नागपुर, अक्टूबर 11, लखेश्वर चंद्रवंशी : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने भारतीय सेना के पराक्रम की भूरी-भूरी प्रशंसा की तथा मोदी सरकार के कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है। जम्मू, लद्दाख सहित कश्मीर घाटी का बड़ा क्षेत्र अभी भी कम उपद्रवग्रस्त व अधिक नियंत्रण में है। लेकिन वहां राष्ट्रीय प्रवृत्तियां व शक्तियों का बल स्थापित हो, इसके लिए शीघ्रता करनी चाहिए। सरसंघचालक ने कहा कि कश्मीर घाटी में उपद्रवों को उकसाने का काम सीमापार से होता है, यह सारी दुनिया जानती है। डॉ.भागवत ने जोर देते हुए कहा कि मीरपुर, मुजफ्फराबाद, गिलगिट, बाल्टिस्तान सहित संपूर्ण कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है, यह दृढ़ भूमिका प्रत्येक भारतीय के मन में बनी रहनी चाहिए।

सरसंघचालक नागपुर के रेशिमबाग स्थित प्रांगण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर महानगर के विजयादशमी कार्यक्रम में उपस्थितों को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय आर्थिक सेवा (सेवानिवृत्त) सत्यप्रकाश राय उपस्थित थे। इस दौरान आरएसएस के पश्चिम क्षेत्र संघचालक जयंतीभाई भाड़ेसिया, विदर्भ प्रान्त सहसंघचालक राम हरकरे, नागपुर महानगर संघचालक राजेश लोया तथा महानगर सहसंघचालक श्रीधर गाडगे व्यासपीठ पर विराजमान थे।

सरसंघचालक ने जम्मू-कश्मीर की वर्तमान स्थित को सुधारने तथा विस्थापित हिन्दू समाज के पुनर्वास को लेकर केन्द्र सरकार व जम्मू-कश्मीर के राज्य सरकार को समन्वय साधकर कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कश्मीर के उपद्रवग्रस्त क्षेत्रों में उपद्रव उत्पन्न करने वाले स्थानीय व परकीय तत्वों का कड़ाई से व शीघ्र नियंत्रण हो, इसके लिए राज्य शासन व केन्द्र शासन अपने-अपने प्रशासन सहित एकमत व एकनीति बनाकर समन्वय से कार्य करना होगा। सरसंघचालक ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय राजनयिक गतिविधियां, शासन व संसद ने दृढ़तापूर्वक कश्मीर को भारत का अविभाज्य अंग है यह संकल्प दोहराया है। जम्मू-कश्मीर के लिए सही नीति का तत्पर व दृढ़तापूर्ण क्रियान्वयन होना आवश्यक है।
विस्थापित हिन्दुओं का पुनर्वास

सरसंघचालक ने पाक अधिकृत कश्मीर, व कश्मीर घाटी से विस्थापित हिन्दुओं की सुरक्षा, योगक्षेम और उनके पुनर्वास के कार्य को शीघ्रता से पूर्ण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर राज्य में तत्कालीन राज्य शासन (फारुख अब्दुल्ला) द्वारा विस्थापित हिंदुओं को आश्वस्त करते हुए राज्य में ही बसने को कहा था। उन विस्थापितों को राज्य में भी अभी तक नागरिकता के अधिकार से वंचित रखा गया है, उन्हें उनके सभी अधिकार प्राप्त करा देने होंगे। डॉ.भागवत ने कहा कि अबतक राज्य प्रशासन के द्वारा जम्मू व लद्दाख के साथ होनेवाला भेदभाव तुरंत ही समाप्त होना चाहिए। जम्मू व कश्मीर में राज्य का प्रशासन राष्ट्रभाव से स्वच्छ, तत्पर, समदृष्टि व पारदर्शी होकर चले। ऐसा होगा तभी राज्य की जनता को विजय तथा विश्वास की एकसाथ अनुभूति मिलेगी और घाटी की जनता के सात्मीकरण की प्रक्रिया आगे बढे़गी।

सुरक्षा बालों का अभिनन्दन   

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सीमा प्रदेशों में अलगाव, हिंसा, आतंक व नशीली दवाओं की तस्करी जैसी समाज के स्वास्थ्य व बल को नष्ट करने वाली गतिविधियां चलती हैं। ऐसी अवस्था में हमारे सामरिक बल की सदैव तत्पर सेना दल, रक्षक बल तथा सूचना तंत्रों में समन्वय बहुत जरुरी है। सरसंघचालक ने कहा कि आपसी समन्वय, सहयोग का प्रमाण व नित्य सजगता में क्षणभर की ढिलाई महंगी पड़ सकती है, यह उरी के सैनिक शिविर पर हुए हमले की घटना ने फिर एक बार अधोरेखित किया है।

डॉ.भागवत ने कहा कि शासन के नेतृत्व ने हमारे वीर जवानों उरी हमले का जवाब बड़ी दृढ़ता व कुशलतापूर्वक दिया, इसलिए शासन व सभी सेना दलों का हार्दिक अभिनंदन! सरसंघचालक ने कहा कि हमारी यह दृढ़ता तथा राजनयिक व सामरिक कुशलता हमारी नीति में स्थायी हो यह आवश्यक है। समूचे सागरी व भू-सीमा प्रदेशों में इस दृष्टि से कड़ी निगरानी रखते हुए शासन,  प्रशासन व समाज के परस्पर सहयोग से अवांच्छित गतिविधियों को तथा उनके पीछे काम करने वाली कुप्रवृत्तियों को जड़मूल से समाप्त करना आवश्यक हो गया है।
एक राष्ट्र, एक जन की भावना  

सरसंघचालक ने कहा कि देश की व्यवस्था के नाते हमने अपने संविधान में संघराज्यीय कार्यप्रणाली को स्वीकार किया है। राज्यों की शासन व्यवस्थाओं का भी इसमें पूर्ण सहयोग आवश्यक रहता है। विभिन्न दलों द्वारा राजनीतिक नेतृत्व करने वालों को यह निरन्तर स्मरण रखना पडे़गा कि व्यवस्था कोई व कैसी भी हो, सम्पूर्ण भारत युगों से अपने जन की सभी विविधताओं सहित एक जन, एक देश, एक राष्ट्र रहा है, तथा आगे उसको वैसे ही रहना है, रखना है। उन्होंने कहा कि मन, वचन, कर्म से हमारा व्यवहार उस एकता को पुष्ट करने वाला होना चाहिए, न कि दुर्बल करने वाला। समाज जीवन के विभिन्न अंगों में नेतृत्व करने वाले सभी को इस दायित्वबोध का परिचय देते चलने का अनुशासन दिखाना ही पड़ेगा। साथ-साथ समाज को भी ऐसे ही दायित्वपूर्ण व्यवहार को सिखाने वाली व्यवस्थाएं बनानी पडे़गीं।

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विश्वास बढ़ानेवाली शासन

सरसंघचालक ने मोदी सरकार के शासन की प्रशंसा करते हुए कहा कि वर्तमान शासन ने इन दो वर्षों में देश में व्याप्त निराशा दूर करने वाली, विश्वास बढ़ाने वाली व विकास के पथ पर देश को अग्रसर करने वाली नीतियां बनाई। सरकार की विकासपरक नीतियों के कारण कुल मिलाकर देश आगे बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। डॉ.भागवत ने कहा कि अपने प्रजातांत्रिक प्रणाली में जो दल सत्ता से वंचित रहते हैं वे विरोधी दल बनकर शासन-प्रशासन की कमियों को ही अधोरेखांकित कर अपने दल के प्रभाव को बढ़ानेवाली राजनीति करते हैं। इसी मंथन में से देश के प्रगतिपथ की सहमति व उसके लिए चलने वाली नीतियों की समीक्षा, सुधार व सजग निगरानी होते रहना प्रजातंत्र में अपेक्षित रहता है।

Embeded Objectअनावश्यक विवाद व विभाजनकारी मुद्दों को उछालकर विपक्ष के रवैये व अलगाववादी शक्तियों की ओर संकेत करते हुए सरसंघचालक ने कहा कि देश की वर्तमान स्थिति व विश्व परिदृश्य की थोड़ी-बहुत जानकारी रखनेवाले सभी को यह पता है कि भारत का समर्थ, एकात्म, आत्मनिर्भर व नेतृत्वक्षम होकर उभरना फूटी आँखों न सुहाने वाली कुछ कट्टरपंथी, अतिवादी, विभेदकारी व स्वार्थी शक्तियां दुनिया में हैं। और यह शक्तियां भारत में भी अपना जाल बिछाए काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत के समाज-जीवन से विषमता, भेद व संकुचित स्वार्थप्रवृत्तियां अभी तक समाप्त नहीं हुई है। इसी कारण यदाकदा घटनेवाली घटनाओं का लाभ लेकर, अथवा घटना घटे इसके लिए कतिपय लोगों को उकसाते हुए समाज में वैमनस्य का भाव पैदा करने की कोशिश स्वार्थी लोग करते हैं। डॉ.भागवत ने कहा कि कई बार तो अघटित घटनाओं के घटने का असत्य प्रचार करते हुए विश्व में भारतवासी तथा भारत का शासन-प्रशासन तथा भारत में ऐसी दुष्प्रवृत्तियों को रोक सकने वाले संघ सहित सज्जन शक्ति को विवादों में खींचकर बदनाम करने का व लोकमानस को उनके बारे में भ्रम फ़ैलाने का प्रयास किया जाता है। ऐसी विभाजक शक्तियां शक्तियां अलग-अलग अथवा समान स्वार्थ के लिए गोलबंद होकर काम करेंगी हीं। उनके भ्रमजाल तथा छल-कपट के चंगुल में फंसकर समाज में विभेद व वैमनस्य का वातावरण न बने, इसके लिए प्रयास करने पड़ेंगे।

गोरक्षा का कार्य कानून सुव्यवस्था की मर्यादा में हो

सरसंघचालक डॉ.भागवत ने कहा कि देशी गाय अपने देश के पशुधन का बड़ा हिस्सा है। गो-रक्षण, संवर्धन व विकास यह संविधान के मार्गदर्शक तत्वों में निर्दिष्ट, भारतीय समाज की आस्था व परंपरा के अनुसार पवित्र कार्य है। उन्होंने कहा कि केवल संघ के स्वयंसेवक ही नहीं, देशभर में अनेक संत, सज्जन, संविधान कानून की मर्यादा का पूर्ण पालन करते हुए जीवन तपस्या के रूप में इस कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। आधुनिक विज्ञान के प्रमाण देशी गाय की उपयुक्तता व श्रेष्ठता को सिद्ध कर चुके हैं। अनेक राज्यों में गोहत्या प्रतिबंधक कानून तथा पशुओं के प्रति क्रूरता प्रतिबंधक कानून बने हैं। उनका ठीक से अमल हो इसके लिए भी कभी-कभी व कहीं-कहीं गौसेवकों को अभियान करना पड़ता है।

सरसंघचालक ने कहा कि गौहत्या की घटनाओं का आधार लेकर अथवा कपोलकल्पित घटनाओं की अफवाह को उछालते हुए अपना व्यक्तिगत अथवा राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करना, समाज में बिना कारण कलह खड़ा करना, अथवा केवल गौसेवा के पवित्र कार्य को ही लांछित व उपहासित करने के लिए कौभांड रचने वाले अवांच्छित तत्वों से उनकी तुलना नहीं हो सकती। गौसेवकों की तपस्या तो चलती, बढ़ती रहेगी। अपना हर कार्य कानून सुव्यवस्था की मर्यादा में ही हो यह स्वतंत्र देश के प्रजातंत्र का अनुशासन है। उन्होंने कहा कि गोहत्या प्रतिबंधन कानूनों का अमल कड़ाई से हो व कानून सुव्यवस्था का पालन भी कड़ाई से हो, यह देखते समय प्रशासन, सज्जन व दुर्जनों को एक ही तराजू में न तोले यह आवश्यक है। सभी को यह ध्यान में रखना चाहिए कि समाज में स्वतंत्रता व समता का अवतरण व दृढ़ीकरण, समाज में बंधुभाव की व्याप्ति व दृढ़ता पर निर्भर रहता है।

अंत में विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए सरसंघचालक ने गुरु गोविन्द सिंह द्वारा रचित काव्य के अंश का उल्लेख किया –

“देह सिवा बरु मोहे ईहै, सुभ करमन ते कबहूं न टरों।

न डरों अरि सो जब जाइ लरों, निसचै करि अपुनी जीत करों।।

अरु सिख हों आपने ही मन कौ, इह लालच हउ गुन तउ उचरों।

जब आव की अउध निदान बनै, अति ही रन मै तब जूझ मरों।।”

इसके पूर्व कार्यक्रम के प्रारंभ में ध्वजारोहण के पश्चात मान्यवरों द्वारा शस्त्रपूजन किया गया तथा स्वयंसेवकों ने पथसंचलन तथा दंड-व्यायाम योग का प्रदर्शन किया। नागपुर महानगर संघचालक राजेश लोया ने कार्यक्रम की प्रस्तावना तथा आभार व्यक्त किया, तत्पश्चात कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सत्यप्रकाश राय ने समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री नितीन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनविस, नागपुर के महापौर प्रवीण दटके, महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, राष्ट्रीय स्वयंसेविका समिति की प्रमुख संचालिका शांताक्का, समिति की कार्यवाहिका सीताक्का, संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ.मनमोहन वैद्य, सह प्रचार प्रमुख जे. नंदकुमार, संघ के वरिष्ठ विचारक व वरिष्ठ पत्रकार मा.गो. वैद्य, गायिका अनुराधा पोडवाल, भाजपा सांसद व गायक मनोज तिवारी के साथ ही देश-विदेश के प्रतिनिधि व नगर के गणमान्य नागरिक भारी संख्या में उपस्थित थे।