सांसद में पी.चिदम्बरम पिता पुत्र जिस ढंग से हंगामे के शिकार हो रहे हैं उनमें हर दृष्टि से तार्किकता है। अन्नाद्रमुक सांसदों के हंगामों को केवल राजनीति मानने वाले दोनों पिता पुत्र के अपकर्मों को समझने की कोशिश करें। कार्ती चिदम्बरम हालांकि सफाई दे रहे हैं कि उनका पूरा व्यवसाय कानूनी है। भ्रष्टाचार में घिरा कोई व्यक्ति अपने को दोषी नहीं मानता है और कानूनी रूप से अपने को बचाने का पूरा जुग्गता भी कर लेता है ताकि मामला सामने आने पर वह फंसे नहीं। ऐसा उन्होंने किया होगा। पुत्र की तरह ही पी.चिदम्बरम इशरत जहां मामले में अपने दूसरे शपथपत्र को सही बताया है। उनके विपरीत उनके समय के गृह सचिव और आंतरिक सुरक्षा मामलों के अवर सचिव जिसने शपथपत्रों पर हस्ताक्षर किया, दोनों ने साफ किया है कि इशरत जहां और उसके तीन साथियों को लश्कर ए तैयबा का सदस्य माने जाने वाले पहले शपथ पत्र को वे बिल्कुल सही एवं पुष्ट सूचनाओं पर आधारित मानते थे। अवर सचिव ने तो कहा है कि उनके पास दूसरा शपथ पत्र आया और कहा गया कि ऊपर का आदेश है और मुझे हस्ताक्षर करना पड़ा। गृह सचिव ने कहा कि यह राजनीतिक निर्णय था, मेरी इसमें कोई भूमिका नहीं थी। तो इस तरह पुत्र पर पिता के पद और कद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार से धन कमाने और अपना व्यापार साम्राज्य फैलाने का आरोप है तो पिता पर आतंकवादियों को निर्दोष साबित कर उनका मुठभेड़ करनेवालों को फंसाने का षडयंत्र का। दोनों गंभीर मसले हैं और दोनों की जांच तथा कार्रवाई आवश्यक है। देश का गृहमंत्री ही देश की सुरक्षा से इस तरह खिलवाड़ करने लगे तो फिर देश का क्या होगा?

अगर एअरसेल मार्सेस घोटाला है तो फिर कार्ती कैसे उसका भाग नहीं हो सकते हैं। प्रवर्तन निदेशालय एवं आयकर के छापों तथा जांच के दौरान बरामद किए कागजों के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ है कि कार्ति का कारोबार 14 देशों में फैला हुआ है। इंग्लैंड, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका, सिंगापुर और थायलैंड समेत 14 देशों में रियल स्टेट और दूसरे व्यवसायों मे निवेश के सबूत मिले हैं। प्रवर्तन निदेशालय और आयकर की टीमें इन 14 देशों में संपर्क कर उनकी संपत्ति का विस्तृत विवरण एकत्रित करने में लगी है। दरअसल, एयरसेल-मैक्सिस घोटाले की जांच करने के दौरान प्रवर्तन निदेशालय और आयकर को कार्ती के इससे जुड़ाव का पता चला। इसके अनुसार कार्ति ने 2006-14 के बीच इन देशों में अपना व्यापार बढ़ाया है। बताने की आवश्यकता नहीं कि इस दौरान संप्रग का शासन था और चिदम्बरत वित्त मंत्री एवं गृहमंत्री रहे थे। ये एजेंसियां कार्ति की कंपनी एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग की जांच कर रही हैं जो एयरसेल-मैक्सिस डील में शामिल थी। अभी तक जो दस्तावेज बरामद हुए हैं उनके अध्ययन से पता चलता है कि कार्ति द्वारा ज्यादातर सौदे और ट्रांजेक्शन एडवांटेज स्ट्रेटेजिक की सिंगापुर स्थित कंपनी से किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि सिंगापुर स्थित एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंपनी ने सितंबर, 2011 में समरसेट में 88 एकड़ जमीन खरीदी थी जिसकी कीमत उस समय 10 लाख पाउंड थी। इसी कंपनी ने श्रीलंका में स्थित एक बड़ी रिसॉर्ट कंपनी लंका फॉचर्यून रिसॉर्ट में भी बड़ी संख्या में शेयर्स खरीदे थे। लंका फॉचर्यून रिसॉर्ट के दी वाटरफ्रंट और वेलिगामा बे रिसॉर्ट के अलावा एमराल्ड होटल हैं।

ये सब कहां से आए? इतने धन कहां से आए? जांच से जो जानकारी बाहर आई है उसके अनुसार एडवांस ने दक्षिण अफ्रीका में तीन विनयार्ड् भी खरीदे जिनकी पहचान ग्रैबो में रोवे फार्म, कैप ऑर्चर्ड एंड विनयार्ड्स प्रायवेट लिमिटेड और झेडविलीट एंटरप्राजेस के रूप में हुई है। इसके अलावा एश्टन में वाइन और स्टड फार्म भी कंपनी के नाम है। यह साफ हो रहा है कि इन फार्मों को खरीदने के लिए पैसा दुबई के रास्ते गया था। दुबई स्थित डेजर्ट डून्स प्रॉपर्टीज ने कार्ति की कंपनी के साथ 17 लाख सिंगापुर डॉलर का लेनदेन किया है। इसके कार्ति की कंपनी में निवेश भी सामने आ रहा है। इसके अलावा पर्ल दुबई एफएक्स एलएलसी के भी एडवांटेज के साथ फायनेंशियल ट्रांजेक्शन्स यानी वित्तीय लेनदेन हैं। ये सारी जानकारियां हमको आपको चौंकाने वाली है। यह पिता के पद और कद का प्रसाद नहीं तो और क्या है?

पिछले वर्ष प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्ति चिदंबरम की कंपनी के दो निदेशकों को समन भेजा था। दोनों निवेशकों से यह पूछा गया कि डील के पहले एयरसेल टेलीवेंचर ने अपने पांच प्रतिशत शेयर उनकी कंपनी को कैसे दिया? इसमें कार्ति चिदंबरम की क्या भूमिका थी? इसी के साथ उनसे एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग में आस्ब्रीज होल्डिंग्स एंड इनवेस्टमेंट की हिस्सेदारी और कामकाज में कार्ति चिदंबरम की भूमिका के बारे में भी पूछताछ की गई। उनके बयान के बाद कार्ति चिदम्बरम पर शिकंजा कसने लगा। चिदम्बरम पिता पुत्र चाहे जो तर्क दें 2006 में एयरसेल मैक्सिस डील के दौरान एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाया गया था। स्पष्ट हो रहा है कि पूरी डील के पहले ही एयरसेल टेलीवेंचर लिमिटेड में एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग को पांच प्रतिशत शेयर दे दिया गया। क्यों? एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग में दो-तिहाई से अधिक हिस्सेदारी आस्ब्रीज होल्डिंग्स एंड इनवेस्टमेंट की है। जबकि आस्ब्रीज होल्डिंग्स एंड इनवेस्टमेंट में 94 फीसद से अधिक शेयर कार्ति चिदंबरम के हैं। इस तरह से एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग को एयरसेल मैक्सिस डील में जो भी लाभ मिला, वह सीधे तौर पर कार्ति चिदंबरम के खाते में गया। क्या इसमें हमें आपको गोरखधंधा की गंध नहीं मिलती है? अगर मिलती है तो हम चिदम्बरम पिता-पुत्र की बात मानें या जो कुछ दिख रहा है उसे सच मान लें।

ध्यान रखने की बात है सुब्रह्माण्यम स्वामी पिछले चार साल से एयरसेल मैक्सिस डील में पी चिदंबरम की भूमिका और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि एयरसेल को खरीदने के लिए मलेशियाई कंपनी मैक्सिस को विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की स्वीकृति आवश्यक थी जो वित्त मंत्रालय के बगैर नहीं हो सकता था। इसमें इस आरोप की भी जांच होनी चाहिए कि क्या वित्त मंत्री के रूप में पी.चिदंबरम ने एफआईपीबी द्वारा स्वीकृति दिलाने के एवज में रिश्वत के रूप में एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग को पांच प्रतिशत हिस्सेदारी देने का दबाव बनाया था? जांच में जो भी सामने आए इस समय तो इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है। चिदंबरम ने बेटे के कार्यालयों पर प्रवर्तन निदेशालय एवं आयकर की छापेमारी को बदले की कार्रवाई बताकर इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई कहा। लेकिन क्या इस पूरी डील में भ्रष्टाचार की गंध नहीं आती है? क्या इसकी जांच नहीं होनी चाहिए? 

यह तो लगभग साबित हो चुका है कि पूर्व दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन के भाई की कंपनी सन टीवी नेटवर्क के जरिए कई फर्मों को फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन यानी धन दिया गया था। इनमें कई कंपनियों के मालिक कार्ति चिदंबरम ही हैं। इस घोटाले में कार्ति की दो कंपनियों वासन आईकेयर और एडवान्टेज स्ट्रैटजिक का नाम है। प्रवर्तन निदेशालय एयरसेल-मैक्सिस मामले में दयानिधि मारन और उनके भाई कलानिधि मारन के खिलाफ जांच कर रही है और उनसे कई बार पूछताछ कर चुकी है। साल 2012 में ही राज्यसभा में विपक्ष के नेता और मौजूदा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उस वक्त गृह मंत्री पी.चिदंबरम पर वित्तीय गड़बड़ियों में शामिल होने का आरोप लगाया था। जेटली ने कहा था कि चिदंबरम के एक रिश्तेदार की फर्म (एडवान्टेज स्ट्रैटजिक कन्सल्टिंग) ने एयरसेल को बहुत बड़ी राशि का भुगतना किया है। यह भुगतान मलेशियाई फर्म मैक्सिस द्वारा एयरसेल में निवेश से बिल्कुल पहले किया गया और एयरसेल का स्वामित्व बदला गया। 2006 में यूपीए सरकार के दौरान वित्त मंत्री रहते हुए चिदंबरम के पास एयरसेल की स्वामित्व का मामला अटका था। इसके बाद 7 मार्च, 2006 को पी.चिदंबरम ने मलेशियाई फर्म मैक्सिस को एयरसेल में विदेशी निवेश की इजाजत दी थी। इसमें एडवान्टेज स्ट्रैटजिक कन्सल्टिंग की कमाई में बढ़ोत्तरी की हुई जो दोनों के डील होने जाने के एवज में दिया गया धन ही हो सकता है। आप उसे कंसल्टिंग के नाम पर लीजिए या फिर किसी तरह इसमें राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल साफ दिखता है। इस तरह देखें तो दोनों पिता-पुत्र घिर रहे हैं और इनको घिरना भी चाहिए। आखिर एक ओर देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर अपना घर भरने का पाप है तो दूसरी ओर राजनीतिक प्रतिशोध के लिए देश की सुरक्षा के साथ समझौता करने का अपराध।