वर्तमान भारत की जनसंख्या लगभग 1 अरब, 25 करोड़ से अधिक है, इस जनसंख्या के अनुपात में गाय या दूधारू पशुओं की संख्या नगण्य-सी होकर रह गई है। इसके उपरान्त भी देश में दूध, दही, घी, पनीर एवं खोवा आदि की कोई कमी नहीं है। इसलिए प्रश्न यह है कि इन सबके लिए यह दूध कहां से आ रहा है?

बुखारी शरीफ की हदीस है कि सच्चा मुसलमान वह है जिसके हाथ या जबान से किसी को तकलीफ नहीं पहुंचे। दूसरी हदीस है कि, खुदा के रसूल ने फरमाया कि जिसका पड़ोसी दुखी है वह हममें से नहीं है’’। वर्तमान समय में जबकि हमारी जिन्दगी बहुत तेजी से गुजर रही है ऐसे समय में यह आवश्यक हो जाता है कि हम यह ध्यान रखें कि अनजाने में भी हमारी किसी बात से या हमारे किसी काम से किसी का भी दिल नहीं दुखे, दूसरों की भावनाएं आहत न हो।

इस सन्दर्भ में भारत में रहनेवाले लगभग 18 करोड़ मुसलमानों का यह दायित्व बन जाता है कि वह पैगम्बर खुदा की हिदायतों पर पूरा अमल करे।     गाय, जो कि हिन्दुओं के लिए एक पवित्र एवं पूजा योग्य है उसकी सुरक्षा एवं संरक्षण में किसी भी प्रकार का गतिरोध उत्पन्न नहीं हो, यह हम सबकी जिम्मेदारी बनती है। क्योंकि आधुनिक विज्ञान ने यह सिद्ध कर दिया है कि माँ के दूध के बाद गाय का दूध ही सर्वोत्तम आहार है। वर्तमान समय में जबकि भारत की जनसंख्या लगभग 1 अरब, 25 करोड़ से अधिक है, इस जनसंख्या के अनुपात में गाय या दूधारू पशुओं की संख्या नगण्य-सी होकर रह गई है। इसके उपरान्त भी देश में दूध, दही, घी, पनीर एवं खोवा आदि की कोई कमी नहीं है। इसलिए प्रश्न यह है कि इन सबके लिए यह दूध कहां से आ रहा है?

आज भारत के बाजार में दूध भरपूर मात्रा में मिल रहा है। घी की मण्डी से जितना भी घी चाहिए वह ट्रक के हिसाब से उपलब्ध है। मिठाई जितनी भी आवश्यकता हो हर उत्सव, त्यौहार या विवाह तथा अन्य समारोह के लिए भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। विदेशी पर्यटक हम हिन्दुस्तानियों की चाय पीने की आदत पर हंसते हैं। वे कहते हैं कि In India every time is Tea time. अर्थात् भारत में चाय के लिए कोई समय निश्चित नहीं है। यहां हर समय चाय पीने का रिवाज है।

यदि हम यह अनुमान लगाए कि प्रत्येक भारतीय एक दिन में एक कप चाय पीता है अर्थात् पचास ग्राम दूध एक चाय के कप के हिसाब से लगभग 75 अरब मिलीलीटर दूध प्रतिदिन केवल चाय बनाने में ही काम आता है। भारत में प्रत्येक शहर के हर एक मोहल्ले में, प्रत्येक गांव में बस स्टेण्ड, चौराहा, कार्यालय के सामने या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर चाय की दुकान अवश्य ही मिलेगी। इसलिए यह प्रमुख विचारणीय प्रश्न है कि हम जो दूध पीते है या दूध से बन रही वस्तुएं खाते हैं क्या वह शुद्ध दूध से बनती है?

वर्तमान में विभिन्न सर्वे तथा स्टंट ऑपरेशन से यह सिद्ध हो चुका है कि बनावटी दूध की बाजार में भरमार है। यह सिन्थेटिक दूध, शेम्पू, वाईटनर, (स्याही को साफ करनेवाला केमिकल) डीडीटी तथा अन्य केमिकल से बनाया जाता है। यह भी सिद्ध हो चुका है कि यह केमिकल मानव जीवन के लिए अत्याधिक हानिकारक है। वर्तमान में फैल रही भयंकर बिमारी जैसे पेट का कैंसर, गर्दों की बिमारी, यकृत कैंसर, खून का कैंसर तथा त्वचा सम्बन्धी बिमारी तथा अनेकों ऐसी जानलेवा बिमारियां जिन पर अभी शोध होना बाकी है, इसी सिन्थेटिक दूध के पीने से फैल रही है।

इसलिए सरकार के लिए मिलावटी दूध या सिन्थेटिक दूध बेचनेवालों के विरूद्ध कठोर से कठोर कानून बनाना अनिवार्य हो गया है। हमारे ऋषि-मुनियों ने गाय को जो धार्मिक महत्व दिया है वह बिना किसी कारण के नहीं है बल्कि गाय से प्राप्त सभी प्रकार के लाभों को देखते हुए एवं भारतीय जीवन के परिप्रेक्ष्य में गाय की उपयोगिता के अन्य पहलुओं को भी ध्यान में रखते हुए गाय को पवित्र धार्मिक जीव माना गया है।

इसलिए यदि हमें अपना और अपने बच्चों का जीवन सुरक्षित रखना है तो गाय को भी सरंक्षित रखना आवश्यक है। गाय के पालन में सबसे पहले हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यदि गाय के बछड़ा होता है तो गाय का मालिक उसे बेचे नहीं और उसकी पूरी सेवा सुरक्षा करें। उसकी माँ का दूध उसे भी मिले। इंजेक्शन लगाकर गाय से अधिक दूध लेने का प्रयास करना भी गलत है क्योंकि इससे दूध दूषित हो जाता है और वह दूध पीनेवाले के लिए भी हानिकारक होता है। यह भी ध्यान योग्य है कि हम प्लास्टिक का कूड़ा घर से बाहर नहीं फैंके ताकि प्लास्टिक खाकर गाय रोगी नहीं हो जाए।

अकाल पड़ने पर किसान अपनी गायों को तिलक लगाकर बेसहारा नहीं छोड़ें बल्कि उन्हें गोशाला में दाखिल करवा दें और उनकी प्राप्ति रसीद ले लेवें ताकि उनकी देखभाल की जा सके। अकाल समाप्त होने के पश्चात् अपनी गाय को सुरक्षित वापिस प्राप्त कर लें। इसके साथ ही कई गौ-पालक बछडे़ को भी बेसहारा छोड़ देते हैं। उनके लिए यह प्रावधान किया जा सकता है कि वे गोशाला में अपना बछड़ा देकर उचित दाम प्राप्त कर लें। गोशाला वाले उस बछड़े की पूरी देखभाल करें।

इसके साथ ही भारत सरकार को पड़ोसी देशों से अच्छी नस्ल की गाय आयात करने के लिए एक निश्चित नीति बनानी चाहिए जिससे हमें अच्छे दुधारू पशु सस्तें दामों पर उपलब्ध हो सके। सरकार को भी गो-सरंक्षण के लिए कठोर कानून बनाना चाहिए जिसमें फांसी अथवा उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान हो तथा इसके साथ ही सरकार इस कानून का पालन सुनिश्चित करें। ताकि यह कानून तत्काल ही कठोरता से लागू हो सके। यही प्रावधान मिलावटी दूध बेचनेवालों पर भी लागू होने चाहिए।  

मैं मुस्लिम भाईयों से विशेष तौर पर बिहार के ग्रामीण ईलाकों में रहनेवाले तथा बंगाल में,बांग्लादेश सीमा के पास रहनेवाले मुसलमान भाईयों से निवेदन है कि वह भी इस सामाजिक समरसता के काम में आगे आए और भाईचारे के साथ-साथ अपना और अपने बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा बनाए रखने के कार्यों में अपना भरपूर सहयोग दें। यदि हम अन्य सम्प्रदाय की भावना की कद्र करेंगे तो निश्चय ही वह छोटे भाईयों के साथ अधिक सहानुभूति एवं प्रेमपूर्वक व्यवहार करेंगे एवं मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं के प्रति अधिक आदरणीय उदार व्यवहार करेंगे। इसलिए देश, समाज तथा स्वास्थ्य से प्रेम करनेवालों के लिए यह एक खुला सन्देश है जिसको क्रियान्वित करके वह समाज व स्वयं का भला कर सकते हैं।