‘सर्जीकल स्ट्राईक’ के बाद पाकिस्तान ‘खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे’ वाली स्थिति में है। पाकिस्तान की तरफ से कभी ‘सर्जीकल स्ट्राईक’ की सार्वजनिक रूप से निन्दा की जाती है तो कभी उसे नकारा जाता है। पाकिस्तान कभी परमाणु हमले की धमकी देता है तो कभी सीमा पर तनाव कम करने का प्रस्ताव देता है। दरअसल, ‘सर्जीकल स्ट्राईक’ के बाद पाकिस्तानी नेतृत्व एवं अवाम का मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया है। उसे कुछ सुझ ही नहीं रहा है कि पूरी दुनिया में मिट्टी में मिल चुकी साख को कैसे बचाया जाए। हकीकत से रूबरू होने के बावजूद, उसमें उसे पचाने का साहस भी नहीं हो रहा है। आतंकवादी के मसले पर धरातल पर ठोस कदम उठाने की बजाय बौखलाहट में जुबानी जंग को अपने बचाव का हथियार बना लिया है। जुबानी जंग भी ऐसी कि जिसे सुनने के बाद हर किसी की हंसी छूट जाती है। इस तरह के जहरीले बयानवीरों की पूरी पाकिस्तानी फौज खड़ी हो चुकी है, जिसने निर्लज्ज होकर अमर्यादित व हास्यास्पद बकवासबाजी के वार भारत पर करना शुरू कर दिया है। उन्हें नहीं पता कि वे क्या कह रहे हैं, उसके क्या अर्थ हैं और उनका किस रूप में सामने आ सकता है? देश के प्रति निष्ठा रखते हुए ठोस व मर्यादित टिप्पणी करना, गलत नहीं होता। लेकिन, सभी मर्यादाओं व संवेदनाओं का अतिक्रमण करना न केवल घातक होता है, अपितु आत्मघाती भी होता है। इस तथ्य को पाकिस्तान लगातार नजरअंदाज कर रहा है। कहना न होगा कि जिस तरह से पाकिस्तान की तरफ से जहरीली जुबानी जंग शुरू की गई है, वह उसके लिए आत्मघाती सिद्ध हो सकती है।

पाकिस्तान की जिम्मेदार हस्तियां भी इस बदजुबानी का हिस्सा बन रही हैं, यह सबसे चौंकाने और सोचने के लिए मजबूर करने वाला है। उनसे इस तरह की घटिया व संकीर्ण स्तर की जहरीली बयानबाजी की कतई उम्मीद नहीं की जा सकती। उदाहरण के तौरपर, पाकिस्तान के दिग्गज क्रिकेटर जावेद मियांदाद की भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व भारत के सन्दर्भ में घोर आपत्तिजनक, अमर्यादित और असहज करने वाली टिप्पणियां हैं। तमाम मर्यादाओं को तोड़ते हुए मियांदाद ने अपनी जहरीली जुबान से बेहद शर्मनाक बयानबाजी की है। उन्होंने अपने विवेक को खोते हुए मानसिक असन्तुलन का परिचय दिया है। उन्होंने अति निन्दनीय भड़काऊ भाषा में कहा है कि ‘नरेन्द्र मोदी साहब ऐसे आदमी हैं, जिनके... का पता नहीं है। ये किसकी गोद में और कहां खेल रहा है, ये तो पता नहीं। लेकिन, ये नहीं जानता कि ये किस कौम को ललकार रहा है।’ मियांदाद का मन इससे भी नहीं भरा तो आगे कह दिया कि ‘ये भारत तो डरी हुई कौम है। इनकी कोई आर्मी भी नहीं है।’ उनके इन सब बयानों की समीक्षा की जाए तो दोनों देशों के हालात सुधरने की बजाय, और तेजी के साथ बिगाड़ने वाले हैं। उनका यह भड़काऊ बयान कि ‘हम तो तैयार बैठे हैं, इन चीजों के लिए। मैं भी इसके लिए तैयार हूँ’, पाकिस्तान के काले नापाक मनसूबों को स्पष्ट तौरपर जग-जाहिर करने वाला है। इससे पहले मुंबई हमले के मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद ‘सर्जीकल स्ट्राईक’ के बाद पाकिस्तान की जमीन से भारत को सीधी धमकी दे चुका है कि ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हम बताएंगे कि ‘सर्जीकल स्ट्राईक’ क्या होता है? मैं इंडियन मीडिया को बताना चाहता हूँ कि आप जल्द देखोगे कि पाकिस्तान जवान किस तरह ‘सर्जीकल स्ट्राईक’ को अंजाम देते हैं? अमेरिका भी आपकी मदद नहीं कर पाएगा। मुंहतोड़ जवाब देने की बारी अब पाकिस्तान की है।’ निःसन्देह, भारत के लिए इस तरह के बयान बेहद असहनीय हैं।

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ भी विवादित बयान देने से पीछे नहीं रहे। ‘सर्जीकल स्ट्राईक’ के बाद मुशर्रफ ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘अगर मैं पॉवर में होता तो भारत को काउंटर की धमकी देता। पाकिस्तान के लोग सेना से प्यार करते हैं और उससे उन्हें बहुत उम्मीदें भी हैं।’ इसके साथ ही मुशर्रफ ने यह भी धमकी दे डाली कि ‘हम भूटान नहीं हैं, हम पाकिस्तान हैं। हमारी फोर्स ताकतवर है। कोई यह न समझे कि हम चुपचाप बैठे रहेंगे।’ हालांकि इस तरह की बयानबाजी करने के बाद मुशर्रफ इस हकीकत को भी स्वीकार करने से नहीं चुके कि ‘अगर भारत के साथ युद्ध होता है तो हम हार भी सकते हैं।’ इसके साथ ही उन्होंने यह कड़वा सच भी कबूल किया कि ‘पाकिस्तान अपनी गलत नीतियों की वजह से अब दुनिया में अलग-थलग व अकेला पड़ गया है।’ वैसे देखा जाए, तो जनरल मुशर्रफ की प्रतिक्रियाओं में गम्भीरता दिखाई देती है और पाकिस्तान को सहज भाव से आत्म-मन्थन करने व हकीकत से मुंह न मोड़ने की नसीहत भी झलकती है। लेकिन, इसके विपरीत पाकिस्तान जहरीले व भड़काऊ बयान देने के साथ-साथ सीमा पर गोलीबारी करने व आतंकवादियों की घूसपैठ को बढ़ावा देने से भी बाज नहीं आ रहा है।

‘सर्जीकल स्ट्राईक’ के बाद एक दर्जन से अधिक बार पाकिस्तान सीज-फायर का खुला उल्लंघन कर चुका है। बारामुला में आतंकवादियों की भारत में घूसपैठ करवाने की नापाक हरकत कर चुका है। ताजा घटनाक्रम में राजौरी जिले में नौशेरा सैक्टर के 3 इलाकों में नियन्त्रण रेखा के पास सैन्य चैकियों और असैन्य इलाकों में पाकिस्तानी सैन्य बलों ने अन्धाधुंध गोलाबारी की है व मोर्टार के गोले दागे हैं। इससे पहले 29 सितम्बर को मेंढ़र के बालनोई इलाके में गोलीबारी करके और 30 सितम्बर को जम्मू जिले के अखनूर सेक्टर में पल्लनवाला, चपरियाल, समनाम इलाकों में नियन्त्रण रेखा पर छोटे हथियारों से गोलाबारी करके सीज फायर का उल्लंघन किया किया। इसमें पाँच आम नागरिक घायल हो हुए हैं। समुद्र के जरिए भी पाकिस्तान भारत में आतंकवादी हमले करवाने की फिराक में है। गुब्बारों पर उर्दू भाषा में आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखकर सरहद पार पहुंचाने जैसी ओछी हरकतें भी पाकिस्तान की तरफ से की जा चुकी हैं।

इस समय पाकिस्तान को कूटनीतिक परिपक्वता का परिचय देना चाहिए और आतंकवाद के उन्मूलन के लिए अपनी सीमाओं के अन्दर स्वयं ही ‘सर्जीकल स्ट्राईक’ को आगे बढ़ाने का साहस दिखाना चाहिए। पाकिस्तान भली भांति जानता है कि वह लंबे समय से आतंकवादियों का पोषण व संरक्षण करता आ रहा है। वह इनके माध्यम से भारत को झुकाने या हराने के दिवा-स्वप्न देखता आ रहा है। कश्मीर के नाम अनर्गल प्रलाप करके राजनीतिक लोग वोट की राजनीति करते आ रहे हैं। आम अवाम को पाकिस्तान के हुक्मरानों की गलत नीतियों, संकीर्ण सोच और गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजियों की वजह से गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, बेकारी, आतंकवाद, प्रताड़ना, शर्मिन्दगी और वैश्विक समुदाय में दुत्कार ही नसीब हुई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केरल की धरती से पाकिस्तानी जनता से सीधा संवाद स्थापित करते हुए कहा था कि वे अपने हुक्मरानों से पाकिस्तान की वर्तमान दशा व दिशा पर जवाब मांगे? उनसे पूछें कि उन्होंने आतंकवाद, भूख, गरीबी और बेबसी के सिवाय दिया क्या है? वे अपने देश को तो संभाल नहीं पा रहे हैं और कश्मीर को हथियाने की बात कहकर बरगलाते आ रहे हैं। नरेन्द्र मोदी की पाकिस्तानियों को भूख, बेरोजगारी, बेकारी, कुपोषण जैसी समस्याओं से लड़ने की खुली चुनौती पाकिस्तान के हित में जाने वाली है।

पाकिस्तान की अवाम को समझना होगा कि संकीर्ण सियासत करने वाले लोग पूरे पाकिस्तान को मिटाने पर तुले हुए हैं। वे विकास की बजाय विनाश की तरफ कदम बढ़ाते आए हैं। जो पैसा देश के नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं देने में खर्च होना चाहिए था, वह आतंकी सरगनाओं की सेवा-सुश्रुषा, घपलों-घोटालों और वाहियात के कामों में लगा दिया गया। पाकिस्तानी अवाम को कुछ शरारती व संकीर्ण सियासतदान जहरीली, अर्यादित व भड़काऊ बयानबाजी करके और युद्धोन्माद पैदा करके एक बार फिर बर्बादी की तरफ धकेल रहे हैं। इन जहरीले निर्लज्ज बयानवीरों को हाशिये पर धकेलना और उन्हें उनकीं औकात से रूबरू करवाना बेहद जरूरी है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस समय पाकिस्तान पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ चुका है और एकदम अकेला रह गया है। उसके प्रति वैश्विक समुदाय से किसी तरह की कोई सहानुभूति शेष नहीं बची है। पूरी दुनिया मान चुकी है कि पाकिस्तान आतंकवाद का पोषक और संरक्षक है। कुख्यात आतंकी संगठन पाकिस्तान की सत्ता को अपने इशारे पर चला रहे हैं। पाकिस्तान हर स्तर पर पिछड़ चुका है। आम अवाम की दशा अत्यन्त दयनीय हो चुकी है। ऐसे में यदि भारत-पाक के बीच युद्ध होता है अथवा पाकिस्तान पर किसी तरह के कड़े प्रतिबन्ध लगाए जाते हैं या फिर उनके खिलाफ कोई कूटनीतिक कदम बढ़ाए जाते हैं तो उसका सीधा असर आम अवाम पर पड़ेगा और पाकिस्तान को कोई भी गर्त में जाने से बचा नहीं पायेगा। यदि पाकिस्तानी हुक्मरान व सियासी लोग समय की नजाकत को समझते हुए अपनी भूल का अहसास करते हुए आतंकवाद के संरक्षण, पोषण एवं समर्थन देना बंद करके आतंकवादियों के संहार करने का साहस दिखाएं तो पाकिस्तान सही दिशा में आगे बढ़ेगा और भारत के साथ शांति, सौहार्द व मधुर सम्बंध बनाते हुए उन्नति व प्रगति के पथ पर अग्रसित होगा।