Source: न्यूज़ भारती हिंदी22 Aug 2015 13:35:21

बदलता हरियाणा

सुशासन की ओर बढ़े कदम, भाजपा सरकार का ऐतिहासिक निर्णय

पंचायती संस्था चुनावों में शिक्षा योग्यता एवं पात्रता अनिवार्य

भारत दुनिया का सबसे मजबूत लोकतंत्र है। यहां गांव इकाई से लेकर नगरनिगम व नगरपालिका में चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी होती है। हर कोई यहां निर्धारित पैमाने का अनुसरण करते हुए चुनाव में भागेदारी कर सकता है, जो नियमावली सविधान के अनुसार स्वतंत्रता के बाद से ही चली आ रही है। इसमें समयानुसार कुछ बदलाव भी किए गए हैं, लेकिन इसमें अब तक अनपढ़ता का भी बोलबाला होता रहा। ऐसे में योग्यता एवं पात्रता के साथ-साथ शिक्षण की भूमिका को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता हैं। ताकि लोकतंत्र में सुशासन हो और वह जनता के प्रति बेहतर जवाब देह बन सके। कई ऐसे अवसर आए हैं जब आपराधिक मामलों में संलिप्त व्यक्तियो ने इसका फायदा उठाया है और कभी लठ-बल तो कभी धन-बल के बलबूते व चुनाव मैदान में उतरे और अपने व्यक्तित्व प्रभाव का जबरन इस्तेमाल किया और जनता को न चाहते हुए भी उन प्रत्याशियों का चयन करना पड़ा। यह शुभ संकेत नहीं रहा। लेकिन करीब 7 दशकों में भी हम वह सब निर्धारित नहीं कर पाए, जिसे सुशासन के लिए करना चाहिए था। इसे देश की उन राजनीतिक दलों की  भूल कहें या कमजोरी कहें या सत्ता लुलुप्सता, जो अब तक देश, प्रदेश में शासन चलाते रहे और न ही स्वच्छ लोकतंत्र की नींव रखने में अग्रणी बन सके। अब मात्र 9 महीने के कार्यकाल में ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की भाजपा सरकार ने जनहित और सुशासन व विकास के कई निर्णय लिए हैं। सरकार ने 11 अगस्त मंगलवार को राज्य केबिनेट की बैठक में लोकतंत्र की प्रथम इकाई पंचायती संस्था चुनावों से सम्बंधित जो निर्णय लिया है, उससे आम जनमानस उत्साहित नजर आ रहा है। निर्णय में योग्यता एवं पात्रता का निर्धारण किया गया है। इससे शिक्षा को बढ़ावा तो मिलेगा ही, आपराधिक प्रवृति के लोग भी इन चुनावों में प्रत्याशी नहीं बन सकेंगे। जिससे सामान्य लोगों को आगे आने का अवसर मिल सकेगा। आंकड़े के अनुसार इस बार 5वें पंचायत चुनावों में 6212 पंचायतों का चुनाव होगा जो कि गत पंचायत चुनाव के मुकाबले 36 कम हैं, यह कमी कई पंचायतों के नए नगरनिगमों में शामिल होने के कारण हुई है।

क्या कहती है सरकार

सरकार का मानना है कि लोकतंत्र की पंचायत के तीन स्तर ग्रांम पंचायत, खंड समिति, जिला परिषद पर हमारे प्रतिनिधि शिक्षित होंगे तो वे जनहित के कार्य बेहतर तरीके से कर सकेंगे। क्योकि शिक्षित पंचायत प्रमुख सरकार की विकास योजनाओं का क्रियान्वयन सही कर पाएगा। जिससे पारदर्शिता बढेगी। सरकार ने ऐसे कई योजनाए शुरु की हैं, जिनका लाभ ग्रामीण आंचल में लोगों को नहीं मिल पाया है। मनरेगा भी एक ऐसी विकास योजना है जिसका लोगों तक पूर्ण लाभ नहीं पहुंचता और कागजी कार्य का जयादा दबाव बन जाता है, जिसे अनपढ़़ पंचायत प्रमुख को दिक्कत आती है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के अनुसार शिक्षण योग्यता एवं पात्रता को निर्धारण प्रदेश की जनता के लिए ऐतिहासिक कदम साबित होगा, जिसमें हर क्षेत्र का विकास प्रभावी ढंग से हो सकेगा और आचरण युक्त व्यक्त्यिों को आगे आने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबका साथ-सबका विकास सोच को सफल करने के लिए हरियाणा कोई कसर नहीं रखेगा।

क्या है शिक्षण योग्यता एवं पात्रता का निर्णय

अंगुठा टेक नहीं होगी पंचायतें, स्वच्छ छवि के लोग होंगे प्रत्याशी

अब हमारी प्रथम इकाई शिक्षित होगी, कम से कम मैट्रिक व मिडल तक पढ़ी-लिखी होंगी। राजस्थान की तर्ज पर हरियाणा सरकार ने भी पंचायत चुनाव में शैक्षिक योग्यता निश्चित की है। जिसके अनुसार सामान्य वर्ग प्रत्याशी के लिए मैट्रिक, महिला व अनुसुचित जाति के प्रत्याशियो के लिए मिडल तक शिक्षित होना अनिवार्य किया गया है। शिक्षा के साथ-साथ योग्यता एवं पात्रता भी मायने रखती है। जो प्रत्याशी चुनाव में भागीदार बनना चाहता है। उसे नामांकन से पूर्व सहकारी समिति बैंक से लिए गए ऋण को चुकाना होगा। यही नहीं उसे बिजली बिल के साथ-साथ सभी सरकारी देनदारियों का भुगतान भी करना होगा। उसे हलफनामा देकर यह भी स्पष्ट करना होगा कि उनके घर में शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। चुनाव प्रक्रिया में आपराधिक रिकार्ड वाले प्रत्याशियों को भी रोकने के लिए व्यवस्था की गई है। ऐसे लोग जिनके खिलाफ किसी भी आपराधिक मामले में न्यायालय में चार्जशीट पेश हो चुकी है और उन अपराधों में 10 साल तक की सजा का प्रावधान है, पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। अब तक ऐसे लोगों पर ही पाबंदी थी जिन्हें न्यायालय से सजा मिल चुकी है और वे संविधान के अनुसार प्रत्याशी नहीं बन सकते थे। सरकार के निर्णय से अब ऐसे अनेक लोग बाहर हो गए हैं और अनेक स्वच्छ छवि के लोगों को आगे आने का अवसर मिला है। (यह विषय अभी न्यायप्रविष्ठ है )

प्रत्याशियों पर ऐसे पड़ा प्रभाव

मौजूदा पंचायत के 50 प्रतिशत सरपंच व 70 प्रतिशत पंच नहीं बन सकेंगे प्रत्याशी

प्रदेश सरकार के निर्णय से मौजूदा पंचायत के 50 प्रतिशत सरपंच व 70.2 प्रतिशित पंच 49 प्रतिशत पंचायत समिति सदस्य भी अब आगामी चुनावों में प्रत्याशी बनने से रह जाऐगे।

शिक्षा के बोलते आंकड़े

अनपढ़ व पढ़े लिखे पंच

आंकड़ों के अनुसार 58608 पंचों मे से 18891 पंच अनपढ़, जो कि 32.2प्रतिशत हैं, जबकि 38 प्रतिशत यानी 22278 पंच मैट्रिक भी उतीर्ण नहीं है। 21.2 प्रतिशत मैट्रिक, 6.3 प्रतिशत सीनियर सैकेंडरी, 2 प्रतिशत स्नातक तक शिक्षित हैं।

अनपढ़ व पढ़े लिखे सरपंच

जानकारी के अनुसार 15.8 प्रशित सरपंच अनपढ़ है। 6075 सरपंचों में से करीब 15.8 प्रतिशत यानी 961 अनपढ़ है। 2128 सरपंच यानी 35 प्रतिशत मैट्रिक पास भी नहीं है, इसमें भी 92 प्रतिशत सरपंच 8वीं पास भी नहीं है। यानी 50 प्रतिशत सरपंच अयोग्य हैं।

अननढ़ व पढे लिखे पंचायत समिति सदस्य

2770 पंचायत समिति सदस्यांें में से 18.4 प्रतिशत यानी 511 अनपढ़। 31.1 प्रतिशत यानि 862 मैट्रिक पास नहीं। इसमे मैट्रिक पास 29.1 प्रतिशत हैं और 13.2 प्रतिशत सीनियर सैकेंडरी व 6.1 प्रतिशत स्नातक हैं।

अनपढ़ व पढ़े लिखे जिला परिषद सदस्य।

जिला परिषद में कुल 374 पदों में से 29 यानी 7.8 प्रतिशत अनपढ़ है। 66 यानी 17.6 प्रतिशत मिडल पास है। मैट्रिक पास 111 यानी 29.7 प्रतिशत हैं। 49 यानी 23.1 प्रतिशत सीनियर सैकेंडरी व 5.9 प्रतिशत स्नातक हैं।

चुनाव लड़ने के शौकीन प्रत्याशी, ढूंढ रहें है पढ़ी लिखी बहुएं

अब जब खुद भाग लेने से वंचित रह गए हैं और बैटा भी निर्णय पर खरा नहीं उतरता है तो वे अब जवान बेटे की चुनाव से पहले शादी करने को उत्सुक हैं और उसके लिए पढ़ी-लिखी बहुएं ढूंढ रहे हैं। ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं, जिनमे रिश्ते तय हो चुके हैं वे लोग शादी शीघ्र कर चुनाव में भागीदार बनने का मौका तलाश रहे है।