“ब्रसेल्स केवल बेल्ज्यिम की राजधानी नहीं है, यह यूरोपीय संघ का मुख्यालय है। यह अमेरिकी नेतृत्ववाले दुनिया के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन नाटो का मुख्यालय भी है। इसलिए यहां हमला होना केवल बेल्जियम  के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ एवं नाटो देशों को चुनौती है।”

जो खतरा पिछले कई महीनों से मंडरा रहा था वह आखिर अपनी पूरी क्रूरता से बरस गया। राजधानी ब्रसेल्स में जेवेनटेम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 30 सेकण्ड के भीतर दो तथा उसके तुरंत बाद मालबीक मेट्रो स्टेशन पर एक बम विस्फोट हुआ। जाहिर है, यह सुनियोजित हमला था जिसकी तैयारी बिल्कुल सोचसमझकर की गई थी। यह मात्र संयोग है कि इन तीनों शृंखलाबद्ध बम विस्फोटों में मरने वालों की संख्या 35 तक सीमित रही। हालांकि बेल्जियम जैसे छोटे देश में मरने वालों की इतनी संख्या काफी ज्यादा है, लेकिन इससे ज्यादा भी संख्या हो सकती थी। कुछ बम तो विस्फोट के बाद तुरत पकड़ में आ गए। यदि वो बम फट गए होते तो न जाने हताहत होने की संख्या और कितनी होती। ये धमाके सुबह हवाई अड्डे पर 8 बजे प्रस्थान क्षेत्र के मुख्य हॉल में हुए। वहां आम तौर पर भारी भीड़ होनी ही चाहिए और विस्फोट इतने जबरदस्त थे कि पूरा हॉल तहस-नहस हो गया। हाल के शीशे टूट गए, फाल्स सीलिंग नीचे गिर गया और फर्श की टाइल्स उखड़ गईं। पास खड़े विमानों की खिड़कियों के शीशे भी टूट गए। हाल से लेकर लिफ्ट तक हर तरफ खून ही खून बिखरा था। साफ है कि यह बहुत बड़ा हमला था। बेल्जियम ने इसको आपातकाल की तरह लिया। ब्रसेल्स जैसे शहर का यातायात ठप कर दिया जाना सामान्य बात नहीं है।

वास्तव में फ्रांस के बाद यूरोपीय देश बेल्जियम पर बड़ा आतंकी हमला होना सामान्य घटना नहीं है। ब्रसेल्स केवल बेल्ज्यिम की राजधानी नहीं है, यह यूरोपीय संघ का मुख्यालय है यानी आप इसे यूरोपीय संघ की राजधानी भी कह सकते हैं। इसके साथ यह अमेरिकी नेतृत्ववाले दुनिया के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन नाटो का मुख्यालय भी है। इसलिए यहां हमला होना केवल बेल्जियम के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ एवं नाटो देशों को चुनौती है। हमला करने वाले कौन थे यह बताने की आवश्यकता नहीं है। आईएस ने इसकी जिम्मेवारी ली है। अगर वो जिम्मेवारी लेने की घोषणा नहीं करता तब भी स्पष्ट था। हवाई अड्डे पर आत्मघाती हमलावरों ने बम विस्फोट से पहले गोलीबारी भी की और अरबी भाषा में नारे भी लगाए। मालबीक मेट्रो स्टेशन यूरोपीय संघ के मुख्य भवन से थोड़ी ही दूर है। तो इसके पीछे केवल यातायात को निशाना बना नहीं यूरोपीय संघ को संदेश देना भी था। इसका सबसे चिन्ताजनक पहलू है हमले की साफ चेतावनी के बावजूद और स्वयं बेल्जियम सरकार द्वारा इसे स्वीकार करने के बावजूद इसे रोक न पाना। आईएस ने हमले की चेतावनी दी और हमला कर दिया। ऐसा ही उनने फ्रांस के मामले में भी किया। आईएस ने कहा था कि फ्रांस पर और हमले करेगा और उसने 13 नवंबर, 2015 को वहां फिर से हमला कर दिया।

सिर्फ चार दिन पहले बेल्जियम की पुलिस ने 13 नवंबर को हुए पेरिस हमले के मुख्य साजिशकर्ता सलाह अब्देसलाम को ब्रसेल्स के मेट्रो स्टेशन के पास से ही गिरफ्तार किया गया था। माना जा रहा है कि यह आतंकी हमला उसी का बदला है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री चार्ल्स माइकल ने हमले के बाद स्वीकार किया कि उन्हें पहले से ही आतंकी हमले होने की आशंका थी। हालांकि उन्होंने कहा कि वह मौजूदा हालात का डटकर सामना करेंगे लेकिन हमले को रोकने में सफल न होना उनके दावे को संदेह के घेरे में लाता है। हालांकि छोटे से देश से, जिसमें 25 प्रतिशत संख्या प्रवासियों की है और वहां मुसलमानों की संख्या काफी ज्यादा है। मोरक्को से लेकर कई देशों के मुसलमान वहां आकर काम करते हुए स्थिर हो गए है। उसमें आतंकवादी मॉड्यूल को पकड़ना आसान नहीं होता। आप देखिए न अब्देस्लाम और उसका दोस्त पेरिस हमले का मास्टरमाइंड अब्देलहामिद अबाउद दोनों मोरक्को अप्रवासी थे और ब्रसेल्स के मोलेनबीक इलाके में रहते थे। हालांकि अब्देस्लाम का जन्म बेल्जियम में ही हुआ था। 2009 से 2011 के बीच वो ब्रसेल्स के रीजनल ट्राम सिस्टम में बतौर मैकेनिक काम करता था। लेकिन बाद में उसे नौकरी से निकाल दिया गया। 2010-11 के बीच छोटे अपराध के कारण वो जेल में भी रहा। बाद में वो और उसका भाई ब्राहिम ने मोलेनबीक इलाके में ही लेस बेगिनीज नाम का एक बार शुरू किया। पेरिस हमले से छह महीने पहले उन्होंने बार को बेच दिया था।

पेरिस हमलों के पूर्व और उसके बाद ही वहां आईएस की गतिविधियां दिखने लगीं थीं। बेल्जियम लगातार आतंक से जुड़े मामले बढ़ रहे हैं। फेडरल प्रोसिक्यूटर वान लूई ने बताया था कि पिछले साल बेल्जियम में 315 आतंकवाद से संबंधित मामले दायर हुए थे। इस साल भी अब तक 60 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। पेरिस हमले के बाद ब्रसेल्स में आतंकी हमले का इनपुट था। इसके बाद सरकार ने ब्रसेल्स में हाई अलर्ट कर दिया था। बेल्जियम के प्रधानमंत्री चार्ल्स मिशेल ने कहा था कि उन्हें सटीक सूचना मिली है कि कुछ लोग हथियारों और विस्फोटकों से हमला करने की फिराक में हैं। पेरिस हमले के बाद फ्रांस में जब बड़े पैमाने पर धरपकड़ शुरू हुई तो आईएसआईएस के स्लीपर सेल ब्रसेल्स शिफ्ट हो गए। बेल्जियम के विदेश मंत्री दिदिएर रेंडर्स ने रविवार को ही बताया था कि पेरिस हमले का मुख्य संदिग्ध सालाह अब्देस्लाम ब्रसेल्स में नए हमले की फिराक में था। इसके लिए वो नया नेटवर्क भी बना चुका था। उसने भारी संख्या में हथियार भी जमा किए थे, जो उसकी गिरफ्तारी होने के बाद बरामद कर लिए गए थे। यानी बेल्जियम सरकार को रविवार को ही पता चल गया था कि ब्रसेल्स पर हमले की साजिश रची जा रही है। सलाह अब्देसलाम ने पूछताछ में बताया था कि इस बार उसके निशाने पर ब्रसेल्स है। जर्मन मार्शल फोरम फंड फोरम को संबोधित करते हुए बेल्जियम के उपप्रधानमंत्री दिडियर रेंडर्स ने भी खुलासा किया था कि अब्देसलाम ने पूछताछ में बताया था कि वह अन्य आतंकियों के साथ ब्रसेल्स में आतंकी हमले की साजिश रच रहा था। उन्होंने उसी फोरम में कहा था कि शायद ये सच भी हो सकता है क्योंकि उन्होंने प्राथिमक जांच में बड़ी संख्या में हथियार और गोला बारूद जब्त किया था। सरकार के प्रतिनिधियों के स्वयं ऐसे बयान के बावजूद यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि वहां खतरे की पूरी  संभावना की जानकारी उन्हें थी। इसके बावजूद आतंकियों का सफल होना डर पैदा करता है।

पेरिस हमले के बाद बेल्जियम में छापेमारी हुई थी। 19 मार्च को जिस दिन अब्देसलाम पकड़ा गया ब्रसेल्स के ही एक अन्य हिस्से में छापे की कार्रवाई की गई थी। इसमें एक अल्जीरियाई आइएस आतंकवादी मोहम्मद बेल्केद (35) मारा गया था और उसके अपार्टमेंट से अब्देसलाम के फिंगरप्रिंट मिले थे। अब्देसलाम की गिरफ्तारी के बाद बेल्जियम के प्रधानमंत्री चार्ल्स मिशेल ने फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ एक बैठक की। ओलांद उस दिन यूरोपीय यूनियन सम्मेलन के लिए ब्रसेल्स थे। पेरिस हमलों के बाद से ही बेल्जियम जांच के केंद्र में रहा है। जांच से जुड़े एक सूत्र ने दिसंबर में बताया था कि आतंकी हमलों के कुछ घंटों बाद ही अब्देसलाम फ्रांस में तीन पुलिस नाकों को चकमा देकर बेल्जियम आ गया था। वह फ्लैट में तीन हफ्ते से छिपा था। उसके भाई ब्रहीम ने हमलों के दौरान खुद को बम से उड़ा दिया था। उसको ब्रसेल्स में दफनाया गया था। जबकि एक अन्य हमलावर बिलाल हफ्दी को शहर के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से में पिछले हफ्ते दफनाया गया था। हमले का मुख्य साजिशकर्ता अब्देलहामिद भी ब्रसेल्स में नवंबर में पेरिस में एक छापे के दौरान मारा गया था।

तो यह पूरे यूरोप एवं नाटो के सदस्यों के लिए विचार का विषय होना चाहिए कि इतना सब कुछ होने के बावजूद वहां आतंकवादी हमला न कर सकें इसके लिए सामूहिक प्रयास क्यों नहीं किया गया? फ्रांस ने सीरिया पर आईएस ठिकानांे पर हमला करना आरंभ किया वह ठीक था, लेकिन उसे आभास होना चाहिए कि वो इसका बदला ले सकते हैं और जहां उनकी उपस्थिति है वहां किसी तरह धमाका करके अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे ताकि उनके लड़ाकों में उत्साह बना रहे। बेल्जियम थोड़ा खुला देश है। वहां ज्यादा सुरक्षा चेकिंग नहीं होती। वहां यह नियम नहीं है कि आपकी हवाई अड्डा कॉम्प्लेक्स में प्रवेश से पहले कई बार चेकिंग हो। हवाई अड्डे के ठीक बाहर टिकट या आईडी चेक नहीं किया जाता। टिकट काउंटर तक सीधे प्रवेश हो सकता है। तो इसमें खतरे के मद्दे बदलाव किया जाना चाहिए था। ब्रसेल्स का ये हवाई अड्डा बेहद आधुनिक है। यहां सुरक्षा व्यवस्था आसानी से की जा सकती है। ध्यान रखिए बेल्जियम के इस मुख्य हवाई अड्डे से नाटो की कई फ्लाइड्ट उड़ान भरती हैं। यूरोपीय देशों के जहाज भी उड़ते रहते हैं। सुरक्षा इन सबकी जिम्मेवारी थी और है। आज आईएस यह कहने की स्थिति में है कि हमने चुनौती देकर शक्तिशाली यूरोपीय देशों के संघ की राजधानी तथा महाशक्ति अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य संगठन के मुख्यालय के केन्द्र जैसी जगह पर हमला कर दिया। यानी उनकी ताकत के केन्द्र पर घुसकर हमने मारा है। इससे आईएस आतंकवादियों का हौंसला बढ़ेगा। उनका हौसला बढ़ना पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है। दुनिया को आईएस के अंत के लिए एकजुट होकर प्रयास करने की जरुरत है जो हो नहीं पा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 30 मार्च को ब्रसेल्स में भारत यूरोपीय संघ बैठक में रहने वाले हैं। उम्मीद है वे इसे उठाएंगे।