Source: न्यूज़ भारती हिंदी06 Jan 2016 16:21:18

नए साल की शुरुआत में कांग्रेस पार्टी की ओर से आयोजित एक प्रेस कान्फ्रेंस में बोलते हुए पूर्व वित मंत्री पी. चिदम्बरम ने सरकार पर आर्थिक मोर्चे पर नाकामी का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि एन.डी.ए. ने चुनाव के दौरान ज्यादा नौकरियों, एफ.डी.आई. में बढ़ोत्तरी और आधारभूत ढांचे में तेज ग्रोथ का वायदा किया था, जो पूरा नहीं हुआ है। क्राइम और असहिष्णुता में बढ़ोत्तरी को लेकर चिन्ता बढ़ी है। जी.एस.टी. के संबंध में चिदम्बरम का कहना है कि सरकार इस मुद्दे पर विपक्ष के विचारों को समायोजित करने में विफल रही है। वहीं घर में जहां सरकार महंगाई और अपराध जैसे मुद्दों पर काबू पाने में असफल रही है, विदेश नीति के सन्दर्भ में नेपाल के साथ रिश्ते बिगड़ने की बात उन्होंने कही। ऐसी स्थिति में यह देखा जाना आपेक्षित होगा कि वर्ष 2015 के आइने में मोदी सरकार का काम-काज कैसा रहा? खासकर जब वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान नरेन्द्र मोदी ने ‘‘अच्छे दिन आएंगे’’ यह सपना दिखाया तो सरकार के डेढ़ साल के काम-काज के बाद उसकी जमीनी हकीकत देखे जाने की जरूरत है। क्योंकि विपक्षी दल और मीडिया आए दिन ‘‘अच्छे दिन’’ को लेकर तंज कसते हैं। 

चिदम्बरम भले सरकार को महंगाई काबू में न रख पाने का आरोप लगा रहे हों, लेकिन हकीकत यह है- यू.पी.ए. शासन के दौर में अप्रैल-2014 में मुद्रा स्फीति की दर जहां 8.59 प्रतिशत थी, वहीं अगस्त-2015 में मुद्रा स्फीति की दर 4.47 प्रतिशत थी। रुपया भी डालर के मुकाबले 6.4 प्रतिशत मजबूत हुआ है। अब कम उत्पादन की वजह से जैसे प्याज एवं दालों के भाव में जो उछाल सितम्बर, अक्टूबर में आया, उसी को लेकर महंगाई को लेकर हो-हल्ला मचाया जाता रहा, जबकि महंगाई के मुद्दे को समग्रता से देखे जाने की जरूरत है। इन वस्तुओं के भाव जो अनुपयुक्त ढंग से बढ़े थे, वह सरकार के प्रयास से नियंत्रण में आ गए हैं। नागरिकों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की दृष्टि से जीवन बीमा योजनाएं लागू की गई हैं। डिजिटल इण्डिया के माध्यम से पारदर्शिता गुणात्मक ढंग से बढ़ाई गई है, जिसका एक उदाहरण रेल सेवाओं में ही देखा जा सकता है। इस संबंध में प्रधानमंत्री मोदी का कहना है- सारा करोबार, सारी आवश्यकताएं, सारी आवश्यकताएं मोबाइल के इर्द-गिर्द...पूरी सरकार आपके मोबाइल फोन में मौजूद होने वाली है, वह दिन दूर नहीं है। ‘‘मेक इन इण्डिया’’ के तहत लाखों-लाख रोजगार के अवसर पैदा किए गए हैं सभी ओर से ऐसे सर्वेक्षण आ रहे हैं कि इस वर्ष नौकरियों की वर्षात होगी।

स्वास्थ्य और बेहतर करने के लिए ‘‘स्वच्छ भारत अभियान’’ चलाया गया है। इससे लोगों को जहां स्वस्थ और बेहतर जीवन मिल सकेगा, वहीं उनकी दवाओं पर निर्भरता घटेगी, जो उनका जीवन-स्तर बढ़ाने में मदद करेगी। केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी कहते हैं- जब मैं मंत्री बना तो एक दिन में 2 कि.मी. सड़क बन रही थी। आज रोज 14 कि.मी. सड़क बन रही है और अगले दो साल में 30 कि.मी. सड़क रोजाना बनेगी। बिजली उत्पादन 29,168 मेगा वाट पहुंच गया है और सौर ऊर्जा के क्षेत्र को जिस तरह से बढ़ावा दिया जा रहा है, उससे यह बिजली 4.63 रुपये प्रति यूनिट जो अब तक के सबसे कम मूल्य पर उपलब्ध हो रही है। इस संबंध में रीवा जिले में गुढ़ के पास दुनिया का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा केन्द्र बनने ही जा रहा है, जिसकी उत्पादन क्षमता 750 मेगा वाट होगी और अगले वर्ष से यह उत्पादन भी शुरू कर देगा। मोदी सरकार को 4-5 प्रतिशत की विकास दर वाली अर्थव्यवस्था मिली थी, जो वर्तमान में 7-5 प्रतिशत है और विश्व की सबसे तेज गति से बढ़नेवाली अर्थव्यवस्था है। यहां तक कि आर्थिक विकास-दर के मामले में मोदी सरकार ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। सही नीतियों के निर्माण और उनके क्रियान्वयन की तेजी के चलते आज भारत की ब्रान्ड वैल्यू बढ़ गई है।

लंदन की ब्रांड वैल्युएशन एंड स्टेटजी कंसलटेन्सी संस्था ब्रांड फाइनेन्स ने अपनी एक रपट में भातर की नेशनल ब्रांड वैल्यू पिछले साल की तुलना में इस साल 32 प्रतिशत ऊपर दिखाई है, जो पिछले साल 1.62 खरब डालर से बढ़कर इस साल 2.14 खरब डालर हो गई है। इस तरह से भारत ब्रांड वैल्यू के क्षेत्र में दुनिया के देशों की सूची में 7वीं पायदान पर है। कनाडा, इटली और ऑस्ट्रेलिया इसके पीछे हैं। यानी हमारी गिनती दुनिया के 10 सबसे ताकतवर देशों में होने लगी है। पूरी दुनिया में विदेशी पूंजी निवेश जहां 16 प्रतिशत तक घटा है, वहीं भारत में यह 40 प्रतिशत तक बढ़ा है। यहां तक कि इस मामले में भारत ने चीन और अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। हकीकत यही है कि मोदी के सत्ता संभालने के बाद भारत विदेशी पूंजी निवेश की दृष्टि से भारत पहली पसंद बनता जा रहा है। अप्रैल-2014 से लेकर अप्रैल-2015 के दौरान पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 48 फीसदी ज्यादा एफ.डी.आई.। जापान ने अगले पांच वर्षों में जहां 35 अरब रुपए के निवेश करने का वायदा किया है तो दक्षिण कोरिया ने दस अरब रुपये का, चीन ने सीमा विवाद के बावजूद 20 अरब रुपये के निवेश का वादा किया है।

हमारी सुरक्षा सेनाओं का तेजी से आधुनिकीकरण तो हो ही रहा है, साथ में उसका स्वदेशीकरण भी हो रहा है। महत्वपूर्ण रक्षा सौदे जो सालों-साल अनिर्णय की स्थिति में ही नहीं लटके रहते थे, बल्कि जिन पर घोटालों की धुंध छाई रहती थी, वह अब अतीत की बातें हो गई हैं। सेना की जरूरतों के अनुरूप रक्षा सौदों पर त्वरित निर्णय लिया जा रहा है, लेकिन अधिकांश रक्षा सौदों में ‘‘मेक इन इण्डिया’’ के तहत कलपुर्जों का निर्माण देश में ही करने की शर्तें हैं। इस दिशा में भारत ने हेलीकाप्टरों का निर्यात भी शुरू कर दिया है और उम्मीद है कि शीघ्र ही तेजस लड़ाकू विमान, ब्रह्मोस, सुपरसोनिक क्रूज प्रक्षेपास्त्र, अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक शीघ्र निर्यात होने लगेंगे।

सुखद बात यह कि सार्वजनिक उपक्रम अब सफेद हाथी नहीं रह गए हैं। मोदी सरकार ने इन्हें बहुत कुछ अपने निर्णय लेने का अधिकार दिया है, जिसके चलते अब यह नौकरशाही और लालफीताशाही से बहुत कुछ मुक्त हो चुके हैं। इसका नतीजा यह है कि केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के 24 उपक्रम मुनाफा कमाने लगे हैं और 13 में क्रान्तिकारी बदलाव आ चुका है। रहा सवाल जी.एस.टी. का तो निस्संदेह यदि इसे लागू कराने में कांग्रेस ने सहयोग दिया होता तो देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर और बेहतर होती। पर जब सरकार को असफल बताने के लिए प्रचारित करने के लिए राष्ट्रीय हितों को भी पीछे रखना है तो असलियत समझी जा सकती है। हकीकत यही है कि जी.एस.टी. को लेकर सरकार ऐसी शर्तें रख रही है, जो भविष्य की दृष्टि से बहुत ही अनुपयुक्त है। फिर भी उम्मीद है कि आनेवाले दिनों में जी.एस.टी. शीघ्र पारित होगा, जिसमें हमारी अर्थव्यवस्था को बेहतर गति मिल सकेगी।

जहां तक विदेश नीति का संबंध है, आज भारत पूरी दुनिया में एक याचक नहीं, बल्कि महाशक्ति बतौर देखा जाता है। अमेरिका और रूस प्रतिद्वंदी होते हुए भी भारत के नजदीक हैं और भारत से प्रत्येक स्तर पर सहयोग कर रहे हैं। जहां तक नेपाल का प्रश्न है, वहां मधेशी समस्या को लेकर मोदी सरकार वैसी गलती नहीं कर सकती, जो राजीव गांधी ने लिट्टे समस्या को लेकर की थी। चूंकि वह भारतीय मूल के हैं, इसलिए उनके साथ न्याय हो, यह भारत सरकार की भी जिम्मेदारी है और इस दिशा में प्रगति भी हुई है। बड़ी बात यह कि आतंकवाद के मुद्दे पर सभी विकसित राष्ट्र भारत के साथ खड़े हैं। चीन आएदिन जो सीमा पर घुसपैठ करता रहता था, वह भारत के सख्त रुख के चलते ऐसी घटनाएं बहुत ही अपवाद स्वरूप हैं। पाकिस्तान भी सीमाओं पर अब जब चाहे तो गोलाबारी करने की हिम्मत नहीं करता, क्योंकि उसे कई बार ईंट का जवाब पत्थर से मिल चुका है, अलबत्ता सीमा पार से आतंकवाद की समस्या अभी खत्म नहीं हुई है। सुखद स्थिति यह है कि जेहादी आतंकवाद के चलते आएदिन बम-धमाके अब सुनायी नहीं पड़ते। चिदम्बरम साहब को यह पता होना चाहिए कि अपराध का संबंध केन्द्र सरकार से न होकर राज्य सरकारों से है। मोदी सरकार के दामन दूर-दूर तक भ्रष्टाचार के दामन क्या छीटें तक नहीं हैं। जहां तक असहिष्णुता का प्रश्न है- यह साबित हो चुका है कि यह बहुत दिनों तक विशेषाधिकार भोगने वालों की चिल्ल-पो मात्र थी।

सच्चाई यही है कि सुस्त, भ्रष्ट, वंशवादी राजनीति की गिरफ्त में फंसे राष्ट्र की छवि से दशकों बाद भारत बाहर निकल रहा है और यह तो एक नजरिए का सवाल है कि यदि ग्लास आधा भरा है तो उसे कुछ लोग आधा खाली और कुछ लोग आधा भरा देखेंगे। इसमें दो-मत नहीं कि हम ‘‘अच्छे दिन’’ तक नहीं पहुंचे हैं, पर अच्छे दिनों की ओर यात्रा शुरू हो गई है। जैसा कि कहा जाता है कि रोम एक दिन में नहीं बना था। पर जब 21 जून, 2015 को भारत के साथ 177 देश ‘‘योग दिवस’’ कार्यक्रम आयोजित करते हैं, तो स्पष्ट है कि सिर्फ भारत ही नहीं भारतीयता का भी विकास और विस्तार हो रहा है।