Source: न्यूज़ भारती हिंदी20 Jan 2016 15:04:41

समाचार समीक्षा

दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या ने एक बार फिर विपक्षी पार्टियों को भाजपा के विरुद्ध आग उगलने का अवसर दे दिया है। इस बहाने विपक्ष बंडारू दत्तात्रेय और मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के इस्तीफे की मांग को लेकर आक्रामक तेवर दिखा रहा है। जबकि भाजपा का कहना है कि बंडारू दत्तात्रय द्वारा स्मृति ईरानी को लिखा गया पत्र हैदराबाद विश्वविद्यालय परिसर में बढ़ रही आतंकवाद समर्थक प्रवृत्ति के प्रति ध्यान आकर्षित कराए जाने हेतु था। विपक्ष द्वारा की जा रही मंत्रियों के इस्तीफे की मांग को ख़ारिज करते हुए पार्टी की तेलंगाना इकाई ने वे वीडियो क्लिप जारी किए हैं, जिनमें मृतक रोहित देश विरोधियों का समर्थन करते हुए देखा जा सकता है। भाजपा का कहना है कि श्री दत्तात्रय ने कट्टरवाद के खिलाफ शिकायत की थी, किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं।

तेलंगाना में करीमनगर से ताल्लुक रखनेवाले भाजपा के महासचिव पी.मुरलीधर राव ने कहा कि रोहित का सुसाइड नोट ही वास्तविकता को बयान कर देता है, अतः उनकी पार्टी के खिलाफ विरोधियों द्वारा किया जा रहा दुष्प्रचार निरर्थक है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि रोहित कि खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही न्यायालय के आदेश पर की गई थी और उसका दलित होने, न होने से कोई ताल्लुक नहीं था। आतंकवाद के समर्थन में दिए गए रोहित के बयानों व उसके बाद छात्रों के दो गुटों में हुए संघर्ष के मद्देनजर न्यायालय के सुझाव पर उसे व उसके चार अन्य साथियों को केवल छात्रावास से निष्कासित किया गया था, विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों में वे यथावत भाग ले रहे था।

राव के अनुसार रोहित ने अपने पत्र में लिखा था कि मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है। मैं हमेशा से समस्याग्रस्त हूं। मैं अपनी आत्मा और शरीर के अंतर को महसूस कर रहा हूं। कुछ लोगों के लिए जीवन एक अभिशाप होता है। मेरा जन्म भी एक दुर्घटना है। बचपन से मेरा अकेलापन कभी दूर नहीं हुआ।

इस पत्र से स्वतः स्पष्ट है कि रोहित खुद के साथ संघर्षरत था। भाजपा मुख्यालय में भाजपा के दो राष्ट्रीय सचिवों, श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थनाथ सिंह ने दत्तात्रेय और मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में कुछ छात्रों की कथित राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के बारे में शिकायती पत्र भेजने में कुछ भी गलत नहीं है। और सबसे बड़ी बात यह कि मंत्री के हस्तक्षेप के पूर्व ही रोहित और अन्य छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय विश्वविद्यालय द्वारा लिया जा चुका था। सिंह ने कहा कि शिकायत विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और कट्टरवाद के खिलाफ की गई थी, जो कि एक गंभीर मुद्दा है और मंत्री कैसे इसे नजरअंदाज कर सकते थे? अगर मंत्रियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया होता तो ये ही लोग उन पर निष्क्रियता का आरोप लगाते।

भाजपा ने मंगलवार को हैदराबाद परिसर में आने के लिए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की खिंचाई की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी आत्मघाती राजनीति कर रहे है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस एक छात्र की मौत पर राजनीति कर रही है।

मुरलीधर राव ने कहा कि यह याद रखना चाहिए कि राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह जैसे कांग्रेसी नेताओं की कांग्रेस ने डॉ.बी.आर.आम्बेडकर के साथ आजीवन अन्याय किया था और अब वे इस मुद्दे का 'राजनीतिकरण' कर स्वयं को दलित हितैषी दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं। यहां एक बात और ध्यान देने योग्य है और वह यह कि जिस रोहित वेमुला की आत्महत्या को लेकर राहुल गांधी और केजरीवाल स्यापा कर रहे हैं। 

उसकी फेसबुक वाल देखी जाए तो स्पष्ट होगा कि वह एक फ्रस्ट्रेटेड नौजवान था, जिसे जमाने भर से शिकायत थी। सारा विश्व जिनके सामने नतमस्तक होता है, वे विवेकानन्द भी उस नौजवान की नजर में जाति व्यवस्था के पोषक, नारी द्रोही, मंद बुद्धि, अहंकारी और अवसरवादी थे। शेष लोगों के लिए वह लिखता है - न्यायाधीश/प्रधान न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त, कानून मंत्री, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, अधिकारी सबके सब बंध्या और नपुंसक हैं।

इतने पर ही वह नहीं रुकता आगे लिखता है – सारे राजनीतिक दल जैसे तेदेपा, भाजपा, राजग, संप्रग और सब राजनीतिक नेता भ्रष्ट और बेईमान हैं। आईपीएस और आईएएस अधिकारी तथा न्यायाधीश इन राजनेताओं के तलुए चाटते हैं।

अब वे ही राजनेता, जिनको वह कोसते नहीं थकता था, आज उसकी आत्महत्या को लेकर कैसी छात्ती पीट रहे हैं?