Source: न्यूज़ भारती हिंदी23 Oct 2015 17:08:25

रंजिश में एक परिवार के दो मासूमों को जिंदा जला देने की घटना बेहद शर्मनाक है। विवाद कितना भी गंभीर हो किन्तु एक पूरे घर को आग के हवाले कर देना बर्बर कृत्य है। इस तरह की घटना का सम्बन्ध चाहे किसी जाति अथवा धर्म से हो, अमानवीय है। इस घटना की जितनी भी निंदा की जाए वह कम है। ऐसे मामले में घटना को कारित करने व उसका षडयन्त्र रचने वालों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।

मंगलवार की सुबह हरियाणा के फरीदाबाद जिला अन्तर्गत सुनपेड़ गांव में अनुसूचित जाति के जितेंद्र नामक एक व्यक्ति के घर को गांव के ही कुछ लोगों ने आग के हवाले कर दिया। इस वारदात में जीतेन्द्र के दो बच्चों, एक चार साल का बेटा वैभव और आठ महीने की बच्ची दिव्या की जलकर मौत हो गई और उसकी पत्नी राधा अस्पताल में मौत से जंग लड़ रही है। पीड़ित जितेंद्र को पुलिस कमिश्नर ने सुरक्षा की लिखित गारंटी दी थी। इसके बावजूद ये घटना हुई। दरअसल, पिछले साल गांव में ऐसी ही हिंसा हुई थी। झगड़ा मोबाइल को लेकर हुआ और 5 अक्टूबर 2014 को सवर्णों जाति के तीन युवकों की हत्या कर दी गई। तब दलित परिवार पर हत्या का आरोप लगा था। पुलिस ने 11 को गिरफ्तार किया था। दलितों को डर था कि दबंग पूरी जाति से बदला लेंगे। लिहाजा बाकी दलित परिवार गांव छोड़ कर चले गए। जितेंद्र भी उन्हीं में से था। मामला एससी-एसटी आयोग में गया। आयोग ने फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर से इन परिवारों को दी जाने वाली सुरक्षा के बारे में पूछा। पिछले साल दिसंबर में कमिश्नर ने लिखित में कहा कि जितेंद्र के घर के पास एक पुलिस जिप्सी, आधा दर्जन हथियारबंद जवान और दो बाइक सवार जवान तैनात रहेंगे। एसएचओ खास निगरानी भी करेंगे। इस भरोसे के बाद जितेंद्र और उसका परिवार इस साल जनवरी में गांव लौटा था।

हमलावर सवर्ण जाति से सम्बन्धित बताये जाते हैं। घटना में परिवार के दो मासूम जिंदा जल गए। जबकि, उनके माता-पिता गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के परिप्रेक्ष्य में पुरानी रंजिश का होना सामने आ रहा है। दोनों परिवारों के बीच तनातनी और रंजिश पुरानी है। विवाद चूंकि दलित और सवर्ण जाति के परिवारों के बीच था। इसलिए गांव में पुलिस तैनात रहती थी। इस मामले में पुलिस की भी भारी लापरवाही सामने आ रही है। जब पहले से मालूम था कि दोनों के बीच रंजिश है और दोनों पक्ष अलग-अलग जाति के हैं तो पुलिस को अलर्ट रहना चाहिए था। गांव में पुलिस की मौजूदगी के बावजूद इतना जघन्य काण्ड हो गया। इसमें पुलिस की घनघोर लापरवाही उजागर हुई है। सबसे पहले तो गांव में तैनात पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जाना चाहिए।

हालांकि मौके पर गए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने घटना को जातीय विद्वेष के कारण घटित होने से इनकार किया है। पुलिस इसे मात्र रंजिश का परिणाम मान रही है। जघन्य काण्ड पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिये हैं। उन्होंने इस तरह के विवादों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिये हैं। खट्टर सरकार ने इस वारदात की सीबीआई जांच का आदेश दिया है। घटना के पीछे छेड़छाड़ का विवाद होने की बात भी सामने आ रही है। इस तरह के विवादों में कानूनी मदद ली जानी चाहिए थी। दोषियों को कानून के दायरे में सजा दिलवायी जाए। लेकिन, यह कतई भी उचित नहीं है कि कानून को लोग हाथ में ले लें और सोते समय किसी घर को ही फूंक दिया जाए। इस तरह की मानसिकता के लोगों को सरकार कड़ी सजा दिलवाएगी तभी पीड़ित परिवार को न्याय मिल सकेगा।