आज सुहागन महिलाओं द्वारा करवा चौथ का व्रत बड़ी धूमधाम और श्रद्धा से मनाया जा रहा है। आज असंख्य सुहागन महिलाएं पारपंरिक विधि-विधान अनुसार अपने पति की लंबी उम्र के लिए कठोर उपवास पर हैं। देर रात्रि को चाँद निकलने के बाद उनका उपवास पूर्ण होगा। अनेक ऐसे पुरूष भी हैं, जो अपनी पत्नियों के साथ ही व्रत रखे हुए हैं। यह उनका अपनी पत्नियों के प्रति लगाव ही है। यदि करवा चौथ के पर्व के महात्म्य पर गम्भीरता से गौर किया जाए तो सहज आभास होगा कि यह पर्व अखण्ड दाम्पत्य जीवन का अनूठा सेतू है। यह पर्व जीवनसाथी के दिल में अपार स्नेह, श्रद्धा और विश्वास का अद्भूत संचार करता है और एक-दूसरे के प्रति त्याग, समर्पण और निष्ठा का अनुपम भाव जगाता है। जिस दाम्पत्य जीवन में करवा चौथ पर्व की महत्ता व सार्थकता वास्तविक अर्थों में विद्यमान है, नि:सन्देह वह घर स्वर्ग के समान है। लेकिन, सोचने वाली बात यह है कि ऐसे कितने घर स्वर्ग के समान हैं? कितने दम्पति ऐसे हैं जो करवा चौथ के पर्व की सार्थकता एवं महत्ता के मर्म को समझते हैं? पर्व के अनुरूप कितनी सुहागनों में अपने प्रति स्नेह, श्रद्धा, विश्वास, त्याग, समर्पण एवं निष्ठा के भाव समाहित हैं? कितने पति अपनी पत्नियों के प्रति ईमानदार, जवाबदेह एवं समर्पित हैं? कहना न होगा कि यदि इन सब सवालों का जवाब दिल पर हाथ रखकर दिया जाए तो जवाब बेहद विडम्बनात्मक एवं कष्टदायक होंगे।

आज अधिकतर दम्पतियों के रिश्तों में न केवल कड़वाहट भरी पड़ी है, बल्कि यह कड़वाहट भयंकर विष का रूप धारण कर रहा है। एक तरह से दाम्पत्य जीवन अनचाहा बोझ सा बन गया है। पति-पत्नी के बीच अविश्वास, गैर-जिम्मेदारी और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की प्रवृति दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। दम्पतियों के आपस की कलह से अनेक हंसते-खेलते परिवार उजड़ रहे हैं और मासूम व अबोध बच्चों का जीवन नरक बन रहा है। अनैतिक एवं नाजायज रिश्ते सात जन्मों तक साथ निभाने वाले वायदों को तार-तार कर रहे हैं। अपने जीवन साथी में खुशियां ढ़ूंढ़ने की बजाय, गैरों की बाहों में सुकून ढ़ूंढ़ा जा रहा है। हर दम्पति की अपनी कहानी है। अधिकतर में बेईमानी है और नादानी है। कई मामलों में गलतफहमियों की भरमार है तो कई दिखावे के शिकार हैं। एक छत के नीचे रहकर और बगल में सोकर भी दिलों में अनंत दूरियां बरकरार हैं। एक-दूसरे की भावनाएं निरंतर दरकिनार हैं। कहने की आवश्यकता नहीं है कि दाम्पत्य जीवन में कड़वाहट व दूरियों के कारण जो भी हों, उनमें भारी सुधार की दरकार है।

दाम्पत्य जीवन में दरार पैदा होने के कई कारण हैं। उन कारणों को चिहिन्त करके उनके निवारण की ईमानदार कोशिश करना ही सर्वोत्तम है। मसलन, यदि गरीबी और बेकारी के कारण आपसी रिश्तों में कड़वाहट है तो इसका समाधान पति-पत्नी दोनों समझदारी का परिचय देते हुए सहजता से सुलझा सकते हैं। अनावश्यक खर्चों पर अंकुश लगाना, बचत पर जोर देना, दिखावे से बचना, रोजगार/स्वरोजगार के लिए प्रयत्न करना व प्रोत्साहित करना, संयम व समझदारी बनाए रखना, वैकल्पिक व्यवस्था बनाना, घर के बुजुर्गों की राय लेना, अहंकार की भावना आड़े न आने देना जैसे अनेक उपायों के जरिए सकारात्मक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। लेकिन, अधिकतर मामलों में पत्नी अपने पति को कोसती मिलती है और पति अपनी पत्नी को वस्तुस्थिति से अवगत करवाने व विश्वास में लेने की बजाय धमकाने, डराने, मारने, गाली-गलौच करने व खौफ पैदा करने की गलती करते हुए मिलता है। इससे रिश्तों में कड़वाहट पैदा होती है और भारी भावनात्मक गिरावट आती है। इसके साथ ही अनेक व्यक्ति घरेलू कलहबाजी से पैदा होने वाले तनाव को दूर करने के लिए शराब व अन्य नशों का सहारा लेने लगता है और धीरे-धीरे उसका आदि हो जाता है। इससे परिस्थितियां और भी जटिल होती चली जाती हैं।

अनेक दम्पतियों के रिश्तों के बीच दरार की मुख्य वजह जीवन साथी के अवैध एवं नाजायज रिश्ते हैं। दाम्पत्य जीवन में जब अविश्वास व नासमझी की खाई बनती है तो वे अपने-अपने स्तर पर अन्यत्र सुकून व सुख तलाशने लगते हैं। एक-दूसरे के प्रति बेकद्री, भावनाओं का दमन और उम्मीदों पर कुठाराघात होता है तो सुखी दाम्पत्य जीवन में भूचाल आना स्वभाविक है। यदि साहस, संयम एवं समझदारी से काम लिया जाए तो भटके हुए जीवन साथी को बड़ी सहजता के साथ सही रास्ते पर लाया जा सकता है और उसे सच्चे अर्थों में अपना बनाया जा सकता है। अनेक मामले तो ऐसे देखने में आते हैं कि अपने जीवन साथी पर अनावश्यक शक करने की वजह से ही दाम्पत्य जीवन नरक बने हुए हैं। कई बार तो बेशकीमती व निर्दोष जानें भी चली जाती हैं। ऐसे में महिला हो या पुरूष, दोनों का यह नैतिक दायित्व बनता है कि वे अपने जीवन साथी के प्रति ईमानदार रहें, वफादार रहें और समर्पित रहें। आपसी रिश्तों में बेईमानी व शक का विष न घुले, इसके लिए हमें अपनी जिम्मेदारियों का सहज अहसास होना अनिवार्य है।

एक-दूसरे को समय न दे पाना भी पति-पत्नी के रिश्तों में दरार की प्रमुख वजह देखने को मिलती है। ऑफिस या प्रोजेक्ट के कामों का बोझ जब दिलोदिमाग पर हावी हो जाता है तो जीवन साथी के रिश्तों के बीच दूरियां स्वतः पैदा होने लगती हैं। शुरूआत में ये दूरियां छोटी-छोटी शिकायतों व उलाहनों से शुरू होती हुई चिड़चिड़ेपन व गुस्से की सीमाओं को पार करते हुए सीधे टकराव तक पहुंचती हैं। कई बार यह टकराव दाम्पत्य जीवन में बेहद भयंकर मोड़ ला देता है। इस तरह के मामलों की भरमार है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सिर्फ पैसा कमाना ही हमारा दायित्व नहीं है, बल्कि परिवार की जिम्मेदारियों को निभाना भी हमारा नैतिक दायित्व होता है। अपने जीवन साथी को पर्याप्त समय देना व उसकी भावनाओं की कद्र करना दाम्पत्य जीवन को सुखी और अटूट बनाने का अमोघ मंत्र है।

आधुनिक जीवन-पद्धति में असंतुलित खान-पान, दिनचर्या एवं वातावरण भी खलनायक की भूमिका निभाने लगा है। इससे सहनशक्ति पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ रहा है। चिड़चिड़ापन, अनावश्यक तनाव, गुस्सा, सिरदर्द, आलस, कामचोरी आदि अनेक तरह के नकारात्मक अवयव अपना साम्राज्य स्थापित कर चुके हैं। छोटी-छोटी बातों पर दाम्पत्य जीवन में बड़ी-बड़ी दरारें पैदा होने लगी हैं। एक-दूसरे पर हावी होने और मामली बातों को अपना घोर अपमान समझने की प्रवृति हर किसी में देखने को मिल रही हैं। जब बात हद से आगे बढ़ जाती है तो वह व्यक्तिगत इज्जत व रौब का सवाल बन जाता है। अपनी गलती का अहसास होने के बावजूद वह क्षमा मांगने का साहस नहीं जुटा पाते हैं। यदि ऐसे मामलों में दिल से एक बार ‘सॉरी’ कहने का साहस पैदा कर लिया जाए तो बहुत सी अनसुलझी समस्याएं स्वतः समाप्त हो सकती हैं।

करवा चौथ के परम पवित्र पर्व पर हर महिला व पुरूष को आत्ममंथन करना चाहिए और अपनी आत्मा से पूछना चाहिए कि क्या वह अपने जीवन साथी के प्रति सच में ईमानदार, वफादार, जिम्मेदार व समर्पित है? यदि जवाब ‘हां’ में हो तो नि:सन्देह, आपका पावन-प्रेम प्रगाढ़ बना रहेगा और जन्मों-जन्मों तक आपका यह प्यार अटूट बना रहेगा। यदि जवाब ‘नहीं’ में हो तो जल्द से जल्द उसका कारण और निवारण पूरी ईमानदारी से खोजना बहुत जरूरी है, वरना आपके लिए दाम्पत्य जीवन बोझ ही बना रहेगा या फिर दाम्पत्य जीवन टूट जाएगा। व्रत-उपवास तो दिखावा भी हो सकता है। लेकिन, यदि आज आप दिल से अपने जीवन-साथी को ‘मुझे आपसे सच्चा प्यार है’ (आई.लव.यू.) बोल देंगे और अपनी गलतियों का अहसास होने का विश्वास दिलाते हुए ‘मुझे माफ कर दो’ (सॉरी) कहने का साहस दिखा देंगे तो यह आपके जीवन साथी के लिए दुनिया का सबसे बड़ा अनमोल उपहार होगा और आपके लिए स्वर्गमयी सुखी व समृद्ध घर का आधार होगा।