- लखेश्वर चंद्रवंशी ‘लखेश’

कोई सपने में भी नहीं सोच सकता कि शिवशाहिर बाबासाहेब पुरंदरे जैसे महान व्यक्तित्व को “महाराष्ट्र भूषण” दिए जाने का कोई विरोध करेगा। बलवंत मोरेश्वर पुरंदरे उपाख्य बाबासाहेब पुरंदरे एक महान इतिहासविद, मराठी साहित्यिक, लेखक, नाट्यकार, निर्देशक जैसे बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। आज जब महाराष्ट्र सरकार द्वारा राज्य का सबसे बड़ा सम्मान “महाराष्ट्र भूषण” दिया गया, तो महाराष्ट्र की जनता का हृदय अपार ख़ुशी से गदगद है। इस सम्मान का समाचार सुनकर शिवाजी महाराज से प्रेम करनेवाले दुनिया के करोड़ों लोग जिन्होंने कभी न कभी “जाणता राजा” महानाट्य देखा है, या इस नाटक के बारे में सुना है, वे भी महाराष्ट्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं और अपना आनंद भी व्यक्त कर रहे हैं।  

विरोध क्यों ?

महाराष्ट्र के गौरवमय इतिहास का लेखन करनेवाले बाबासाहेब पुरंदरे को महाराष्ट्र भूषण सम्मान से एक तरफ पूरा समाज गदगद है, वहीं महाराष्ट्र के कुछ नेता, साहित्यकार व संगठनों का इसके विरोध में स्वर उठाना बहुत निंदनीय है। राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) के नेता जितेन्द्र आव्हाड, ज्ञानपीठ पुरुस्कार विजेता भालचंद्र नेमाडे, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के पूर्व प्रमुख न्यायमूर्ति पी.बी.सावंत तथा संभाजी ब्रिगेड जैसे संस्थाओं को मूर्ख नहीं तो क्या कहा जाए जो बाबासाहेब के इस सम्मान का विरोध कर रहे हैं। हद तो तब हो गई जब संभाजी ब्रिगेड के पद्माकर काम्बले और राहुल पोकले ने इस सम्बन्ध में बॉम्बे हाईकोर्ट में पीआईएल (जनहित याचना) दाखिल की। याचिकाकर्ता के वकील शेखर जगताप ने कहा कि बाबासाहेब पुरंदरे “महाराष्ट्र भूषण” सम्मान के लिए बने नियम और शर्तों पर खरे नहीं उतरते। जवाब में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बाबासाहेब पुरंदरे को महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार देने के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज कर दी और याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपया जुर्माना लगाया है। न्यायालय के जज ने कहा कि पुरस्कार मांगने पर नहीं बल्कि योग्यता देखकर दिया जाता है। उस योग्यता की व्याख्या बड़ी वृहद है, समाज सेवा, उल्लेखनीय योगदान, सेवा भाव, विशिष्ट काम आदि। कोर्ट ने याची को फटकार लगाते हुए कहा, क्या आप कहना चाहते हैं कि उन्होंने कोई काम नहीं किया? कोर्ट ने कहा कि यह मंत्री के कमरे में तय नहीं हुआ वरन समिति ने तय किया है।

उल्लेखनीय है कि इस समिति में राज्य सांस्कृतिक मामलों के मंत्री विनोद तावडे, सांस्कृतिक मामलों के सचिव वलसा नायर सिंह, सांस्कृतिक मामलों के निदेशक अजय आंबेकर और गैर-सरकारी सदस्यों वासुदेव कामत, क्रिकेटर दिलीप वेंगसरकर, प्रख्यात सरकारी वकील उज्ज्वल निकम, पत्रकार राजीव खांडेकर तथा सामाजिक कार्यकर्ता मंगला काम्बले का नाम शामिल है। इस समिति ने सर्वसम्मति से इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए बाबासाहेब पुरंदरे के नाम पर सहमति व्यक्त की व्यक्त की थी। इसलिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनविस ने 1 मई को महाराष्ट्र के स्थापना दिवस के अवसर पर इसकी घोषणा की थी। 19 अगस्त, 2015 को बाबासाहेब पुरंदरे को महाराष्ट्र के सबसे बड़े सम्मान राज्यपाल भवन में “महाराष्ट्र भूषण” से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार के तहत महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.एच. विद्यासागर राव तथा मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनविस के हस्ते बाबासाहेब को प्रमाणपत्र के साथ 10 लाख राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की गई।   

बाबासाहेब पुरंदरे का जीवन व अतुलनीय योगदान 

बलवंत मोरेश्वर उपाख्य बाबासाहेब पुरंदरे का जन्म 29 जुलाई, 1922 को पुणे जिला के सासवड नामक छोटे से गांव में हुआ। बाबासाहेब बचपन से ही इतिहास प्रेमी रहे हैं। उनके जीवन में छत्रपति शिवाजी महाराज का सबसे बड़ा स्थान है। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक जीवन, स्थान, पुरातत्व व साहित्य के शोध व लेखन में अर्पित कर दिया। इतना ही नहीं तो बाबासाहेब पुरंदरे ने शिवाजी महाराज के जीवन को समाजाभिमुख बनाने के लिए महानाट्य लेखन, निर्देशन व वक्तृता जैसे लोकप्रिय विधाओं का उपयोग किया।    

नाट्यलेखन व निर्देशन

बाबासाहेब पुरंदरे ने फुलवंती और जाणता राजा नामक नाटक लिखा और उसका निर्देशन भी किया। “जाणता राजा” महानाट्य को उन्होंने महाराष्ट्र ही नहीं वरन भारत के अनेकों राज्यों व भारत के बाहर कुछ देशों में इसे प्रस्तुत किया। ‘जाणता राजा’ का 27 वर्षों में देश-विदेश में 1250 बार प्रस्तुतिकरण किया गया। यह अपनेआप में एक कीर्तिमान है। इस पहली बार 14 अप्रैल, 1984 में प्रस्तुत किया गया था। मूलतः मराठी भाषा में रचित इस महानाट्य को हिंदी तथा अंग्रेजी सहित 5 अन्य भाषाओं में अनुवादित किया गया। ‘जाणता राजा’ में 150 से अधिक कलाकार अभिनय करते हैं। रंगमंच पर हाथी और घोड़ों का भी समावेश रहता है। इसकी प्रस्तुति के लिए बहुत बड़ा मैदान लगता है। इस महानाट्य में वह शक्ति है जो दर्शक को मंत्रमुग्ध कर उसे वीरता, समर्पण, त्याग और देशभक्ति से भर देता है।

बाबासाहेब पुरंदरे ने महाराष्ट्र के इतिहास में असत्य और भ्रामक लेखन करनेवालों कि पोल खोलते हुए सत्य को तथ्यों के धरातल पर प्रगट किया। उन्होंने हजारों युवकों को शिवाजी महाराज के रणकौशल, किल्ले व इतिहास बोध से दीक्षित किया। उनके इस महान योगदान के चलते आज हजारों वक्ता, कीर्तनकार समाज में जन जागरण का कार्य कर रहे हैं। बाबासाहेब पुरंदरे शिवाजी महाराज पर 2015 तक 12,000 से अधिक व्याख्यान देकर नया कीर्तिमान स्थापित किया।  

इतिहास व साहित्य लेखन

संयम, धैर्य, लगन, समर्पण, अतुलनीय मेधा जैसे गुणों के धनी बाबासाहेब पुरंदरे ने अपने विलक्षण विश्लेषणक्षमता और ऐतिहासिक शोध के बल पर लेखन प्रतिभा व वक्तृता से समाज को जाग्रत किया। पुणे विश्वविद्यालय के ‘मराठा इतिहासाची शकावली – 1740 ते 1761’ इस भारत इतिहास संशोधन मंडल के संशोधन प्रकल्प में बाबासाहेब पुरंदरे ने बतौर संशोधक योगदान दिया। बाबासाहेब पुरंदरे ने महाराष्ट्र के किले, मराठा साम्राज्य तथा शिवकालीन ऐतिहासिक दस्तावेजों का गहन अध्ययन किया। इसके साथ ही उन्होंने ऐतिहासिक विषयों पर वर्णनात्मक लेखन, बाल उपन्यास तथा नाट्य लेखन का महत कार्य किया। पुरंदर्‍यांची दौलत, पुरंदर्‍यांची नौबत, गढ़-किलों की जानकारी देनेवाले साहित्य (गडसंच),  शेलारखिंड तथा राजा शिवछत्रपति ये बाबासाहेब की मराठी भाषा में प्रकाशित साहित्य हैं। शिवचरित्र हर घर में पहुंचे इस ध्येय को सामने रखकर बाबासाहेब ने अनथक प्रयत्न कर राजा शिवछत्रपति नामक ग्रन्थ की रचना की। अबतक इस ग्रन्थ की 17 आवृत्ति प्रकाशित हो चुकी है।

बाबासाहेब पुरंदरे रचित कुल मराठी साहित्यों में आग्रा (आगरा), कलावंतिणीचा सज्जा, जाणता राजा, पन्हाळगड, पुरंदर, पुरंदरच्या बुरुजावरून, पुरंदर्‍यांचा सरकारवाडा, पुरंदर्‍यांची नौबत, प्रतापगढ़, फुलवंती, महाराज, मुजर्‍याचे मानकरी, राजगढ़, राजा शिवछत्रपति पूर्वार्ध आणि उत्तरार्ध, लालमहाल, शिलंगणाचं सोनं तथा शेलारखिंड (ऐतिहासिक उपन्यास) का समावेश है। इस उपन्यास पर अजिंक्‍य देव और पूजा पवार की मुख्य भूमिकावाली “सर्जा” नामक मराठी फिल्म भी बन चुकी है। इसके अतिरिक्त बाबासाहेब पुरंदरे के कथाकथन की भाग-1, 2 व 3 (कैसेट्‌स और सीडीज) निकल चुकी है। शिवचरित्र कथन भाग 1 से 15 के कैसेट्स और सीडीज का सेट बेहद लोकप्रिय हैं।

गोवा मुक्ति संग्राम

इतिहास प्रेमी बाबासाहेब पुरंदरे किशोर अवस्था से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े हैं। भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् जब गोवा, दीव-दमन और दादरा नगर हवेली के स्वतंत्र होने की उम्मीद आंखों से ओझल होने लगी थी। पुर्तगालियों ने इन क्षेत्रों को अपने अधीन कर लिया था। स्वतंत्रता मिलने के बाद भी हमारी मातृभूमि का कुछ हिस्सा परतंत्र है, इसका दुःख सबको था। ऐसे समय में “आजाद गोमान्तक दल” की स्थापना कर इस दिशा में प्रयत्न किया गया। इस हेतु महाराष्ट्र-गुजरात की सीमा से लगे दादरा नगर हवेली में शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे, संगीतकार सुधीर फड़के, खेलकूद प्रसारक राजाभाऊ वाकणकर, शब्दकोश रचयिता विश्वनाथ नरवणे आदि ने इस आन्दोलन को मुखर बनाया और इसे सफलता तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बाबासाहेब को प्राप्त सम्मान और पुरस्कार

राजामाता सुमित्राराजे भोसले, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील, पूर्व उप-प्रधानमंत्री यशवंतराव चव्हाण, पूर्व मुख्यमंत्री वसंतदादा पाटील, शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे, पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी,  इतिहास संशोधक एन.आर. फाटक, कवि कुसुमाग्रज, सेतुमाधवराव पगडी, आचार्य अत्रे, शिवाजीराव भोसले, नरहर कुरुंदकर, लता मंगेशकर, डॉ. रघुनाथ माशेलकर, डॉ. विजय भटकर आदि विख्यात महानुभावों ने बाबासाहेब पुरंदरे को विविध पुरस्कारों और सम्मानों से गौरवान्वित किया। इतना ही नहीं तो डी.वाय. पाटिल के अभिमत विद्यापीठ ने इतिहास संशोधन में उनके अतुलनीय योगदान के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस के अध्यक्ष शरद पवार के हस्ते 14 अप्रैल, 2013 में बाबासाहेब को ‘डी.लिट.’ की पदवी प्रदान की गई।

डॉ. सागर देशपांडे ने बाबासाहेब पुरंदरे का सचित्र चरित्र लिखकर ‘बेलभंडारा’ नामक पुस्तक प्रकाशित किया। हाल ही में 19 अगस्त, 2015 को भाजपा-शिवसेना गठबंधनवाली महाराष्ट्र सरकार ने बाबासाहेब को महाराष्ट्र राज्य का सबसे बड़े पुरस्कार “महाराष्ट्र भूषण” के गौरवमयी पुरस्कार से अलंकृत किया।

“महाराष्ट्र भूषण” पुरस्कार का महत्त्व

“महाराष्ट्र भूषण” पुरस्कार यह महाराष्ट्र सरकार का सबसे बड़ा अवार्ड है। जब 1995 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-शिवसेना की संयुक्त सरकार थी तब इसे पहली बार स्वरूप दिया गया। पहला महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार 1996 में दिया गया। यह सम्मान साहित्य, कला, खेल, विज्ञान, समाज सेवा, पत्रकारिता, लोक प्रशासन और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार तहत सम्मानित महानुभाव को प्रमाण पत्र के साथ 5 लाख की नगद राशि भेंट की जाती रही है, पर इसबार महाराष्ट्र सरकार ने 2015 में इस राशि को बढ़ाकर 10 लाख कर दिया। इस पुरस्कार के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाई गई समिति विजेता के नाम का निर्णय लेती है।

अबतक महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार से इन महानुभावों को सम्मानित किया गया है।  

अनुक्रम

वर्ष

सम्मानित व्यक्ति

क्षेत्र

1.

1996

पु. ल. देशपांडे

साहित्य

2.

1997

लता मंगेशकर 

कला, संगीत

3.

1999

विजय भटकर

विज्ञान

4.

2001

 

सचिन तेंडुलकर

खेल

5.

2002

पंडित भीमसेन जोशी

कला, संगीत

6.

2003

अभय बंग व रानी बंग

चिकित्सा कार्य

7.

2004

बाबा आमटे

समाज सेवा

8.

2005

रघुनाथ अनंत माशेलकर

विज्ञान 

9.

2006

रतन टाटा

लोक प्रशासन

10.

2007

आर. के.  पाटील

समाज सेवा

11.

2008

नानासाहेब धर्माधिकारी

समाज सेवा

12.

2008

मंगेश पाडगांवकर

साहित्य

13.

2009

सुलोचना लाटकर    

कला, सिनेमा

14.

2010

जयंत नारलीकर

विज्ञान

15.

2011

अनिल काकोडकर

विज्ञान

16.

2015

बाबासाहेब पुरंदरे

साहित्य