जयललिता दुनिया से अलविदा हो गई और इसी के साथ तमिलनाडु की सियासत में एक खालीपन आ गया है। यह इसलिए कि तमिलनाडु की दो मुख्य राजनीतिक दल जे. जयललिता की एआईएडीएमके और एम. करूणानिधि की डीएमके दोनों ही व्यक्ति केन्द्रित पार्टियां हैं। व्यक्ति केन्द्रित राजनीतिक दल उस समय टूट जाता है या बिखर जाता है जब उसके दल का वह ‘व्यक्ति’ चला जाए जिसपर उस पार्टी का वर्तमान और भविष्य टिका होता है। एक अर्थ में वह ‘व्यक्ति’ ही उस पार्टी का मुख्य आधार होता है। इसलिए जयललिता के जाने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में आए खालीपन पर विचार करना आज आवश्यक ही नहीं, प्रासंगिक भी है। 

एआईएडीएमके और डीएमके का हाल  

तमिलनाडु के गत 50 वर्षों के इतिहास में सत्ता में दो ही पार्टियों ने शासन किया है- डीएमके या  एआईएडीएमके। लेकिन इस समय तमिलनाडु के इन दोनों मुख्य राजनीतिक दलों की हालत इस दृष्टि से एक समान प्रतीत होता है कि दोनों ही दलों के मुखिया आज सक्रिय नहीं हैं। एक, जे. जयललिता जिनका 5 दिसम्बर को रात करीब 11.30 बजे निधन हो गया और दूसरे, एम. करूणानिधि जिनकी आयु इस समय 93 वर्ष की है और वे भी लगातार बीमार चल रहे हैं इसलिए वे राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। हां, दोनों में फर्क केवल इतना ही है कि इस समय जयललिता की एआईएडीएमके सत्तासीन दल है और डीएमके मुख्य विपक्षी दल है।  

जयललिता के जाने के बाद तमिलनाडु की सियासत में क्या बदलाव आता है, इसपर नजर रखनी होगी। हो सकता है कि जयललिता की पार्टी में फूट पड़ जाए या समन्वय के साथ वह बिखरने से बच जाए। यदि एआईएडीएमके में फूट पड़ती है तो इसका लाभ कौन सी पार्टी उठाएगी? तमिलनाडु के मुख्य विपक्षी दल डीएमके के मुखिया करुणानिधि के परिवार में पहले से ही फूट पड़ी है। करुणानिधि के बेटे एम.के. स्टालिन और एम.के. अलागिरी के बीच में अनबन है, जिसके कारण एमके. स्टालिन सहित डीएमके का भी भविष्य अधर में दिखाई दे रहा है। इसलिए यह माना जा रहा है कि यदि एआईएडीएमके में फूट पड़ती है तो इसका लाभ डीएमके के बजाय देश की दो राष्ट्रीय पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या कांग्रेस उठा सकती है, इसकी सम्भावना अधिक है। क्योंकि इस समय केन्द्र में भाजपा की सरकार है और कांग्रेस अपने खोये हुए जनाधार को फिर से प्राप्त करने में लगा है।

एआईएडीएमके की प्राथमिकता क्या होगी?

जयललिता के जाने के बाद एआईएडीएमके की प्राथमिकताon में सबसे पहला काम राज्य के राजकाज को व्यवस्थित संचालित करना है, दूसरा ‘अम्मा’ के नाम से लोक आस्था का केन्द्र रही जयललिता के सामाजिक वर्चस्व को अपने कार्यों द्वारा बनाए रखना है। यदि ऐसा करने में एआईएडीएमके सफल हो जाता है तो पार्टी पर जनता का विश्वास बना रहेगा। इस समय एआईएडीएमके में सबकी नजर राज्य के नए मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम और जयललिता की सबसे विश्वास पात्र सहेली शशिकला पर रहेगी। पन्नीरसेल्वम और शशिकला दोनों को समन्वय के साथ पार्टी की लोकप्रियता को बनाए रखने के लिए काम करना होगा।

इस समय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तो पन्नीरसेल्वम हैं। हो सकता है कि पार्टी के कुछ विधायक पन्नीरसेल्वम को पसंद न करते हो और जयललिता के जीते जी किसी ने पन्नीरसेल्वम का विरोध न किया हो। लेकिन जयललिता के जाने के बाद सियासत में कुछ भी हो सकता है। हो सकता है कि एआईएडीएमके के विधायक पन्नीरसेल्वम की सरकार भी गिरा दे। लेकिन यदि एआईएडीएमके के सभी विधायक पन्नीरसेल्वम का साथ देते हैं तो पार्टी की राजनीतिक स्थिरता कायम रहेगी। वहीं इस बात की चर्चा अधिक हो रही है कि शशिकला की पार्टी पर अच्छी पकड़ है। शशिकला थेवर जाति से आती हैं, और थेवर समुदाय एआईएडीएमके का वोटर माना जाता है। इसलिए एआईएडीएमके में शशिकला की भूमिका बड़ी होगी। हो सकता है कि शशिकला को पार्टी का महासचिव या मुखिया बना दिया जाए। यदि ऐसा होता है तो पन्नीरसेल्वम को बतौर मुख्यमंत्री और शशिकला को पार्टी मुखिया के रूप में समन्वय के साथ काम करना होगा, और ऐसा न हुआ तो जयललिता के जाने के बाद आनेवाले समय में एआईएडीएमके का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

एआईएडीएमके अब किस ओर?  

तमिलनाडु के दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता को श्रद्धांजलि देने जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चेन्नई पहुंचे तो उस बेहद गमगीन माहौल में कुछ संकेत देखे गए। प्रधानमंत्री मोदी से लिपटकर राज्य के नए मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम रोने लगे। इससे पहले, प्रधानमंत्री ने रोती हुई शशिकला के सिर पर हाथ रखकर उन्हें ढांढस बंधाया। तमिलनाडु के दोनों ही नेता शशिकला और पनीरसेल्वम जयललिता के जाने के बाद आधारहीन नजर आ रहे थे। ऐसे समय में दोनों को  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ढांढस बंधाया।

जयललिता के जीवित रहते एआईएडीएमके के भविष्य को लेकर कोई चिंता नहीं थी। अब जबकि जयललिता नहीं है तो एआईएडीएमके के भविष्य के लिए पार्टी के दोनों बड़े नेता शशिकला और पनीरसेल्वम को विचार करना होगा। उन्हें देश के किसी राष्ट्रीय पार्टी के साथ खड़े रहना होगा। केन्द्र में मोदी सरकार है, इसलिए इसकी संभावना अधिक है कि एआईएडीएमके भाजपानीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल हो जाए। यदि ऐसा होता है तो मोदी सरकार का समर्थन कर एआईएडीएमके अपनी शक्ति को बढ़ा सकती है और केन्द्र में सरकार और अधिक मजबूत हो सकता है। इसमें दोनों का ही लाभ है।   

तमिलनाडु में लोकसभा की कुल 39 सीटें हैं और इस समय एआईएडीएमके के पास 37 सीटें हैं। लोकसभा में इस वक्त राजग की 339 सीटें हैं, और यदि एआईएडीएमके राजग में शामिल हो जाए तो ये सीटें बढ़कर 376 हो जाएंगी। और विपक्ष में सिर्फ 167 सांसद रह जाएंगे। केन्द्र सरकार राज्यसभा में अल्पमत में है और एआईएडीएमके के राज्यसभा में 13 सांसद हैं। यदि एआईएडीएमके के 13 सांसद उनके साथ आ जाते हैं, तो राज्यसभा में सरकार बहुमत में तो नहीं आएगी, पर सरकार की शक्ति कुछ बढ़ जाएगी।