प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त, 2015 को लाल किले से कहा था कि क्या हम “स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया” में दुनिया के नंबर एक नहीं हो सकते। उसके बाद से इस योजना पर तेजी से काम आरंभ हुआ और अंततः औपचारिक रूप से उन्होंने इसकी शुरुआत कर दी। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत इस पर देर से जागा है। इसके लिए मैं भी जिम्मेदार हूं। उनका इशारा अपने वित्तमंत्रीत्व काल में इसे आंदोलन का रूप न दिए जाने की ओर था।

- अवधेश कुमार

निस्संदेह, यह दृश्य अविस्मरणीय और आश्चर्य में डालने वाला था। फिल्मी सितारों के आयोजन आदि में तो टिकटें खरीदने की होड़ और छटपटाहट आम बात है। अर्थव्यवस्था और व्यवसाय आदि की शुरुआत के किसी कार्यक्रम में इतनी भारी संख्या में लोग शिरकत करना चाहे ऐसे उदाहरण नहीं मिलते हैं। 16 जनवरी को आरंभ ‘स्टार्टअप इंडिया अभियान’ ने देश-विदेश से लोगों को इतना आकर्षित किया कि सबको समाहित करना असंभव हो गया। 2 लाख से ज्यादा लोग शिरकत करना चाहते थे, लेकिन स्थान के अभाव से सबको शामिल होने का मौका नहीं मिला। तो ऐसा क्यों हुआ? साफ है कि नए काम आरंभ करने वाले, या नए आइडिया से नया उत्पाद लाकर व्यवसाय में कदम रखने के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ा है। स्टार्टअप इंडिया और स्टैंड अप इंडिया की शुरुआत वाले दिन देश-विदेश के स्टार्टअप जगत के अनेक सफल उद्यमी एक साथ दिखे। स्नैपडील के संस्थापक कुणाल बहल, फ्लिपकार्ट के सचिन बंसल के साथ उबर के ट्रेविस कालनिक, वीवर्क के एडम नुममैन जैसे बड़े विदेशी नाम भी इसमे शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त, 2015 को लाल किले से कहा था कि क्या हम “स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया” में दुनिया के नंबर एक नहीं हो सकते। उसके बाद से इस योजना पर तेजी से काम आरंभ हुआ और अंततः औपचारिक रूप से उन्होंने इसकी शुरुआत कर दी। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत इस पर देर से जागा है। इसके लिए मैं भी जिम्मेदार हूं। उनका इशारा अपने वित्तमंत्रीत्व काल में इसे आंदोलन का रूप न दिए जाने की ओर था। वैसे सरकार का मुख्य फोकस न होने के बावजूद नैस्कॉम के मुताबिक स्टार्टअप ईकोसिस्टम के मामले में भारत दुनिया में पांचवें नंबर पर है। हर वर्ष स्टार्टअप की संख्या बढ़ रही है। 2010 में 480, 2011 में 525, 2012 में 590, 2013 में 680, 2014 में 805 तथा 2015 में 1200 स्टार्टअप शुरू हुए। इसी तरह साल 2014 में हमारे देश में स्टार्टअप के द्वारा 65,000 लोगों को रोजगार मिला तो 2015 में स्टार्टअप ने करीब 80,000 लोगों को नौकरियां दीं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 तक 11,500 स्टार्टअप शुरू हो सकते हैं। इतने स्टार्टअप का मतलब कम से कम 2.5 लाख रोजगार। यह तो वर्तमान वृद्धि के अनुसार दिया गया आंकड़ा है। अब जब सरकार ने इसे मुख्य फोकस में शामिल कर लिया है तो फिर यह लंबी छलांग लगा सकता है। उसके बाद स्टार्टअप की संख्या कितनी होगी और कितने लोगों को इससे रोजगार मिलेगा इसका अनुमान अभी नहीं लगा सकते।

दुनिया जिस तेजी से बदल रही है, बहुत कुछ ऑनलाइन हो रहा है उसमें हमारा आपका एक अच्छा आइडिया न सिर्फ बदलाव का कारण बन सकता है, बल्कि रोजगार का अवसर भी पैदा सकता है। आखिर स्नैपडील, पेटीएम, फ्लिपकार्ट, ओयो रूम्स और ओला जैसी कंपनियों ने भारत में मिसाल तो कायम किया ही है। लेकिन ऐसे नए विचार और अन्वेषण वाले लोगों को यह पता भी होना चाहिए कि वे कैसे इसे व्यवसाय में बदल सकते हैं, कौन है जो उनके विचार में निवेश कर इसे आगे बढ़ा सकता है। ऐसे युवाओं के लिए सरकार मोबाइल ऐप और वेबसाइट लॉन्च कर रही है। यहां आपको स्टार्टअप शुरू करने के लिए सरकार की नीति, वेंचर कैपिटलिस्ट और एंजेल इन्वेस्टर्स तक की जानकारी मिल जाएगी। स्टार्टअप शुरू करने के लिए शुरुआती बजट 10 लाख रूपए से लेकर 100 करोड़ तक हो सकता है। अगर आपका आइडिया उत्कृष्ट है, तो निवेश करने वाले लोग मिल सकते हैं। सरकार की यही कोशिश है कि इस अभियान द्वारा निवेश की आवश्यकता पूरी हो। देश विदेश के व्यवसायी से लेकर वेंचर कैपिटलिस्ट तक स्टार्टअप में निवेश करें। कोई भी व्यक्ति अपना धन यूं ही नहीं लगा सकता। इसके लिए वह आइडिया की व्यावसायिक संभावनाओं को परखेगा। तो यह कला युवाओं को सीखनी होगी कि कैसे व्यवसाय की पूरी योजना और रणनीति बनाएं। सरकार इसमें प्रोत्साहक की भूमिका में होगी। देश में रतन टाटा अब तक 15 से ज्यादा स्टार्टअप में इन्वेस्टमेंट कर चुके हैं। दूसरों ने भी किया है। इसी प्रवृत्ति को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। यह भी देखना होगा कि अगर हम स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं तो कौन से क्षेत्र हैं जिनमें विकास की संभावना अधिक है। कुछ क्षेत्र स्टार्टअप के लिए अभी चिन्हित किए हैं जैसे शिक्षा, ई-कॉमर्स, ट्रांसपोर्टेशन सॉल्यूशन, हेल्थकेयर, फाइनेंस, मोबाइल सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज, ऑन डिमांड सर्विसेज...आदि।

विता मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि यह परंपराओं को बदल देगा और सरकार की भूमिका केवल सुविधाएं उपलब्ध करवाने तक रह जाएंगी। कंपनियां स्टार्टअप्स फंड्स बनाने की कोशिशों को बेहतर तो मानती है। लेकिन वे चाहते हैं कि सरकार उन्हें नियमित और बड़ी कंपनियों की तरह मौके दें। साथ ही ऐसा तंत्र विकसित हो जिससे उन्हें सरकार की सभी योजनाओं का फायदा मिल सके। अमेरिका की सिलिकॉन वैली से आए निवेशकों के एक समूह का कहना था कि स्टार्ट अप्स में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए मॉरीशस से होनेवाले निवेश की तरह कर रियायतें मिलनी चाहिए। साथ ही सरकार को कारोबार शुरू करने, बंद करने और पूंजी जुटाने के नियमों को भी आसान बनाना होगा। सिलिकॉन वैली से करीब 48 भारतीय अमेरिकी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे। यह भी सच है कि स्टार्ट अप्स में बड़ी संख्या में कंपनियां बंद होती हैं। इसलिए इनकी मांग थी कि कारोबार समेटने के नियम आसान होने चाहिए। साफ है कि सिलिकॉन वैली के निवेशक भारत में स्टार्ट अप्स में निवेश के इच्छुक हैं लेकिन उनको प्रोत्साहन देने के लिए अपने देश हित का ध्यान रखते हुए कदम उठाने होंगे। गूगल ने जिन पांच सबसे इनोवेटिव स्टार्टअप को ‘स्टार्टअप इंडिया’ में हिस्सा लेने के लिए चुना उन सबने भी कुछ बातें रखीं। मसलन, एक जैसे मौके चाहिए। सरकारी निविदाओं में कंपनी के अनुभव और टर्नओवर आदि की बाध्यताओं से नए को मौका नहीं मिलता। तो पुराने तरीके बदले और नए लोगों को नए तरीके से काम करने का मौका मिले। सरकार को टर्नओवर-कंपनी के पुराने होने जैसे नियम खत्म करने चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस संबंध में जो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं उनसे निश्चय ही स्टार्टअप के लिए की जाने वाली मांगे पूरी होंगी बल्कि इसे प्रोत्साहन भी मिलेगा। उदाहरण के लिए स्टार्टअप कारोबारियों के लिये तीन साल का कर अवकाश, पूंजीगत लाभ कर से छूट, इंस्पेक्टर राज मुक्त परिवेश, असफलता मिलने पर 90 दिन की अवधि में कारोबार बंद करने की आजादी, वित्तपोषण के लिये 10 हजार करोड़ रूपये का कोष स्थापित करने नौ श्रम और पर्यावरण कानूनों के अनुपालन के लिए स्वप्रमाणन योजना, उद्यम शुरू होने के पहले तीन साल के दौरान कोई जांच नहीं किए जाने, देश में नर्वप्रवर्तन सोच के साथ आने वाले तकनीक आधारित इन नये उद्यमों के लिये एक उदार पेटेंट व्यवस्था भी लाई जायेगी, पेटेंट पंजीकरण में इन उद्यमों को पंजीकरण शुल्क में 80 प्रतिशत छूट, सरकारी ठेकों में अनुभव और कारोबार सीमा के मामले में छूटकृआदि शामिल हैं। स्टार्ट अप के लिये बनाए गये ऋण गारंटी कोष से बैंकिंग प्रणाली से भी ऋण का प्रवाह होगा। इस कोष से जोखिम के बदले गारंटी उपलब्ध हो सकेगी। सरकार की ओर से एक राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्ट कंपनी बनाने का प्रस्ताव है जिसमें अगले चार साल तक सालाना 500 करोड़ रपये का बजट आवंटन किया जाएगा। जाहिर है अन्वेषण, सृजनात्मकता और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए बहुत कुछ सरकार ने ऑफर कर दिया है।

स्टार्ट अप कार्यक्रम में विदेशी निवेशकों में सॉफ्टबैंक के सीईओ मासायोशी सोन, वीवर्क के संस्थापक एडम न्यूमैन स्वयं उपस्थित रहे। कई विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री से भी मुलाकात कर अपनी बातें रखीं। जाहिर है, अगर इतने विदेशी निवेशक यहां इच्छुक हैं,  देश के भी निवेशक हैं, सरकार कोष बना रही है, बैक कर्ज देंगे तो फिर स्टार्टअप के लिए धन की कमी नहीं होनी चाहिए। ध्यान रखिए अमेरिका में स्टार्ट अप्स और छोटे कारोबारियों के जरिये 70 प्रतिशत रोजगार के अवसर उपलब्ध होते हैं। ऐसा भारत में भी हो इसकी कोशिश तो करनी होगी। हमारे यहां भी संगठित एवं बड़े कारोबार में 10 प्रतिशत भी रोजगार नहीं मिलते हैं। कल्पना करिए भारत जैसे देश की एक प्रतिशत आबादी भी उद्यमी हो जाए तो तो किस तरह पूरी अर्थव्यवस्था की कायापलट हो जाएगी और कितने रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

कहने की आवश्यकता नहीं कि इस लक्ष्य में स्टार्टअप अहम भूमिका निभा सकते हैं। वास्तव में स्टार्टअप का मतलब है इनोवेशन और आइडिया को बढ़ावा देना। कितने लोग हैं, जिनके पास अनूठे आइडिया हैं, लेकिन काम करने का प्लैटफॉर्म नहीं है। अगर स्टार्टअप इंडिया-स्टैंड अप इंडिया के माध्यम से सब पर काम होना शुरू हो जाए, तो देश का कायाकल्प हो सकता है। वैसे हम न भूलें कि स्टार्टअप से जनता को भी कम कीमत पर सामग्री व सेवाएं मिल सकती हैं। उदाहरण के लिए गूगल की स्टार्ट अप कार्डिक डिजाइन लैब्स के संस्थापक आनंद मदनगोपाल ने कहा कि दिल से जुड़ी जांचों की बड़ी मशीनें सिर्फ बड़े शहरों और अस्पतालों में है। हमारी मशीन 30-40 हजार रूपए की है। हमारी मशीनों से चेकअप 50 रूपए तक में हो सकता है, लेकिन हमारे पास फंड की कमी है। शायद अब धन की कम आड़े नहीं आएगी। इसलिए स्टार्टअप मुहिम की सफलता की हम सब कामना करें।