Source: न्यूज़ भारती हिंदी26 Nov 2015 16:00:58

आमिर खान के बयान के बाद बिहार चुनाव के नतीजों के बाद थम गई कथित असहिष्णुता पर बहस फिर गर्मा सकती है, जो देश की अंतरराष्ट्रीय जगत में नकारात्मक छवि का कारण बन सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया में घूमकर भारत की सकारात्मक छवि पेश करने और निवेशकों को आकर्षित करने की मुहिम को धक्का पहुंच सकता है। जो लोग असहनशीलता के लिए केंद्र सरकार को कोस रहे हैं, वे जाने अनजाने देश का ही अहित कर रहे हैं। 

देश में कथित तौर पर बढ़ती असहिष्णुता पर जारी बहस में अभिनेता आमिर खान भी शामिल हो गए हैं। उनकी नजरों में देश का माहौल इस कदर खराब हो गया है कि वे भारत छोड़ने तक की बात करने लगे हैं। पिछले कुछ महीनों से साहित्यकारों, फिल्मकारों द्वारा चलाई जा रही अवार्ड लौटाने की मुहिम से यह एक कदम आगे बढ़ने वाली बात प्रतीत होती है। आमिर खान 'अतुलनीय भारत' का प्रचार करते रहे हैं, लेकिन अब वे इस तरह की बात कह आखिर क्या साबित करना चाहते हैं। वे गंभीर कलाकारों में गिने जाते हैं। आमिर की फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं, समाज को गंभीर संदेश देने वाली होती हैं।

इस कड़ी में कई फिल्में गिनाई जा सकती हैं, जो समाज को एक सकारात्मक संदेश देने में सफल रही हैं। उनके ‘सत्यमेव जयते’ नामक धारावाहिक को भी काफी सराहा गया। उनको इस तरह की राजनीति से प्रेरित मुहिम को हवा देने से पहले जरूरी सोच विचार कर लेना चाहिए क्योंकि ऐसी बातों से सिर्फ उन्हें मीडिया में कवरेज मिल जाएगा, लेकिन देश को कोई फायदा नहीं होगा।   

दुनियाभर में भारत की बदनामी ही होगी, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी बातें सुनी जाती हैं। हां, इससे उन कुछ राजनीतिक दलों व संगठनों को लाभ हो सकता है जो नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहते हैं। देश में लोगों में कुछ हद तक असहनशीलता हो सकती है, जिससे वे कभी-कभी कानून को हाथ में लेकर हिंसक वारदातों को अंजाम देते देखे जा सकते हैं, अब उसके बिना पर देश छोड़ने की बात आपत्तिजनक होने के साथ-साथ अफसोसजनक भी है। इससे देश में उनके करोड़ों प्रशंसक जरूर आहत हुए होंगे।

हालांकि अपने इंटरव्यू में आमिर खान ने यह नहीं कहा है कि उनकी पत्नी ने जब देश छोड़ने की बात की तो उन्होंने क्या कहा? उम्मीद है कि उन्होंने अपने परिवार को कहा होगा कि यह डर गलत है, भारत का ऐसा चरित्र नहीं है, यह देश सभी का है। यदि उन्होंने ऐसा नहीं कहा होगा तो वह गलत है, क्योंकि उनसे देश इसकी उम्मीद नहीं करता है। हिंसक घटनाओं के प्रति संवेदनशील होना अलग बात है, लेकिन आमिर खान को वास्तविक जीवन में भी एक जिम्मेदार नागरिक की तरह पेश आते देश देखना चाहता है।

भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां सभी को अपने विचार रखने की आजादी है, लेकिन चर्चित लोगों को कुछ कहने से पहले यह भी सोचने की जरूरत है कि क्या बोल रहे हैं। आमिर खान के बयान के बाद बिहार चुनाव के नतीजों के बाद थम गई कथित असहिष्णुता पर बहस फिर गर्मा सकती है, जो देश की अंतरराष्ट्रीय जगत में नकारात्मक छवि का कारण बन सकती है।

इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दुनिया में घूमकर भारत की सकारात्मक छवि पेश करने और निवेशकों को आकर्षित करने की मुहिम को धक्का पहुंच सकता है। जो लोग असहनशीलता के लिए केंद्र सरकार को कोस रहे हैं, वे जाने अनजाने देश का ही अहित कर रहे हैं। जाहिर है, अब कथित असहिष्णुता के खिलाफ राजनीति से प्रेरित यह मुहिम बंद होनी चाहिए, क्योंकि देश में इस तरह का कोई वातावरण नहीं है।