Source: न्यूज़ भारती हिंदी21 Aug 2015 14:59:48

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में हुए विस्फोट में 27 लोगों का तत्क्षण मरना एवं 100 से ज्यादा लोगों का घायल होना किसी छोटे विस्फोट की परिणति नहीं हो सकती। अबतक इस इस घटना की जिम्मेवारी किसी आतंकी संगठन ने नहीं ली है, इसलिए केवल कयास ही लगाया जा सकता है। लेकिन मोटरसाइकिल का विस्फोटक के रूप में उपयोग करना, मंदिर को और बाहर वहां के भीडभाड़ वाले प्रमुख पर्यटक स्थल को निशाना बनाना...यह किसी अपरिपक्व, गैर अनुभवी व्यक्ति एवं समूह का काम नहीं हो सकता।

निश्चय ही यह अकल्पनीय हिंसक घटना है। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में इस तरह का सुनियोजित हमला हो सकता है इसकी कल्पना किसी को नहीं थी। अमेरिका और इजरायल जैसे देशों की सुरक्षा एजेंसियों ने भी कोई इनपुट नहीं दिया था। विस्फोटों में 27 लोगों का तत्क्षण मरना एवं 100 से ज्यादा लोगों का घायल होना किसी छोटे विस्फोट की परिणति नहीं हो सकती। मृतकों एवं घायलों की संख्या न जाने और कितनी ज्यादा होती अगर दो जिन्दा बम वहां के सुरक्षा बलों ने बरामद न किया होता। पता नहीं उनको कब विस्फोट किया जाना था। इस घटना की जिम्मेवारी किसी संगठन ने नहीं ली है, इसलिए केवल कयास ही लगाया जा सकता है। लेकिन मोटरसाइकिल का विस्फोटक के रूप में उपयोग करना, मंदिर को और बाहर वहां के भीडभाड़ वाले प्रमुख पर्यटक स्थल को निशाना बनाना जहां तीन बड़े शौपिंग मॉल हों, अंतरराष्ट्रीय स्तर के कौटिंनेंटल होटल हों, और विस्फोट के लिए शाम का का चयन जब लोगों की संख्या वहां ज्यादा रहती हो...किसी अपरिपक्व, गैर अनुभवी व्यक्ति एवं समूह का काम नहीं हो सकता। यह हर दृष्टि से किसी प्रशिक्षित छोटे-बड़े समूह का कुकृत्य है जिसमें भूमिका चाहे जिस किसी की हो, इसे आतंकवादी घटना मानने में कोई समस्या है ही नहीं। बैंकॉक के पुलिस प्रमुख इसे पर्यटन को क्षति पहुंचाने वाला या आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाला करार दिया है। निस्संदेह, आतंकवादियों ने हमले की योजना बनाते समय इन पहलुओं का ध्यान रखा होगा। आतंकवादी घटनाओं के साजिशकर्ता मानवीय के साथ संबंधित देशों को आर्थिक क्षति पहुंचाने की कोशिश करते हैं।

वास्तव में पर्यटक स्थल एवं आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाना आतंकवादियों की मॉडस औपरांडी में पहले से शामिल है। इसलिए आश्चर्य की कोई बात नहीं है। लेकिन यहां मुख्य प्रश्न है कि आखिर थाइलैंड जैसे देश को आतंकवादियों ने क्यों निशाना बनाया होगा? इसका सामान्य उत्तर तो यही है कि आतंकवादियों के लिए कोई भी जगह अछूत नहीं है। जहां लोगों को मारा जा सकता है, जिससे हिंसक शक्ति की सफलता का संदेश देना संभव है, जहां उस देश के साथ विदेशी निशाना बन सकते हैं...ऐसे किसी भी स्थान को वे किसी समय निशाना बना सकते हैं। ध्यान रखिए मरनेवालों में चार विदेशी नागरिक थे। पहले हम विस्फोट की शक्ति और उसके स्थान के महत्व को समझने की कोशिश करें। यह कहा जा रहा है कि विस्फोट के लिए पाइप बम का प्रयोग हुआ, रिमोट के जरिए इसे उड़ाया गया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पूरा क्षेत्र काफी देर तक आग की लपटों, धुएं और मलबों के गुबार से भर गया था। मोटरसाइकिलें एवं कारों में आग लगने से वे फट रहे थे। कम से कम 45 वाहनों के जलने की खबर हैं। कितना भयावह दृश्य रहा होगा इसकी कल्पना करिए। उसमें भी जिस देश ने कभी ऐसी आतंकवादी घटना को देखा न हो, या ऐसा होने की कल्पना नहीं की हो, वहां के लोगों का मनोविज्ञान अभी तक कैसा होगा इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है।

हालांकि पिछले फरवरी में शॉपिंग मॉल के बाहर एक विस्फोट हुआ था जिसमें भी दो पाइप बमों का इस्तेमाल किया गया था लेकिन उसमें ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। संभवतः इसलिए उसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया जितना लिया जाना चाहिए था। इतना बड़ा विस्फोट हो सकता है इस दिशा में किसी की सोच गई ही नहीं। वैसे बैंकाक शहर में अभी मॉर्शल लॉ लगा हुआ है। थाइलैंड में मई 2014 से ही सेना का शासन है जिसे जुंटा कहा जाता है। इसलिए वहां की पुलिस का कहना है कि बम के जरिए हमला करके वहां पर तनाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इस विस्फोट का एक पहलू यह हो सकता है। बैंकाक में 19 जनवरी को सरकार विरोधी प्रदर्शन में हुए विस्फोट में भी 28 लोग घायल हो गए थे। प्रधानमंत्री यिंगलक शिनवात्रा को सत्ता से बेदखल करने के लिए उस दौरान नियमित प्रदर्शन हो रहे थे। उस समय एक आदमी प्रेस सेंटर पर बम फेंककर भाग गया था। सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों को अपने पीछे आते देखकर हमलावर ने उन पर एक और बम फेंका। वहां ऐसे समूह हैं जो कि बड़े राजनीतिक सुधारों की मांग कर रहे हैं। लेकिन वे इतने बड़े हमले को अंजाम देंगे इसकी संभावना नहीं है। किसी पर बम फेंककर भागने और इस तरह शृंखलाबद्ध विस्फोटों की सफल साजिश रचने में मौलिक अंतर है।

हम इसका विश्लेषण करते समय यह तथ्य कभी न भूलें कि थाईलैंड की राजधानी में यह पहला इतना बड़ा हमला है। ध्यान रखने की बात है कि विस्फोट जिस इरावन मंदिर में हुआ वह ब्रह्मा जी का मंदिर है। जाहिर है, हिन्दुओं के लिए यह प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां बौद्ध भी आते हैं। जो दो बम बरामद हुए वो मंदिर के अंदर से ही मिले थे जिन्हें निष्क्रिय किया गया। वास्तव में थाईलैंड पुलिस ने इस बात को संभवतः रणनीतिवश कभी स्वीकार नहीं किया, पर जेहादी तत्वों की उपस्थिति भी वहां बढ़ी है। वहां हाल में छोटे-मोटे मुस्लिम कट्टरपंथी समूह से पुलिस की मुठभेड़ की खबरें आती रहतीं हैं। रॉयटर समाचार एजेंसी के संवाददाता ने इसी ओर इशारा किया है। पुलिस ने बताया कि पहला विस्फोट मंदिर के बाहर स्थित एक पोल पर लगाए गए विस्फोटक में हुआ। इसके तुरंत बाद मोटरबाइक में लगे बम में विस्फोट हुआ, जिसके कारण टैक्सियां उड़ गईं। थाईलंड के रक्षा मंत्री प्रावित वोंगसुवोंग ने कहा कि यह टीएनटी बम था। बम पांच किलोग्राम टीएनटी से बना हुआ था। इसका सबसे बड़ा प्रभाव विस्फोट 40 मीटर की त्रिज्या में हुआ है।

टीएनटी बन बनाने की विशेषज्ञता यूं ही प्राप्त नहीं होती। इसका अर्थ है कि थाईलैंड में ऐसे समूह हैं जो किसी न किसी तरह स्लीपर सेल तैयार कर रहे हैं। वैसे भी इंडोनेशिया में जेहादी तत्व पहले विस्फोट कर चुके हैं। उनमें पकड़े गए लोगों के संबंध अल कायदा से निकले थे। वस्तुतः पूर्वी एशिया में जेहादी तत्वों का विस्तार पहले से स्पष्ट है। मलेशिया, इंडोनेशिया में कट्टरपंथ जिस प्रकार बढ़ा और सशक्त हुआ वह किसी से छिपा नहीं है। म्यांमार तक में इनने पैठ बनाने की कोशिश की है। थाइलैंड में इनका संपर्क और विस्तार बिल्कुल नहीं हुआ होगा यह मानने का कोई कारण नहीं है। संभव है ये राजनीतिक हालात का लाभ उठाकर देश में हिंसा और अशांति पैदा करना चाहते हों। आखिर एक हिन्दू मंदिर को निशाना बनाने का क्या तात्पर्य हो सकता है? लेकिन जो आतंवादी मस्जिदों को निशाना बनाने से नहीं चूकते वो मंदिरों या किसी दूसरे धर्मस्थलों को कैसे छोड़ देंगे? तो इस भयावह संभावना को किसी तरह नकार नहीं सकते हैं।

मान लीजिए कि विस्फोट करनेवालों का वैश्विक स्तर पर सक्रिय आतंकवादी समूहों से रिश्ता न हो। तो भी इससे बहुत ज्यादा या मौलिक अंतर नहीं आता है। इस समय विश्व स्तर पर सक्रिय आतंकवाद में किसी संगठन से सीधा रिश्ता अनिवार्य नहीं रह गया है। उनसे प्रभावित होकर भी व्यक्ति आतंकवाद की ओर आ रहे हैं, वे छोटे-मोटे समूह बना लेते हैं और फिर हिंसा की साजिश में अंतर्लिप्त हो जाते हैं। या कुछ अलग तरीके से आतंकवाद को प्रोत्साहित करते रहते हैं। मूल बात है आतंकवादी घटना। वह चाहे छोटा संगठन करे, बड़ा संगठन करे, संगठनहीन समूह करे या कोई अकेला व्यक्ति...परिणति तो एक ही है, खून, आग और विनाश। ये कहीं भी किसी समय किसी रूप में अपने खतरनाक कारनामों को अंजाम दे सकते हैं। इनका एक ही मजहब है हिंसा, एक ही विचार है हिंसा और पूरी सोच एक ही बिंदु पर केन्द्रित है, हिंसा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुबई संबोधन में यही कहा कि आतंकवाद से कोई जगह सुरक्षित नहीं है। दुनिया को मिलकर इसके खिलाफ लड़ाई लड़ने का समय आ गया है। आतंकवाद के पीछे का कारण जो हो, उसके पीछे जो भी तत्व हों ये पूरी दुनिया की सभ्यता को हिंसक चुनौती दे रहे हैं और उनका मुकाबला करते समय यही सोच प्रबल होनी चाहिए।