साक्षात्कार : ग्रामीण विकास के मुद्दों पर केन्द्रीय मंत्री चौधरी बीरेन्द्र सिंह से संवाद

केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री चौधरी बीरेन्द्र सिंह से ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर युवा पत्रकार राजीव गुप्ता ने बात की। अपने संक्षिप्त साक्षात्कार में उन्होंने अपने मंत्रालय के कार्य और उससे ग्रामीणों को मिलनेवाले लाभ के संबध में विस्तार से बताया है।

प्रश्न : जनधन योजना, आधार कार्ड और मोबाईल बैंकिंग (जैम) जैसी आधुनिक तकनीकी के द्वारा ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत के ग्रामीण आंचल को किस प्रकार लाभांवित कर रहा है?

उत्तर : 10 माह पूर्व लगभग 3 करोड़ लोगों के बैंक में खाते थे परंतु अब प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत लगभग 19 करोड लोगों के बैंक में खाते खुल चुके हैं। 6 करोड, 14 लाख लोगों के सक्रिय बैंक खाते हैं, जिन्हें मनरेगा का लाभ मिल रहा है अर्थात उनके बैंक खातों में सीधा पैसा भेजा जाता है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत मनरेगा में काम करनेवाले लाभार्थियों को उनके सक्रिय बैक खाते अथवा डाकखानों द्वारा राशि प्रदान की जाती है। इसके कारण से लीकेज की संभावना नगण्य हो गई है, परिणामतः लाभार्थियों को सौ प्रतिशत लाभ मिल रहा है। आधार कार्ड का विषय अभी सुप्रीम कोर्ट में है परंतु हमारा ऐसा मानना है कि यदि आधार कार्ड को बैंक खाते से जोड़ा जाएगा तो अधिक पारदर्शिता आएगी क्योंकि आधार कार्ड के कारण किसी भी व्यक्ति का डूबलिकेट खाता नहीं खुल पाता है। सीधा पैसा (डायरेक्ट कैश ट्रांसफर) लाभार्थियों को मिले, इसके लिए आधार कार्ड एक बेंचमार्क है। आज लगभग 65 प्रतिशत लोगों के बैंक में खाते हैं, जिनका मैंने जिक्र किया है, लगभग 30-35 प्रतिशत लोगों के पास डाकखानों के माध्यम से सीधा पैसा (डायरेक्ट कैश ट्रांसफर) लाभार्थियों को दिया जा रहा है।   

प्रश्न : क्या जैम व्यवस्था वर्तमान समय में पीडीएस व्यवस्था का ही आधुनिक स्वरूप है?

उत्तर : पीडीएस की प्रमाणिकता और आधार कार्ड पर बने बैंक खातों की प्रमाणिकता में थोड़ा-बहुत अंतर है। हम यह मानते हैं कि हमारे बैंक खाते अधिक प्रमाणिक हैं।

प्रश्न : ग्रामीण आंचल के नवयुवकों का कौशल-विकास आपके मंत्रालय द्वारा किस प्रकार किया जा रहा है? 

उत्तर : दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के माध्यम से हम युवाओं को कृषि के अलावा तकनीकी ज्ञान देते हैं जिसके कारण देश के लगभग 10 करोड़ से अधिक युवा लाभान्वित हो रहे हैं क्योंकि हम ऐसा मानते हैं कि तकनीकी ज्ञान के कारण ग्रामीण युवाओं में उनके कौशल का अधिक विकास होगा जिसके कारण उनकी अजीविका हेतु उनके सामने कृषि के अलावा सेवा क्षेत्र जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अधिक विकल्प होंगे। इस योजना में अबतक कुल 25 प्रतिशत ही खर्च होता था लेकिन मंत्रिमंडल के साथ चर्चा करके अब हम अधिक धनराशि इस योजना में खर्च करेंगे ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण युवा इस योजना से लाभान्वित हो सकें। लगभग 70 प्रतिशत से अधिक इस योजना से लाभांवित ग्रामीण युवाओं को रोजगार हेतु आश्वस्त किया गया है। सरल शब्दों में, जो भी 100 ग्रामीण युवा इस योजना के अंतर्गत ट्रेनिंग लेंगे उनमें से 70 ग्रामीण युवा को रोजगार अवश्य मिलेगा। विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में हमारे ट्रेनिंग सेंटर चलते हैं और अबतक लगभग 6 लाख से अधिक युवा ट्रेनिंग ले चुके हैं। हमारा लक्ष्य है कि अगले कुछ वर्षों में लगभग 10 लाख से अधिक युवाओं को ट्रेनिंग दे चुके होंगे। आपको यह बताना चाहता हूं कि ग्रामीण युवाओं को दी जाने वाली ट्रेनिंग का सारा खर्चा सरकार वहन करती है और ट्रेनिंग प्राप्त युवा को यदि मासिक वेतन कम मिलता है तो उसकी मासिक आमदनी (लगभग छह मास) बढ़ने तक उसे प्रतिमाह 1000 रूपया सरकार देती है साथ ही यदि ट्रेनिंग प्राप्त कोई युवा विदेश जाता है और वहां उसे मासिक वेतन कम मिलता है तो उसे भी प्रति माह 10,000 रूपये सरकार देगी।    

प्रश्न : ग्रामीण तकनीकी के द्वारा ग्रामीण आंचल में रहने वाले लोगों को लाभ पहुंचाने हेतु आपके मंत्रालय का किस प्रकार योगदान होता है अथवा आपके मंत्रालय की इस प्रकार की कोई योजना है?     

उत्तर : ग्रामीण कारीगर अथवा कलाकार की वस्तुओं की मार्केटिंग अच्छी तरह नहीं हो पाती है इसलिए उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता। परंतु हम इस कोशिश में हैं कि उसके द्वारा निर्मित की गई वस्तुओं की ‘ब्रैंड वैल्यू’ अधिक हो ताकि उसे अच्छी कीमत मिले, और किसी बिचौलिए की बजाय उसे सीधा लाभ पहुंच सके। इसी को मैं ग्रामीण तकनीकी मानता हूं।

प्रश्न : स्वच्छ भारत अभियान के बारे में बताइए।

उत्तर : 15 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्रीजी की घोषणा के साथ ही हमारे मंत्रालय ने उसपर कार्यान्वयन प्रारम्भ कर दिया। प्रधानमंत्रीजी के सपनों को हम वर्ष 2019 से पहले ही पूरा कर लेंगे। ग्रामीण आंचल में हमारे सामने 11 करोड़, 11 लाख शौचालय बनाने का लक्ष्य है, जिसमें से अबतक 6 करोड़, 70 लाख शौचालय हम बनवा चुके हैं। 2 अक्टूबर, 2019 को हमारी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि उस दिन हम यह कह सकेंगे कि भारत में अब हर घर शौचालय-युक्त है।

प्रश्न : कपार्ट को पुनः शुरू करने की कोई योजना है? साथ इन सभी विभिन्न योजनाओं से क्या आपको लगता है कि अजीविका हेतु गांव से शहरों की ओर पलायन रुकेगा?    

उत्तर : हां! कपार्ट को हम पुनः शुरू करनेवाले हैं। यहां मैं एक बात कहना चाहता हूं कि किसी भी छोटे उद्यमी को आगे बढ़ने के लिए अवसर चाहिए, इसी की तलाश में वह शहर की तरफ जाता है। हमारी सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है कि छोटे उद्यमियों को उसके गांव के आसपास ही उन्हें आर्थिक समेत विभिन्न अवसर उपलब्ध हो, जिससे कारण अवश्य ही पलायन रुकेगा।      

प्रश्न : प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पर आपकी संक्षिप्त टिप्पणी क्या है?

उत्तर : हमारे मंत्रालय की सबसे बड़ी योजना ही यही है। उपर्युक्त जो बातें अभी तक हमने की, उसका मूल यही योजना है। एक वाक्य में मैं आपको बताऊं कि इस योजना के कारण ही भारत के ग्रामीण आंचल में रहनेवाले लोगों को दुनिया के बारे में जानने का अवसर प्राप्त हुआ है। 

प्रस्तुति : राजीव गुप्ता (दिल्ली)