Source: न्यूज़ भारती हिंदी09 Dec 2015 12:58:22

गत दिनों उत्तर प्रदेश के ताकतवर मंत्री आजम खान ने कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस देश में आतंकवाद शुरू होने की सबसे बड़ी वजह है। उनका यह भी कहना है कि 06 दिसम्बर, 1992 को अयोध्या की उक्त घटना के बाद ही देश ने आर.डी.एक्स. और ए.के.47 के बारे में जाना।

यदि आतंकवाद या यो कहें कि जेहादी आतंकवाद की शुरूआत 6 दिसम्बर, 1992 के बाद ही हुई तो ऐसी स्थित में क्या आजम खान यह बताएंगे कि 1989-90 में लाखों काश्मीरी पंडितों को उनके घरों से क्यों निकाल दिया गया? उनकी और यहां तक कि उनके मासूम बच्चों की नृशंसा हत्याएं क्यों की गईं? उनकी औरतों और बेटियों के साथ अमानुषिक बलात्कार क्यों किया गया? यह कहकर कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग राष्ट्र हैं और वह एक साथ नहीं रह सकते-देश का विभाजन क्यों कराया गया। उस विभाजन में लाखों हिंदुओं की हत्या क्यों की गई? माँ-बहनों की आबरू क्यों लूटी गई? इतिहास में जिसे मध्यकाल कहा जाता है उसमें करोडों लोगों को इस्लाम में मतांतरित क्यों किया गया? लाखों-लाख मंदिर क्यों गिरा दिए गए और बहुतों को मस्जिद में क्यों बदल दिया गया? स्वतः आजम खान जिसे बाबरी मस्जिद कहते हैं, उसे राम मंदिर तोड़कर मस्जिद में क्यों बदला गया?

यह बताने की जरूरत नहीं की यह वही आजम खान हैं, जिन्होंने 13 नवम्बर को पेरिस में आई.एस.आई के आतंकियों द्वारा सैकडों लोगों की जान लेने को क्रिया की प्रतिक्रिया कहा था। यानी आई.एस.आई. के उपरोक्त दरिंदगी को जायज ठहराया था। एक बार यदि यह मान लिया जाय कि भारत में बाबरी ढांचा गिराए जाने के चलते आतंकवाद पनपा तो क्या आजम खान  यह बताएंगे कि दुनिया के अधिकांश मुस्लिम देश आतंकवाद के साए में क्यों जी रहे हैं? क्यों बीते चार सालों में सीरिया, इराक, अफगानिस्तान, यमन तथा कुछ और मुस्लिम देशों में ही पांच लाख मुस्लिमों की हत्याएं हुई और 70 लाख मुस्लिम शरणार्थी हो गए?

आजम खान को इसका भी जवाब देना चाहिए कि कट्टर सुन्नी आतंकवादी मुस्लिमों के दूसरों तबकों यानी शिया, कुर्द, अहमदिया को मुसलमान न मानकर उनकी हत्याएं क्यों कर रहे हैं? आजम खान और उनके जैसे लोगों ने इन दिनों देश में खूब असहिष्णुता का राग अलापा, यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र तक पहुंच गए। लेकिन पूरी दुनिया में इस्लाम के इस खतरनाक और निहायत असहिष्णु चेहरे को देखकर भी वह चुप हैं, शायद प्रकारांतर से उनके साथ हैं। आजम खान के पास इस बात का क्या जवाब है कि दंगों की शुरूआत आम तौर से मुसलमानों की ओर से क्यों होती है? आजम खान को इसका भी जवाब देना चाहिए कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं पर आए दिन अत्याचार क्यों हो रहे हैं? और दिनों-दिन वहां उनकी आबादी क्यों घटती जा रही है जबकि भारत में मुस्लिमों की आबादी बढ़ रही है?