कि ‘‘वह गुजरात में बरसों से खेती करते आ रहे हरियाणा व पंजाब के किसानों को उजड़ने न दें, बल्कि उन्हें बसाएं। उन्हें उम्मीद है कि मोदी कल रेवाड़ी रैली में ऐसी घोषणा जरूर करेंगे, जैसा कि हरियाणा विधानसभा में एक विधेयक पारित कर पट्टेदार किसानों को बसाने का काम किया है।’’ लेकिन, हुड्डा के तरकश का यह तीर भी मोदी के जादू के आगे फुस्स साबित हुआ।

undefinedइन सब घटनाक्रमों का सीधा सा मतलब है कि मोदी का जादू आम आदमी के सिर चढ़कर बोलने लगा है और सियासी दलों को अपना जनाधार खिसकता नजर आने लगा है। मोदी की इस लहर ने केवल कांग्रेस की ही नहीं हजकां को भी परेशानी में डाल दिया है। प्रमुख विपक्षी पार्टी इनेलो ने भी अप्रत्याशित रूप से बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ व शर्तों के भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। इसके बाद तो सियासी समीकरण और भी तेजी से बदल रहे हैं। गुड़गांव के कांग्रेसी सांसद राव इन्द्रजीत ने रेवाड़ी रैली में मोदी के भाषण की जमकर तारीफ की है। उनका भी भाजपा में जाना लगभग तय माना जा रहा है। इन सभी समीकरणों के चलते एकाएक बुलन्दियों पर पहुंची प्रदेश भाजपा बहुत उत्साहित है। अब वह गठबन्धन की शर्तों की स्वयं नीति-निर्धारक बनने की स्थिति में आ गई है। ऐसे में हजकां-भाजपा गठबन्धन टूटना और भाजपा-इनेलो गठबन्धन बनना लगभग तय माना जा रहा है। गुड़गांव के मेदान्ता अस्पताल में ईलाज करवा रहे इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता मुलाकात कर चुके हैं। इससे पूर्व इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के हैट्रिक जमाने के बाद शपथ ग्रहण समारोह में विशेष उपस्थिति दर्ज करवाई थी। इसके साथ ही रेवाड़ी रैली में गठबन्धन पार्टी हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई को मंच से बोलने का मौका तक नहीं दिया गया। इससे पहले भी हजकां-भाजपा गठबन्धन के बीच तालमेल में कई बार विसंगतियां देखने को मिल चुकी हैं। बदले हालातों के बीच हजकां-भाजपा गठबन्धन टूटने और भाजपा-इनेलो गठबन्धन बनने के आसार मजबूत हो चले हैं।

कुल मिलाकर हरियाणा के लोगों पर मोदी का जादू चल गया है। आगामी चुनावों में इसका कड़ा असर देखने को मिलेगा। अब प्रदेश भाजपा को संजीवनी मिल चुकी है। वह मृतप्राय: अवस्था से बाहर निकलकर आसमां की सैर करने लगी है। गठबन्धन में दूसरे दर्जे से संतोष करनेवाली भाजपा अब अपनी शर्तें मनवाने की ताकत हासिल कर चुकी है। गठबन्धन न होने की सूरत में अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ने की ताकत और जज्बा भी प्रदेश भाजपा में कूट-कूट कर भर चुका है। यदि कोई भारी उलट फेर नहीं हुआ और प्रदेश भाजपा के लोग मोदी की इस हवा को बरकरार रख पाए तो निश्चित तौरपर कहा जा सकता है कि भाजपा हरियाणा में आगामी चुनावों के दौरान रिकार्ड़ कायम कर सकती है, चाहे वह गठबन्धन में हो या फिर अकेले। यह सब मोदी के जादू का ही परिणाम होगा।