Source: न्यूज़ भारती हिंदी25 Sep 2015 12:16:04

हैरानी की बात तो यह है कि जब हज के दौरान चप्पलें तक पहनने की मनाही है कि आगेवाले की चप्पलें पीछेवाले के पांव से दब जाने के कारण वह गिर न पड़े, तब इतनी सतर्कता के बावजूद क्या भीड़ का प्रबंधन इतना लचर था कि लोगों के एक-दूसरे से धक्कमधुक्की के चलते यह भगदड़ हो गई? इस हादसे के कारणों की गहराई से जांच और छानबीन की जानी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे अफसोसनाक मंजर दोबारा न देखना पड़े।

हर साल दुनिया के कोने-कोने से लगभग 25 लाख लोग हज के दौरान सऊदी अरब के पवित्र धार्मिक शहर मक्का में जमा होते हैं, जो दुनियाभर के इस्लामी धर्मावलंबियों का सबसे बड़ा आस्था केंद्र है। इससे बड़ा अफसोसनाक हादसा भला क्या हो सकता है कि ईदुलजुहा के ऐन एक दिन पहले गुरुवार को हज के दौरान मची भगदड़ में कम से कम 717 लोगों की मौत हो गई और 800 से भी ज्यादा हजयात्री घायल हो गए। इसमें 14 भारतीय हाजियों की मौत हो गई और 13 घायल हो गए है। जेद्दा में भारतीय हज मिशन ने आज इसकी जानकारी दी। भारतीय हज मिशन से प्राप्त सूचना के अनुसार मृतकों में नौ गुजरात, दो तमिलनाडु, दो झारखंड और एक महाराष्ट्र के हज यात्री हैं। घायलों में लक्षद्वीप, असम, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, बिहार, ओडिशा, केरल और उत्तर प्रदेश के एक-एक हाजी, जबकि पश्चिम बंगाल और जम्मू-कश्मीर के दो-दो हाजी शामिल है।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु आने के कारण मक्का में पहले भी इस तरह की दुर्घटनाएं होती रही हैं। बढ़ती सुविधाओं और संसाधनों के बावजूद इतने लोगों का हताहत होना चिंता का विषय है। कुछ दिनों पूर्व भी मक्का में ही क्रेन के गिरने से सौ से अधिक लोगों ने अपनी जानें गवांई थी। इसे प्राकृतिक आपदा करार दिया गया था। पिछले 30 वर्षों में इस तरह की लगभग 10 घटनाएं घट चुकी हैं, जिनमें हजारों श्रद्धालुओं ने अपनी जान से हाथ धोए हैं। इसी के मद्देनजर सऊदी अरब सरकार ने मस्जिद में पुलों के निर्माण सहित, मार्गदर्शन के लिए कर्मचारियों को नियुक्त किया था।

सऊदी अरब के नागरिक सुरक्षा और हज प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के हवाले से जो खबर आई है, उसके मुताबिक हज के दूसरे दिन पवित्र मक्का शहर से लगभग छह-सात किलोमीटर की दूरी पर बसे मीना में शैतान को सांकेतिक तौर पर कंकड़ मारने की एक मजहबी रस्म के दौरान हाजियों के बीच अचानक भगदड़ मच गई, जिससे इतना बड़ा हादसा हो गया। बहरहाल, हादसे की खबर मिलते ही लगभग चार हजार लोगों को बचाव कार्य में लगा दिया गया है। इसके अलावा भी आपात राहत के लिए सवा दो सौ टीमों को लगाया गया है, जो घायलों को इलाज की सुविधा मुहैया कराने के काम में जुटी हुई हैं। इस साल हज के दौरान यह दूसरा हादसा है।

दरअसल, हैरानी की बात तो यह है कि जब हज के दौरान चप्पलें तक पहनने की मनाही इसलिए है कि आगेवाले की चप्पलें पीछेवाले के पांव से दब जाने के कारण वह गिर न पड़े, तब इतनी सतर्कता के बावजूद क्या भीड़ का प्रबंधन इतना लचर था कि लोगों के एक-दूसरे से धक्कमधुक्की के चलते यह भगदड़ हो गई? इस हादसे के कारणों की गहराई से जांच और छानबीन की जानी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे अफसोसनाक मंजर दोबारा न देखना पड़े।

अपने भारत से भी हजारों हजयात्री इस समय मक्का में हैं, कहना नहीं होगा कि बकरीद से एक दिन पहले हुए इस हादसे ने उनके परिजनों को उनकी सलामती को लेकर गहरी चिंता और बेचैनी में डाल दिया है। यही दुआ की जा सकती है कि हमारे भारतीय हाजी लोग वहां सही सलामत हों और सही सलामत ही लौटें तो उनके घर-परिवार वालों को खुशी का नायाब तोहफा मिले।