Source: न्यूज़ भारती हिंदी18 Sep 2015 11:17:27

श्रीलंका के प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने इंडिया फाउंडेशन द्वारा दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में भारत को आश्वस्त किया है कि उनके देश के सभी दल भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित सम्मेलन में विक्रमसिंघे ने कहा कि दोनों देशों के बीच के रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं।

भारत के साथ चीन-पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों को लेकर हमेशा तनावपूर्ण स्थिति बनी रहती है। भारत को घेरने का चीन कोई भी मौका नहीं चूकता है। अपनी इसी रणनीति के तहत चीन ने पाकिस्तान से संबंध तो बेहतर किए ही, वह पिछले कुछ समय से नेपाल और श्रीलंका जैसे भारत के नजदीकी पड़ोसियों पर भी डोरे डालने की कोशिश करता रहा है। पिछली यूपीए सरकार ने श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार, भूटान जैसे पड़ोसियों के साथ संबंधों को लेकर कभी भी गर्माहट नहीं दिखाई। मोदी के नेतृत्व में बनी एनडीए की नई सरकार अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध सुधारने की दिशा में लगातार सकारात्मक कदम उठा रही है।

भारत ने नेपाल, भूटान जैसे छोटे देशों के साथ संबंध सुधारने की पहल की तो अबकी बारी श्रीलंका की है। श्रीलंका के फिर से निर्वाचित प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे का अपनी पहली विदेश यात्रा के रूप में भारत आना भी एक सकारात्मक संदेश है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे कि आप दोस्त बदल सकते हो, पड़ोसी नहीं बदल सकते। लिहाजा पड़ोसियों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखना शांति का सर्वोत्तम माध्यम है। श्रीलंका की इस पहल से पाकिस्तान को भी कुछ सीख लेनी चाहिए। दरअसल, भारत और श्रीलंका के बीच कई मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत होने की संभावना है। भारत ने भी आशा जताई है कि श्रीलंका में तमिल समुदाय के साथ स्वभाविक सुलह होगी। श्रीलंका ने भी सकारात्मक संदेश देते हुए कहा है कि वह देश के अल्पसंख्यक तमिलों को संवैधानिक रूप से सत्ता हस्तांतरित करने पर विचार कर रहा है।

इसके पूर्व भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रानिल विक्रमसिंघे मछुआरों के संवेदनशील मुद्दे पर गहन चर्चा कर चुके हैं। संभावना है कि दोनों देश व्यापार और रक्षा संबंधों को नई दिशा में ले जाने के साथ आतंकवाद से लड़ने व समुद्री सीमा सुरक्षा के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी प्रमुखता से बातचीत कर सकते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और श्रीलंकाई राष्ट्रपति जेआर जयवर्द्धने के बीच जुलाई 1987 में हस्ताक्षरित भारत-श्रीलंका समझौते के बाद आए 13वें संशोधन में श्रीलंका में जातीय संघर्ष के बीच प्रांतों में सत्ता हस्तांतरण से जुड़ी बातें शामिल की गई थीं। पीएम नरेंद्र मोदी भी श्रीलंका के प्रधानमंत्री को पहली विदेश यात्रा के रूप में भारत आने पर बधाई देते हुए उम्मीद जताई है कि श्रीलंका रक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत का सबसे बड़ा सहयोगी है और वह इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना लगातार जारी रखेगा।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने इंडिया फाउंडेशन द्वारा दिल्ली में आयोजित एक सम्मेंलन में भारत को आश्वस्त किया है कि उनके देश के सभी दल भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। नई दिल्ली में मंगलवार को आयोजित सम्मेलन में विक्रमसिंघे ने कहा कि दोनों देशों के बीच के रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत तथा श्रीलंका के मछुआरों द्वारा एक-दूसरे के क्षेत्रों का अतिक्रमण करने के मुद्दे समयबद्ध तरीके से सुलझा लिया जाएगा। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार बढ़ने से श्रीलंका में नौकरियां पैदा करने के लक्ष्य में भी बड़ी सफलता मिलेगी। बहरहाल, उम्मीद की जानी चाहिए कि दोनों देशों के बीच व्यापार-कारोबार के साथ अच्छे संबंध स्थापित होने पर चीन-पाकिस्तान जैसे देशों की बुरी मंशा पर भी पानी फिरेगा।