फुटबॉल के बाद क्रिकेट ही ऐसा खेल है जो विश्व में दिन ब दिन अधिक लोकप्रिय होता जा रहा है। इसका कारण क्रिकेट में बेहतरीन बल्लेबाजी, गेंदबाजी, क्षेत्ररक्षण और विकेट कीपिंग का रोमांच है। टेस्ट और वन डे क्रिकेट मैचों ने लोगों के बीच खूब लोकप्रियता बटोरी। इसके बाद क्रिकेट प्रेमियों में धुआंधार क्रिकेट की इच्छा जगी और शुरू हुआ टी-20 मैचों का दौर! समयाभाव के दौर में शुरू हुए इस झटपट क्रिकेट ने हुनरमंद और शक्तिशाली बल्लेबाजों को अच्छा मंच प्रदान किया है।

माना जाता है कि सोलहवीं शताब्दी में क्रिकेट शुरू हुआ, परन्तु पहला अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट 18वीं शताब्दी में खेला गया। 19वीं शताब्दी में क्रिकेट का रंग दुनिया में छाने लगा था, लेकिन क्रिकेट का रोमांच 19वीं शताब्दी के अंतिम 3 दशकों में ज्यादा बढ़ने लगा जब 1975 को अन्तराष्ट्रीय विश्वकप क्रिकेट आयोजन किया गया। क्रिकेट में रोमांच को बढ़ानेवालों में दुनिया के अनेक देशों के खिलाड़ियों ने योगदान दिया है, जिसमें सर डॉन ब्रेडमैन (ऑस्ट्रेलिया), सर विवियन रिचर्ड्स (वेस्ट इंडीज), सर रिचर्ड हेडली (न्यूजीलैंड), सर गैरी सोबर्स (वेस्ट इंडीज), कार्ल हूपर (वेस्ट इंडीज), कर्टनी हैब्रोस (वेस्ट इंडीज), कपिल देव (भारत), सुनील गावस्कर (भारत), फारूक इंजिनियर (भारत), दिलीप वेंगसरकर (भारत), इमरान खान (पाकिस्तान), जावेद मियांदाद (पाकिस्तान), ब्रायन लारा (वेस्ट इंडीज), सचिन तेंदुलकर (भारत), शेन वार्न (ऑस्ट्रेलिया), वसिम अकरम (पाकिस्तान), मुथैया मुरलीधरन (श्रीलंका), सनथ जयसूर्या (श्रीलंका) आदि क्रिकेटरों का नाम उल्लेखनीय है।

क्रिकेट के रोमांच में भारत का योगदान   

19वीं शताब्दी से अबतक क्रिकेट इतिहास में नजर डालें तो क्रिकेट के प्रति लोगों की रूचि बढ़ाने में भारत का बहुत बड़ा योगदान है। तकनीक के मास्टर खिलाड़ी सुनील गावस्कर, श्रेष्ठ गेंदबाज और आलराउंडर कपिल देव तथा क्रिकेट के भगवान के नाम से जग विख्यात मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर क्रिकेट जगत के लिए वरदान साबित हुए हैं। भारतीय क्रिकेट के वर्तमान नायक के रूप में विराट कोहली का डंका सारे विश्व में बज रहा है। इन खिलाड़ियों के बेहतरीन खेल के कारण भारत में क्रिकेट के प्रति लोगों की रूचि दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। इसलिए भारत में होनेवाले मैचों में पूरा स्टेडियम खचाखच भरा रहता है और घर, ऑफिस, दुकान हर तरफ लोग जहां भी हो इस खेल का भरपूर लुफ्त उठाते हैं।  

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) शुरू कर दुनिया के धाकड़ बल्लेबाजों और श्रेष्ठ गेंदबाजों को अवसर दिया। भारत में शुरू हुए इस आईपीएल के आयोजनों ने क्रिकेट के खुमार को और बढ़ा दिया। आज दुनिया के खिलाड़ी भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता के चलते अपने चयन को अपना भाग्य मानते हैं, क्योंकि आईपीएल में खिलाड़ियों का चयन, उनका प्रदर्शन उनके देश की टीम में जगह पक्का कराने के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है और यह उस खिलाड़ी की लोकप्रियता के साथ उसके धनार्जन का महत्वपूर्ण साधन भी होता है।        

अब नो बॉल भी बढ़ाता है रोमांच  

भारतीय क्रिकेट टीम दुनिया की बेहतरीन क्रिकेट टीमों में से एक है। 1983 और 2011 में विश्वकप जीतनेवाली भारतीय टीम ने 2007 में पहले टी-20 विश्वकप का ख़िताब अपने नाम किया है। खेल में हार-जीत चलती रहती है। क्रिकेट प्रेमियों द्वारा अपनी टीम की जीत पर ख़ुशी मनाना और हार पर मलाल जाहिर करना भी स्वाभाविक है। हाल ही में 31 मार्च हो हुए भारत-वेस्ट इंडीज टी-20 के सेमीफाइनल में भारत को हार का सामना करना पड़ा। इस मैच में आर. अश्विन और हार्दिक पंड्या द्वारा डाले गए दोनों नो बॉल में विकेट गए थे, पर नो बॉल के चलते भारत को इसका लाभ नहीं मिल सका। विश्लेषकों और खुद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी टीम की हार में इन 2 गेंदों को मुख्य कारण माना है। इस तरह की नो बॉल की गलतियां और इसके बदले विपक्षी टीम को मिलनेवाले 1 और गेंद व फ्री हित का मौका क्रिकेट को रोमांच प्रदान करते हैं। जो मौके को चौकों और छक्कों में भुनाए या फील्डिंग वाली टीम फील्डिंग से बल्लेबाज को रनआउट करे, सफलता उनकी ओर दौड़ती है। यही इस मैच में हुआ। वेस्टइंडीज की जीत के हीरो रहे लेंडल सिमंस 2 बार कैच आउट हुए पर नो बॉल ने उसे जीवनदान दिया और इस अवसर को भुनाते हुए उसने वेस्ट इंडीज को जीत दिलाया। इसके साथ भारतीय टीम टी-20 विश्वकप के ख़िताब से बाहर हो गई और अब उसे भावी टूर्नामेंट की तैयारी में लगना है। 

भारतीय टीम की ओपनिंग जोड़ी  

इस दौर में भारतीय क्रिकेट टीम बेहतर खेल का प्रदर्शन कर रही है, चूंकि इसमें कुछ कमी दिखाई देती है। पहले सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर भारतीय पारी की शुरुवात करते थे, इसके बाद सचिन के साथ विरेन्द्र सहवाग ओपनिंग बैटिंग करते थे। यह दुनिया की खतरनाक ओपनिंग जोड़ी मानी जाती थी, बड़े से बड़ा गेंदबाज इस जोड़ी के सामने नहीं टिकते थे। अब भारतीय पारी की शुरुवात रोहित शर्मा और शिखर धवन करते हैं, जो कभी चलता है कभी नहीं। इसमें नियमितता जरुरी है।

नंबर 3 का कमाल जारी  

भारतीय टीम में पहले नम्बर 3 पर बल्लेबाजी कर ‘दि-वाल’ के नाम से ख्यात राहुल द्रविड़ ने छाप छोड़ी, वहीं वीवीएस लक्ष्मण ने भी मध्यक्रम में अपने बल्लेबाजी का लोहा मनवाया था। अब विराट कोहली तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने आते हैं और वे इस क्रम में खेलनेवाले दुनिया के सबसे श्रेष्ठ बल्लेबाज हैं, यह उन्होंने अबतक साबित कर दिखाया है। 4 और 5 वे नंबर पर कभी सुरेश रैना, कभी युवराज सिंह या कभी अजिंक्य रहाणे आते हैं। इसके बाद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी बैटिंग करते हैं। क्रिकेट के मध्यक्रम बल्लेबाजी में चौथे और पांचवे क्रम का स्थान बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पर इस स्थान पर कौन बल्लेबाजी करेगा यह पक्का नहीं रहता है। इस दृष्टि से चार और पांच क्रमांक पर निश्चित खिलाड़ी रखना जरुरी है, तभी वह खिलाड़ी टीम में अपनी निश्चित भूमिका ठीक तरह निभा सकेगा।

नम्बर 4 और 5 क्रम को बनाएं मजबूत
सारी दुनिया युवराज सिंह और धोनी के विस्फोटक बल्लेबाजी से परिचित हैं और वे परिस्थिति के अनुरूप खेल सकने में सक्षम हैं, जबकि सुरेश रैना जरुरत के समय पार्टनरशिप करने में सफल नहीं हो पाते। बल्लेबाजी करते समय रैना की भूमिका पार्टनरशिप बनाने की जगह ताबड़तोड़ बल्लेबाजी की दिखाई देती है। पार्टनरशिप करने के लिए रूककर खेलना रैना के स्वभाव के विपरीत है। इसलिए क्रिकेटप्रेमियों का मानना है कि युवराज सिंह और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को नम्बर 4 और 5 पर बल्लेबाजी करनी चाहिए, ताकि मध्यक्रम मजबूत हो। इसके बाद रैना, रविन्द्र जडेजा, आर.अश्विन या हरभजन सिंह बल्लेबाजी करते हैं तो निचले क्रम को मजबूती मिलेगी।    

तेज गेंदबाज को मिले अनुभवी गेंदबाजों का साथ  

गेंदबाजी में कपिल देव, जवागल श्रीनाथ, वेंकटेश प्रसाद और अनिल कुंबले जैसे दिग्गजों का दौर समाप्त हो गया है। तेज गेंदबाज जाहिर खान संन्यास ले चुके हैं और भारतीय टीम में अब आशीष नेहरा और हरभजन सिंह सर्वाधिक अनुभवी गेंदबाज हैं। नए गेंदबाजों को समय रहते उनके अनुभवों का लाभ मिल सकता है। आर. अश्विन ने अपने स्पिन गेंदबाजी का लोहा मनवाया है, वहीं जसप्रीत बुमरा ने योर्कर और स्विंग गेंदबाजी करने में प्रशंसा बटोरी है। भारत को अच्छे तेज गेंदबाजों की जरुरत है।  

ऐसा नहीं कि सवा सौ करोड़ जनसंख्यावाले देश में खिलाड़ियों की कमी है। भारत की घरेलु क्रिकेट प्रतियोगिता, - रणजी ट्रॉफी, दिलीप ट्रॉफी, ईरानी ट्रॉफी और देवधर ट्रॉफी में बेहतर प्रदर्शन करनेवाले खिलाड़ियों का चयन भारतीय टीम के लिए किया जाता है। खिलाड़ियों का चयन, चयन के बाद उनके मेहनत और अभ्यास पर ही उम्मीद टिकी है। भारतीय टीम धोनी के नेतृत्व में अबतक अच्छा प्रदर्शन करती आई है। भारतीय क्रिकेट प्रेमियों का उन्हें भरपूर समर्थन मिलता है। कामना करते हैं कि भारत को अच्छे गेंदबाज मिले, भारत की पूरी टीम हर फोर्मेट में अच्छा खेले और अपने श्रेष्ठ प्रदर्शन से विश्व पटल पर देश की कीर्ति बढ़ाए।