नोटबंदी से गरीब, मजदूर, मुसलमान जो रोज मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता है उसे परेशानी हो रही है, परन्तु सरल जीवन जीनेवाला मुसलमान इस बात से खुश है कि गली-मोहल्ले में चलने वाला गुब्बा, जुआ और मटका का कारोबार खत्म हो गया है। इसके साथ ही छोटी-मोटी दादागिरी और खुराफातों में भी बहुत कमी आयी है। मुसलमान को खुशी है कि जाली नोटों का कारोबार, हवाला, सट्टा बाजारी, अपहरण-फिरौती, रिश्वतखोरी के साथ-साथ चरस, गांजा, स्मैक और ड्रग्स की सप्लाई भी रूकी हुई है। मुसलमान इस बात से भी खुश है कि आतंकवाद तथा आतंकवाद को धनराशि मुहैया करवाने में भी बहुत ज्यादा कमी हो गई है।

सोनाबंदी से मुसलमान बहुत खुश है क्योंकि मजहबे इस्लाम में मुसलमान को सोना पहनना हराम है। यह भी सच है कि सामान्य मुस्लिम परिवार के पास 500 ग्राम, 250 ग्राम, 100 ग्राम कुल 975 ग्राम सोने की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती।  कुरान मजीद में -

अल्लाह का हुकुम -

पारा 1 व 2 - सूरत नं. 2 सूर ए बकर - आयत  - 43, 83, 110 व 177

पारा 28 - सूरत नं. 58 सूर ए मुजादाला - आयत - 13

पारा 29 - सूरत नं. 73 सूर ए मुजम्मिल - आयत - 20

और सहीह हदीस के अनुसार, जिस मुसलमान के पास साढ़े सात तोला सोना अथवा साढ़े बावन तोला चांदी अथवा इसके समतुल्य नगद राशि अथवा अधिक माल है तो उसे साहेबे हैसियत माना गया है और उसपर प्रतिवर्ष 2.5 प्रतिशत की जकात (दान) देना फर्ज (अनिवार्य) है।

वर्तमान में सोना लगभग 31-32 हजार रुपए प्रति तोला है। 31,500 X 7.50 = 2,36,250 रुपए। आयकर की सीमा में आने से पहले मुसलमान को जकात देना अनिवार्य है। जकात एवं आयकर में प्रमुख अन्तर यह है कि साहेबे हैसियत मुसलमान को उसके पास मौजूद माल पर प्रतिवर्ष जकात देना अनिवार्य है, जबकि एक वर्ष में आयकर देने के बाद अगले वर्ष उस पर कर नहीं लगता है। उदाहरणत: यदि किसी मुसलमान के पास 5 तोला सोना, 10 तोला चांदी और 1,00,000 रुपए नगद है जिसपर उसने जकात दे दी है। परन्तु अगले वर्ष उसके पास 1,00,000 रुपए और आ जाता है तो उसे 5 तोला सोना, 10 तोला चांदी और 2,00,000 रुपए पर 5,000/- जकात देना अनिवार्य है।      

इस्लाम के अनुसार, जकात अदा करने पर ही मुसलमान का धन पाक होता है। अन्यथा आखिरत (मरने के बाद दूसरी दुनिया) में अपने यही धन गरम करके जकात अदा नहीं करने वाले के शरीर पर मढ़ दिया जाएगा। इसलिए मुसलमानों में धन संचय की प्रवृति बहुत कम पायी जाती है। इसलिए आम मुसलमान यह चाहता है कि काला धन बाहर निकाला जाएं और ये सारा पैसा देश के विकास में काम आ सके ताकि सबके साथ-साथ उसका भी भला हो।