नागपुर, अक्टूबर 13, लखेश्वर चंद्रवंशी : कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी के द्वारा हमेशा यह भ्रामक और झूठ का प्रचार किया जाता है कि आरएसएस का भारत की स्वतंत्रता आन्दोलन में कोई भूमिका नहीं थी। संघ के खिलाफ झूठ के इस प्रचार का उत्तर इस बार विजयादशमी के कार्यक्रम में भारतीय आर्थिक सेवा के पूर्व कमिश्नर सत्यप्रकाश राय ने उदाहरण सहित दिया। उन्होंने कहा कि गांधीजी के सत्याग्रह से लेकर क्रांतिकारियों के कार्यों में आरएसएस के स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विजयादशमी समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए सत्यप्रकाश राय ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक देशभक्त संगठन है। सन 1925 में विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना करनेवाले डॉ. हेडगेवार ने ठोस राष्ट्रभक्ति, देश-प्रेम, चरित्र निर्माण, निस्वार्थ सेवाभाव तथा कर्तव्य परायणता को संघ की आधारशिला बनाई। उन्होंने कहा कि उस समय प्रत्येक स्वयंसेवक को प्रतिज्ञा दिलाई जाति थी कि वह तन, मन और शान से आजीवन और प्रमाणिकता से देश को स्वतंत्र कराने में मुख्य भूमिका निभाएगा। अपने प्रतिज्ञा के अनुरूप संघ के स्वयंसेवकों ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

नागपुर के रेशिमबाग स्थित प्रांगण में संम्पन्न हुए इस विजयादशमी समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, आरएसएस के पश्चिम क्षेत्र संघचालक जयंतीभाई भाड़ेसिया, विदर्भ प्रान्त सहसंघचालक राम हरकरे, नागपुर महानगर संघचालक राजेश लोया तथा महानगर सहसंघचालक श्रीधर गाडगे व्यासपीठ पर विराजमान थे।

स्वतंत्रता संग्राम में संघ की भूमिका

मुख्य अतिथि सत्यप्रकाश राय ने आगे कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में संघ के स्वयंसेवकों ने गांधीजी के नेतृत्व में चले सत्याग्रह के साथ ही क्रांतिकारियों को भी पूर्ण सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि संघ ने अंग्रेजों के विरुद्ध सन 1928 में साइमन कमीशन का भारत आगमन का प्रदर्शन कर विरोध किया था। इसी प्रकार सन 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाये गए सत्याग्रह का प्रबल समर्थन किया। इससे भी बढ़कर, सन 1942 में “अंग्रेजों- भारत छोड़ो” आन्दोलन में जबरदस्त भागीदारी निभाकर पूरे देश को अपनी राष्ट्रभक्तिपूर्ण भूमिका दिखाई। सत्यप्रकाश ने कहा कि पूरे राष्ट्र ने संघ की भूमिका की प्रशंसा की थी। संघ ने गोवा व दादरा नगर हवेली जैसे स्थानों को विदेशियों के चंगुल से मुक्त कराने में मुख्य भूमिका निभाई, इससे सभी अवगत हैं।

सत्यप्रकाश राय ने कहा कि गांधीजी के अनन्य भक्त पंडित बनारसी दास चतुर्वेदी ने अनेक बार यह सच्चाई प्रगट की कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं ने उनके सम्पर्क व माध्यम  द्वारा स्वतंत्रता आन्दोलन के प्रमुख क्रांतिकारियों जैसे ठाकुर रोशन सिंह, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद, पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, वीर सावरकर आदि को पूर्ण सहयोग किया। राय ने बताया कि शहीद भगत सिंह की माताजी तथा अशफाक उल्ला खां के बड़े भाई की सेवा, 99 नार्थ ऐवेन्यू में (पंडित बनारसी दास चतुर्वेदी का निवास) मैंने स्वयं संघ के कार्यकर्ताओं को करते देखा है।  

जातिगत भेदभाव व छुआछूत के खिलाफ आरएसएस

अखिल भारतीय सफाई कामगार संघ के अध्यक्ष सत्यप्रकाश राय ने आगे कहा कि गांधीजी जात-पात व छुआछूत से भारी नफरत करते थे। यह भी अकाट्य सत्य है कि महात्मा गांधी की तरह डॉ.हेडगेवार भी अस्पृश्यता के प्रबल विरोधी थे। उन्होंने समाज से छुआछूत मिटाने के लिए बापू की तरह अनथक प्रयत्न किए। संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरूजी गोलवलकर ने अपने भाषण में कहा था कि रूढ़िवादिता धर्म नहीं है। हमें छुआछूत और ऊंच-नीच के भेदभावों एवं परस्पर मतभेदों को बिल्कुल समाप्त कर आगे बढ़ना है। व्यर्थ के कर्मकांडों को मानवता के ऊपर हावी नहीं होने दिया जाए। उसे केवल व्यावहारिक रूप दिया जाए जिसमें सभी के लिए स्वतंत्रता एवं समानता हो।

सत्यप्रकाश ने कहा, “श्री गुरूजी ने स्वयं ही एक बार कहा था कि हमारे समाज को उपदेशों कि नहीं आचरण की आवश्यकता है। अर्थात जातिविहीन, भेदभाव-विहीन, अस्पृश्यता-विहीन आचरण की नितान्त आवश्यकता है। जब यह संभव होगा तब एक उच्च जातीय व्यक्ति पश्चाताप जनित विनम्रता से व्यवहार करे।”

राय ने कहा कि संघ के तृतीय सरसंघचालक बालासाहब देवरस ने कहा था कि इस वर्ग के लोगों का दुःख तुम तभी समझ सकोगे जब तुम/हम उनके स्थान पर रहकर सोचें। राय ने वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत द्वारा ग्राम-ग्राम में सामाजिक भेदभाव व विषमता मिटाने के लिए “एक मंदिर, एक श्मशान और एक जल स्रोत” बनाने के आह्वान की भी सराहना की।

संघ के सेवाकार्यों की प्रशंसा करते हुए सत्यप्रकाश राय ने कहा कि आरएसएस के स्वयंसेवक देशभर में डेढ़ लाख से अधिक सेवा केन्द्र चलाते हैं। इनमें से अधिकांश सेवाकार्य अनुसूचित जाति तथा जनजातियों की गरीब बस्तियों में चलाये जाते हैं। इन संघ के कार्यकर्ताओं ने कभी भी अपने सेवाकार्यों की प्रसिद्धि के लिए प्रयास नहीं किया। ये स्वयंसेवक अपने सेवाकार्यों के माध्यम से कभी अपने लिए किसी प्रकार के स्वार्थ की इच्छा नहीं रखते। इसलिए मैं उनके कार्यों की प्रशंसा करता हूं। संघ के स्वयंसेवक वास्तव में डॉ.आम्बेडकरजी के भावनाओं के अनुरूप ही समाज कार्य में लगे हैं।

संघ के स्वयंसेवक सच्चे अर्थों में गांधीजी के अनुयायी

सत्यप्रकाश ने कहा कि 29 जनवरी, 1948 को जारी अपनी अंतिम वसीयत में लिखा था कि जब तक भारत के सात लाख गांवों को सामाजिक, आर्थिक और नैतिक आजादी नहीं मिल जाती, तब तक भारत की आजादी अधूरी मानी जाएगी। सन 1946 में गांधीजी ने कहा था कि जब देशों में असली स्वतंत्रता आएगी तो छोटे से छोटा व्यक्ति यह कहेगा (या सोचेगा) कि इसको आजाद कराने में या इतिहास बनाने में मेरा भी कुछ योगदान है। बापू ने पत्र “हरिजन” के 24 जुलाई, 1946 के अंक में स्पष्ट किया था कि आजादी का अर्थ हिन्दुस्थान के आम लोगों की आजादी होना चाहिए। आजादी नीचे से होनी चाहिए। सबसे निचले पायदान के व्यक्ति को ऊपर के पायदान पर लाना चाहिए।

राय ने कहा कि गांधीजी ने आजादी से पहले दिल्ली की भंगी कालोनी में जाकर रहने लगे थे। उनके सुख-दुःख में हृदय से सम्मिलित हुए। भंगी कालोनी में गांधीजी की सुरक्षा के लिए संघ के स्वयंसेवक आते थे। सत्यप्रकाश राय ने जोर देकर कहा, “संघ के स्वयंसेवक सच्चे अर्थों में गांधीजी के अनुयायी हैं।”

सफाईकर्मियों को मिले सैनिक जैसा सम्मान

सत्यप्रकाश ने कहा कि देश के सफाई कर्मचारियों को भी देश के सैनिकों की तरह सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे देश के सफाई कर्मचारी गन्दगी को साफ कर अनगिनत बिमारियों से देश के नागरिकों की रक्षा करते हैं। निम्नतम वेतन पर बिना कुछ विशेष सहायता के भयंकर गन्दगी के बीच सफाई का काम करते हैं। फिर भी उन्हें उचित सम्मान और वेतन नहीं मिलता। जिस तरह देश की रक्षा के लिए सैनिकों और उनके परिवार को शासन द्वारा सहयोग मिलता है, उसी तरह सफाईकर्मियों को भी शासन का सहयोग मिलना चाहिए।

राय ने कहा कि किसी भी देश में सफाईकर्मी 2 या 3 महीने काम न करे तो वह देश बिमारियों का घर बन जाएगा। उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि अबतक सफाईकर्मियों को समाज में उचित सम्मान व शासन का सहयोग नहीं मिला यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

अद्वितीय प्रधानमंत्री का सार्थक कार्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों की सराहना करते हुए सत्यप्रकाश राय ने कहा कि केवल दो वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा कार्य कर दिखाया कि दुनिया में लोग उन्हें अद्वितीय प्रधानमंत्री का दर्जा देने लगे हैं। उनके द्वारा चलाई जा रही ‘उज्वला योजना’ से गरीब के घर की रसोई का धुआं हट रहा है, अब वहां गैस से खाना बनने लगा है। अबतक 5 करोड़ करीब लोग गैस कनेक्शन से लाभान्वित हुए हैं। उनके आह्वान पर करोड़ों लोगों ने गैस सब्सिडी छोड़ दी।

प्रधानमंत्री मोदी “वसुधैव कुटुम्बकम्” के सन्देश को चरितार्थ कर पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का प्रचार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ओदी ने विश्व के अनेक बड़े-छोटे देशों की यात्रा कर उसे एकसूत्र में बांधने का प्रयास कर रहे हैं। जिन देशों से हमारे संबंध ठीक नहीं थे उन देशों में जाकर भाईचारे, सौहार्द्र व मैत्रीभाव का वातावरण तैयार किया है। वाणिज्य व व्यापर को बढ़ावा दिया है। पूरे विश्व में उन्होंने भारत का गौरव बढ़ाया है।