Source: न्यूज़ भारती हिंदी20 Nov 2015 12:50:06

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ब्रिटेन दौरे की उपलब्धियां वाकई भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण हैं। यह आशंका निर्मूल साबित हुई है कि उनकी यात्रा पर बिहार चुनाव का साया नजर आएगा। न तो ब्रिटिश सरकार के स्वागत में कहीं कोई कमी दिखी न स्वयं मोदी के हावभाव में ही इसका असर था। ब्रिटेन की सरकार जानती है कि मोदी सरकार के पास अभी करीब साढ़े तीन साल का समय है और मोदी स्वयं भारत के लिए आर्थिक विकास के ऐसे कार्यक्रम घोषित कर चुके हैं जिनमें निवेश, व्यापार, सहकार एवं साझेदारी की व्यापक गुंजाइश है। कोई देश अपने हित में संबंधों की रूपरेखा बनाता है। हां, साझा पत्रकार वार्ता में अवश्य असहिष्णुता से लेकर गुजरात दंगे के बाद ब्रिटेन यात्रा पर कथित प्रतिबंध व दादरी हत्या पर प्रश्न पूछे गए, जिनका प्रधानमंत्री मोदी ने अत्यत सुलझे हुए जवाब दिए। ऐसे प्रश्नों का पूर्वाभास प्रधानमंत्री कार्यालय को पहले से था और निश्चय ही मोदी इसके लिए तैयार होकर गए होंगे। उन्होंने एक पत्रकार को जवाब में यहां तक कहा कि 2003 में भी मैं ब्रिटेन आया था तथा मेरे आने पर यहां कोई प्रतिबंध नहीं था आप अपनी जानकारी दुरुस्त करें। आवाज नामक एनजीओ ने प्रधानमंत्री की यात्रा के पहले जो माहौल बनाने की कोशिश की उसका असर वहां की सरकार पर या भारतीय समुदाय द्वारा आयोजित बिम्बले स्टेडियम कार्यक्रम या फिर व्यापारिक समुदाय पर कतई नहीं पड़ा। मोदी गार्ड ऑफ औनर पाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने तो संसद को संबोधित करने वाले भी। यह सामान्य सम्मान नहीं है। राजनीति देश के अंदर सीमित होनी चाहिए। सीमा से बाहर भारत होता है और विदेश नीति पूरे देश की होती है। प्रधानमंत्री देश का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी सफलता देश की सफलता होती है।

यह संतोष का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी ब्रिटेन यात्रा के अपने लक्ष्यों में सफल रहे हैं। आप अगर वहां हुए समझौते तथा व्यवसायियों के बीच प्रधानमंत्री मोदी का भाषण, ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरुन का भाषण एवं वहां के वाणिज्य मंत्री द्वारा दी गई जानकारियों को याद करेंगे तो यह मानना होगा कि इससे भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक, व्यापारिक, ऊर्जा, रक्षा, सुरक्षा, आतंकवाद एवं कुछ अंतरराष्ट्रीय मसलों पर संबंधों और साझेदारी के नए आयाम की शुरुआत हुई है। दोनों देशों के बीच व्यवसाय से संबंधित जो छह समझौते हुए वे अपने-आपमें अहम हैं। भारत में वोडाफोन भारी निवेश करेगा। स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तत्काल 1200 करोड़ का निवेश किया जाएगा। साथ ही चंडीगढ़ में मशहूर किंग्स कॉलेज हॉस्पिटल की एक शाखा भी खोली जाएगी। लंदन में भारतीय रेलवे के लिए ‘रेलवे-रुपी बांड’ जारी होगा। ऐसा पहली बार हो रहा है कि दूसरे देश के एक्सचेंज में रुपया का बांड जारी होगा। गंगा सफाई में ब्रिटेन काम करने के अलावा इंदौर, अमरावती और पुणे को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने में भूमिका निभाएगा। इसके अलावा लाइटसोर्स, सोलर वोल्टिक एनर्जी जेनरेटर, इंटेलीजेंट एनर्जी, क्लीन एनर्जी संबंधी समझौते शामिल हैं। भारत, ब्रिटेन से हॉक ट्रेनर जेट खरीदने पर बातचीत कर रहा है। आनेवाले समय में इसका सौदा हमें देखने को मिलेगा। इस जेट का इस्तेमाल भारतीय वायु सेना अपने पायलटों को प्रशिक्षण देने के लिए करती है। ब्रिटेन भी इस जेट का इस्तेमाल अपने पायलटों की ट्रेनिंग के लिए करता है। भारत और ब्रिटेन के बीच 18 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है। भारत में ब्रिटेन तीसरा बड़ा निवेशक अभी भी है। जाहिर है, इसमें बढ़ोत्तरी की जो संभावना बनी है उसे कैमरुन सरकार हाथ से नहीं जाने देना चाहती।

असैन्य या नागरिक नागरिक नाभिकीय समझौते का महत्व समझना भी कठिन नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के लिए 2022 तक 65 हजार मेगावाट बिजली के उत्पादन का लक्ष्य तय किया हुआ है जिसमें स्वच्छ ऊर्जा के तहत नाभिकीय बिजली की बड़ी भूमिका वो देखते हैं। पिछले पांच वर्ष से इस पर बातचीत हो रही थी जो मोदी की यात्रा के दौरान समझौते की शक्ल में बदल गई। भारत यूरोपीय संघ से भी नाभिकीय सहयोग समझौता पर बातचीत कर रहा है जो अंतिम दौर में है। ब्रिटेन को लगा कि उसके पहले समझौता नहीं किया गया तो उनकी कपंनियां इस मामले में पिछड़ सकती है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान ऐसे समझौते के लिए छटपटा रहा है लेकिन चूंकि अमेरिका ने उससे इन्कार कर दिया, इसलिए उसके साथ अन्य कोई देश ऐसा नहीं करने जा रहा है। इसके साथ इस दौरे की जो अन्य उपलब्धियां रहीं वह है ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरुन द्वारा सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता का खुलकर समर्थन। ब्रिटेन की भूमि से उनने इसे दोहराकर साफ कर दिया कि उनके पक्ष को लेकर किसी प्रकार का संदेह नहीं रहना चाहिए। कैमरुन ने कहा कि आतंकवाद पर बात हुई और आगे बात होगी।

दरअसल, भारत इस समय संयुक्त राष्ट्र में दो दशकों से पड़े कम्प्रिहेंसिव कन्वेन्शन ऑन टेररिज्म यानी आतंकवाद पर सुसंबंद्ध संधि को पारित कराने की कूटनीति पर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संघ के अपने भाषण में इसकी मांग की, अन्य जगहों से भी की और ब्रिटिश संसद में भी इसे उसी तरह रखा। भारत का मानना है कि आतंकवाद की एक निश्चित परिभाषा तय हो और उसमें वे देश चिन्हित हो जाएं जो आतंकवाद के साथ हैं या विरोध में हैं। आतंकवाद और चरमपंथ अब ब्रिटेन को ज्यादा परेशान कर रहा है। कैमरुन ने लंदन हमले से लेकर मुंबई हमलों का जिक्र किया। आईएसआईएस से ब्रिटेन को भी खतरा है। उसके यहां से काफी संख्या में जेहादी इस आतंकवादी समूह में शामिल हुए हैं और ब्रिटेन को जेहादी देश बनाने का ऐलान कर रहे हैं। इसलिए आतंकवाद की परिभाषा ब्रिटेन के हित में भी होगा। ब्रिटेन के साथ हमारा प्रत्यर्पण संधि पहले से है, आतंकवाद पर सहयोग भी है।

मोदी की इस यात्रा में दाऊद इब्राहिम के बारे में एक डोजियर सौंपा गया है। इसमें जो ब्यौरा दिया गया है उसके अनुसार दाऊद और उसके सहयोगियों की ब्रिटेन में 15 संपत्तियां हैं, जिनकी कीमत करीब 1500 करोड़ रुपए है। इस पर खुलासा नहीं हुआ है लेकिन माना जा रहा है कि दाऊद को पकड़ने में वहां की खुफिया एजेंसी नेशनल क्राइम एजेंसी को जिम्मेवारी दी जा सकती है। इसी तरह खालिस्तानी आतंकवाद से जुड़ा डोजियर भी दिया गया है जिसमें आईएसआई की मदद से चलाए जा रहे खालिस्तानी आतंकवाद का जिक्र है। ब्रिटेन में कुछ सिख संगठन हैं जो वहां भारत विरोधी गतिविधियों में लगे हैं। देखना होगा ब्रिटेन इस दिशा में कितना काम करता है। यह आतंकवाद के विरुद्ध एक अच्छी कूटनीति है।

ब्रिटेन और भारत का एक रिश्ता औपनिवेशिक संबंधों से आरंभ होता है। किंतु भारत ने उस दौर को पीछे छोड़कर उसके साथ समानता के आधार पर संबंधों का निर्माण किया है। 15 लाख भारतीय ब्रिटेन में रहते हैं। वे केवल व्यवसाय में ही नहीं वहां की बौद्धिक व राजनीतिक दुनिया में भी महत्वपूर्ण स्थानों पर हैं। वे भारत के लिए वहां दूत का काम कर रहे हैं। आज ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरुन यदि भारत के प्रधानंमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी यात्रा के दौरान दो दिन हर कार्यक्रम मे साये की तरह लगे रहे तो यह सामान्य स्थिति थोड़े ही है। इसका अर्थ भारत से व्यापारिक एवं सामरिक रिश्ते में तो है ही भारत के विश्व पटल पर बढ़ते हुए कद और सम्मान का भी द्योतक है। महारानी एलिजाबेथ यदि भारतीय प्रधानमंत्री के लिए भोज का आयोजन करतीं हैं तो इसका भी अपना महत्व कम नहीं है। इसलिए व्यापारिक एवं सामरिक समझौतों, साझेदारी के साथ भारत को लेकर ब्रिटेन के पूरे हाव-भाव से जो संकेत मिल रहा है वह भी हमारे लिए मायने रखता है और इसे कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

कुछ लोग हाल में संपन्न चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दौरे से प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की तुलना कर रहे हैं। शी का भी ब्रिटेन ने काफी स्वागत किया। जहां तक स्वागत और सम्मान की बात है उसमें भारतीय प्रधानमंत्री के संदर्भ में कोई कमी नहीं आई। मोदी को कैमरुन ने अपने आवास में ठहराया एवं दोनों ने साथ-साथ सुबह योग किया। ब्रिटिश मीडिया लिख रहा है कि भारत के प्रधानमंत्री को चीन के राष्ट्रपति से ज्यादा महत्व मिल रहा है। हम भारत में राजनीतिक विभाजन के कारण कई प्रकार के प्रचार और दुष्प्रचार के शिकार होकर हीनग्रंथि से अपने देश को देखते हैं। दुनिया भारत को अपने नजरिए से देखती है और वह नजरिया यह है कि भारत उभरती हुई आर्थिक एवं सामरिक महाशक्ति है। इस समय भारत दुनिया का नौवां सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति वाला देश है। जी-20 में शामिल देशों की तुलना में सबसे ज्यादा तेजी से यह आगे बढ़ रहा है। इसके आर्थिक विकास की गति 7.4 है। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन के कारोबारियों के बीच अपनी बात रखते हुए उन उपलब्धियों का जिक्र किया जो कि विश्व की संस्थाओं ने माना है।