कल रात 10.30 बजे ईटीवी पर पर गत 25 सितंबर की रात बैहर (मध्य प्रदेश) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बालाघाट जिला प्रचारक सुरेश यादव पर पुलिसिया कहर के बाद पुलिस कर्मियों पर हुई कार्यवाही के विरोध में 15 मिनिट का एक कार्यक्रम प्रसारित किया गया। इसके पूर्व भी इन्डियन एक्सप्रेस में कुछ ऐसा ही समाचार प्रकाशित हुआ था। स्वाभाविक ही इस प्रकार की रिपोर्टिंग मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने की साजिश तो है ही, इनके पीछे राजनीति एजेंडा भी है। जिसकी पुष्टि इस तथ्य से होती है कि कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा इस मामले को उच्च न्यायालय में लेकर गए हैं। 

क्या है मूल मुद्दा?

वैसे तो समूचा बालाघाट जिला ही नक्सल समस्या से ग्रस्त है, किन्तु बैहर तस्करी, ईसाई मिशनरीज की धर्मांतरण गतिविधियों और असामाजिक जिहादी मानसिकता का भी प्रमुख केंद्र है। विगत वर्षों में यहां बड़ी संख्या में हिन्दू युवतियां लव जिहाद की शिकार होकर अपना जीवन नरक बना चुकी हैं। इस गंभीर और संवेदनशील स्थिति का आंकलन कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बैहर को संघ कार्य की दृष्टि से जिला घोषित कर जिला प्रचारक के रूप सुरेश यादव की नियुक्ति की। अपनी व्यवहार कुशलता और कार्य दक्षता के चलते वे शीघ्र ही हिन्दू जागृति के केंद्र बिंदु बन गए। न केवल धर्मान्तरण की गतिविधियों पर अंकुश लगा, वरन कई फुसलाई गईं हिन्दू युवतियां वापस अपने घरों में आईं। स्वाभाविक ही यह नया परिदृश्य उन लोगों को रास नहीं आया, जिनकी आजीविका का साधन ही असामाजिकता है और संघ के जिला प्रचारक सुरेश यादव उनके निशाने पर आ गए।

25 सितम्बर को ‘ओनी न्यूज वनांचल’ नामक व्हाट्स एप ग्रुप पर हैदरावाद के कुख्यात मुस्लिम नेता असदुद्दीन ओवैसी और पाकिस्तान को लेकर एक कविता प्रसारित हुई। ख़ास बात यह है कि यह कविता सुरेश यादव ने नहीं लिखी थी, किसी अन्य की लिखी कविता को उन्होंने केवल साझा किया था, जैसे कि अमूमन कई लोग करते हैं। और पाकिस्तान विरोधी आज की मानसिकता में इसे गलत भी नहीं ठहराया जा सकता।    

किन्तु मौके की तलाश में बैठे जिहादियों ने बैहर टीआई जियाउल हक के साथ मिलकर षडयंत्र रचा। उनके सहयोगी बने बसपाई मानिसकता के लिए पूर्व से कुख्यात आईजीडीसी सागर। आईजी ने व्यक्तिगत रूचि लेकर एसपी को दरकिनार कर सारे सूत्र अपने हाथ में लिए और कार्यवाही के निर्देश दिए। आनन फानन में नवाब खान, सन्नू खान, दानिश खान, शाहीद खान आदि एक दर्जन मुस्लिम युवकों की शिकायत पर पुलिस सुरेश यादव को गिरफ्तार करने रात आठ बजे संघ कार्यालय जा धमकी। यहां संघ स्वयंसेवकों की एक बैठक चल रही थी। बैठक में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पुलिसकर्मियों ने जिला प्रचारक सुरेश यादव से मारपीट शुरू कर दी।

ख़ास बात यह है कि पिटाई करने वालों में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बैहर राजेश शर्मा, टीआई जियाउल हक एसआई अनिल अजमेरिया, एएसआई सुरेश विजयवार आदि के साथ शिकायतकर्ता नवाब खान, सन्नू खान, दानिश खान, शाहीद खान भी शामिल थे। ये लोग पीटते भी जा रहे थे और साथ-साथ मां-बहिन की गंदी-गंदी गालियां भी दे रहे थे। यादव को संघ कार्यालय से थाने ले जाया गया और वहां भी पीटा गया। जान बचाने को जैसे-तैसे सुरेश यादव भागकर असाटी की मेडिकल दुकान में घुसा किन्तु वहां भी इतनी मारपीट की गई कि वह बेहोश हो गया। तब उसे अस्पताल ले जाकर वीडियोग्राफी के साथ परीक्षण किया गया। सारा कार्य पूर्व नियोजित था, अतः वीडियोग्राफी में केवल शरीर के उन हिस्सों को दर्शाया गया, जहां कोई चोट नहीं थी।

अब कुछ अहम सवाल?

थोड़ी देर के लिए भूल जाइये कि सुरेश यादव संघ प्रचारक है, क्या पुलिस सार्वजनिक रूप से किसी आम व्यक्ति के साथ भी इस प्रकार गाली-गलौज और मारपीट कर सकती है? क्या शिकायतकर्ता मुस्लिम युवकों द्वारा पुलिस के साथ मिलकर सुरेश यादव के साथ मारपीट करना जायज था?

ख़ास बात यह कि सुरेश यादव के साथ मारपीट शुरू हुई रात आठ बजे और उनके खिलाफ शिकायत करने वाले मुस्लिम युवकों की तहरीर पर एफआईआर नंबर 201 दर्ज हुई रात नौ बजे, क्या गड़बड़झाला है?

प्रतिक्रिया स्वरूप जन आक्रोश स्वाभाविक 

इस निंदनीय घटना के विरोध में जन आक्रोश स्वाभाविक था। लगभग एक हजार लोग सूचना प्राप्त होते ही थाने पहुंच गए, जमकर प्रदर्शन हुआ। अगले दिन सोमवार को बैहर सहित पूरा बालाघाट भी स्वप्रेरित बंद रहा। इस दौरान स्कूल, पेट्रोल पंप और सुबह पांच बजे से चलने वाली बसें भी बंद रहीं।

जन दबाब के चलते मजबूरन एडिशनल एसपी राजेश शर्मा, टीआई जियाउल हक, उपनिरीक्षक अनिल अजमेरिया, सुरेश विजेवार समेत तीन कांस्टेबल और तीन होमगार्ड के जवानों के साथ 13 मुस्लिम युवकों के खिलाफ एफआईआर नंबर 202 में धारा 294, 323, 506, 147, 392, 307, 453 के तहत अपराध दर्ज किया। मेडिकल स्टोर के संचालक आसाटी की तरफ से भी पुलिसकर्मियों समेत एक दर्जन मुस्लिम युवकों पर एफआईआर नंबर 203 में लूट और तोड़फोड़ का मामला दर्ज कराया गया।

जन आक्रोश और इन दर्ज हुई एफ़आईआर से सकते में आए पुलिस कर्मियों ने भी हाथ पैर मारने शुरू किए और विरोध प्रदर्शन के दौरान पथराव होना दर्शाया तथा एफआईआर नंबर-204 में एसडीओपी परमार सिंह मेहरा के ड्राइवर झनकराम मानक पुरी ने जीप का कांच फूटने को लेकर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया।

एफआईआर नंबर - 205 में एएसआई योगेन्द्र चौहान ने थाने में प्रदर्शन और बलवा की रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें 15 से 20 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया। 48 घंटे बाद सरकार हरकत में आई और एडिशनल एसपी राजेश शर्मा, टीआई जियाउल हक, एसआई अनिल अजमेरिया समेत कुल छह पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। भोपाल पीएचक्यू से एक एसआईटी का गठन भी कर दिया गया। लेकिन एक भी आरोपी गिरफ्तार नहीं किया गया। रविवार को भोपाल मुख्यालय से पुलिस महानिरीक्षक डीसी सागर व एसपी डॉ.असित यादव का ट्रांसफर कर दिया गया।

मंगलवार को गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह व मंत्री गौरीशंकर बिसेन व दमोह सांसद प्रहलाद पटेल जबलपुर के जामदार हॉस्पिटल के गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती यादव को देखने पहुंचे। गृहमंत्री ने कहा कि निर्दयतापूर्ण ढंग से पुलिस ने पीटा है। इसमें जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सक्रिय हुए संघ विरोधी, रचा षड़यंत्र  

आरएसएस के जिला प्रचारक के साथ हुई मारपीट के बाद पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों पर हो रही कार्रवाई के बीच जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रेस वार्ता का आयोजन कर आईजी व एसपी के हुए ट्रांसफर की निंदा कर दबाव में एकतरफा कार्रवाई बताया। वहीं यह आरोप भी लगाया कि भाजपा सरकार आरएसएस के इशारे पर चल रही है।

प्रेसवार्ता के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप जायसवाल ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार आरएसएस के दबाव में एकतरफा कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि अभी एसआईटी द्वारा मामले की जांच की जा रही है और अभी जांच भी पूरी नहीं हो पाई है। बावजूद इसके आरएसएस के दबाव में आईजी व एसपी के तबादले कर दिए गए हैं। इसकी कांग्रेस निंदा करती है। जायसवाल ने बताया कि भोपाल स्तर पर गठित एसआईटी जो बैहर मामले की जांच कर रही है कहीं इस कार्रवाई को भी आरएसएस सरकार को दबाव डलवाकर जांच को प्रभावित न कर दे।

बैहर विधायक संजय उईके ने कहा कि कांग्रेस इस घटना का विरोध करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद कार्रवाई की मांग करती है। सरकार के खिलाफ विधानसभा से लेकर सड़क तक प्रदर्शन कर कांग्रेस इसका विरोध करेगी। वार्ता के दौरान पूर्व विधायक विश्वेश्वर भगत, पुष्पा बिसेन, भीमफुल सूंघे समेत अन्य कांग्रेसी मौजूद रहे।

कांग्रेस विरोधी दल की भूमिका में है, किन्तु वे यह भूल जाते हैं कि पुलिसिया बर्बरता का समर्थन कर वे आम जन के नागरिक अधिकारों तथा मानवाधिकारों का हनन कर रहे हैं । क्या संघ के प्रचारक को भारत के संविधान प्रदत्त अधिकारों का लाभ नहीं मिलना चाहिए? क्या वे भारत के दोयम दर्जे के नागरिक हैं? बात पुलिस के मनोबल से कहीं अधिक आमजन के अधिकारों की है। मारपीट हुई यह स्वतः सिद्ध है, फिर दोषियों को सजा मिले या नहीं, इस पर राजनीति कितनी जायज है? संघ के दबाब की बात उठाकर कांग्रेस और उनके वित्तपोषित पत्रकार जो घिनौना खेल खेल रहे हैं उसकी निंदा की जानी चाहिए। अन्याय किसी के भी साथ हो, उसे न्याय मिलना ही चाहिए।