Source: न्यूज़ भारती हिंदी14 Sep 2015 10:47:11

(14 सितम्बर, हिंदी दिवस पर विशेष)

स्कूलों में शुरू से ही अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई होती है, जिससे बच्चे हिंदी लिखना-पढ़ना नहीं सीख पा रहे हैं। हिंदी बोलना हीनता का लक्षण माना जाता है। हिंदी बोलने में ही लोगों को शर्म महसूस होती है। लोग टूटी-फूटी, ऊटपटांग अंग्रेज़ी बोल कर भी गर्व महसूस करते हैं। स्कूलों में सारा ज़ोर अंग्रेज़ी पर है, हिंदी की पढ़ाई बस रस्म-अदायगी की तरह होती है।

28 हिंदी का वैश्विक क्षितिज निरंतर विकासमान है, वहीं दूसरी ओर खुद अपने देश भारत में हिंदी ही नहीं, सभी भारतीय भाषाएं अंग्रेजी का दबाव भी झेल रही हैं। क्या यह भूमंडलीकरण के चलते हो रहा है? लेकिन यही भूमंडलीकरण हिंदी के लिए भी तो मददगार हो सकता है। दरअसल, आज की दुनिया में सारा मामला वैश्विक बाजार का है। भारत में जितना अधिक यह बाजार फैलेगा, उतना ही अधिक हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाएं भी विकसित होती जाएंगी।

कालांतर में हमारी प्रिय भाषा का विकास उतनी तीव्रता से नहीं हो पाया जितना चीनी या अंग्रेजी भाषा का हुआ। परंतु इस बार के विश्व हिंदी सम्मेलन में हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार की रूपरेखा तय की गई है। जिसमें मुख्य रूप से अन्य देश के नागरिकों के लिए भारत में हिन्दी अध्ययन की सुविधा, अन्य भाषा-भाषी राज्यों में हिन्दी, विदेश नीति में हिन्दी, विषयों को सम्मिलित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हिंदी को लेकर जो भावनाएं व्यक्त की हैं, उनको और चयनित विषयों के आधार पर हिंदी भाषा को वैश्विक स्तर पर कितना समर्थन मिलता है यह तो भविष्य बताएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की हर भाषा को अमूल्य बताते हुए कहा कि भारत में भाषाओं का अनमोल खजाना है और अगर इन्हें हिंदी से जोड़ा जाए तो मातृभाषा और मजबूत होगी। साथ ही उन्होंने हिंदी के महत्व को रेखांखित करते हुए कहा कि अगर उन्हें हिंदी नहीं आती तो उनका क्या होता। प्रधानमंत्री ने आगाह करते हुए कहा कि भाषा की भक्ति बहिष्कृत करने वाली नहीं होनी चाहिए बल्कि यह सम्मिलित करने वाली, सबको जोड़ने वाली होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाषा के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए क्योंकि जब जब ऐसा हुआ है उस भाषा का विकास होने के बजाय उसकी गति मंद ही हुई है। मोदी ने सुझाव दिया कि देश की एकता के लिए हिंदी सहित देश की भाषाओं की कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए। इससे हिन्दुस्तान की सभी बोलियों और भाषाओं में जो उत्तम है उन्हें हिंदी को उन्नत बनाने में मदद मिलेगी और ऐसे प्रयास समय समय पर होते रहने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने दुनिया की छह हजार भाषाओं के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे के माध्यम से हिंदी भाषियों को यह संदेश दिया है कि हमें सतर्क रहने की आवश्यकता है। हिंदी को लेकर अमूमन दो तरह की बातें होती हैं। एक तो यह है कि अंग्रेजी के दबाव में हिंदी का क्षरण हो रहा है। स्कूलों में शुरू से ही अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई होती है, जिससे बच्चे हिंदी लिखना-पढ़ना नहीं सीख पा रहे हैं। हिंदी बोलना हीनता का लक्षण माना जाता है और हिंदी बोलने वालों को दोयम दर्जे का व्यवहार मिलता है। हिंदी बोलने में ही लोगों को शर्म महसूस होती है। लोग टूटी-फूटी, ऊटपटांग अंग्रेज़ी बोल कर भी गर्व महसूस करते हैं। स्कूलों में सारा ज़ोर अंग्रेज़ी पर है, हिंदी की पढ़ाई बस रस्म-अदायगी की तरह होती है। हिंदी बोलने में शर्म क्यों? हिंदी को इज़्ज़त भी तभी मिल पाएगी, जब सरकारी अमला उसे इज़्ज़त देने लगे। ये दोनों ही काम सरकार को करने हैं। यदि हमने समय रहते अपनी भाषा को नहीं बचाया तो आने वाली पीढ़ियों को हिंदी के संरक्षण की दिशा में प्रयास करने पड़ सकते हैं।