अभिनेता सलमान खान द्वारा दिए गए एक बयान पर आजकल देशभर में काफी बवाल मचा हुआ है ऐसा नहीं है कि पहली बार किसी शख्सियत की ओर से महिलाओं के विषय में कुछ आपत्तिजनक कहा गया हो। इससे पूर्व चाहे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालूप्रसाद यादव हों जो बिहार की सड़कों की तुलना हेमा मालिनी के गालों से करते हों, चाहे मध्य प्रदेश के तत्कालीन गृहमंत्री बाबू लाल गौर जो भरी सभा में कहते हों कि वे महिलाओं को धोती  बांधना तो नहीं किन्तु धोती खोलना सिखा सकते हैं। चाहे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस काटजू हों जो कहते हैं कि रेप महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है यह तो होता रहता है और होता रहेगा। चाहे उत्तर प्रदेश के नेता बाबू आजमी हों या कोई और ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं कि अगर सभी के बारे में लिखा जाए तो शायद कुछ और लिखना शेष नहीं रह जाएगा।

जब-जब ऐसे बयान आते हैं कुछ दिन हो हल्ला मचता है, बयानबाजी होती है। सम्बन्धित पक्ष की ओर से माफीनामा आता है, और कुछ दिन के बाद खबरों के भूखे लोगों द्वारा ऐसी ही किसी नई खबर की तलाश शुरू हो जाती है। इस समय सलमान खान द्वारा एक वेबसाइट को दिए साक्षात्कार चर्चा में है। सलमान अपनी आनेवाली फिल्म सुल्तान के लिए अपने द्वारा की गई मेहनत पर बात कर रहे थे। सलमान से पूछा गया कि 'सुल्तान' के कुश्तीवाले दृश्यों की शूटिंग करना किस हद तक मुश्किल था? जवाब में सलमान ने कहा, “उन छह घंटों की शूटिंग के दौरान बहुत ज्यादा उठा-पटक हुई, जो अविश्वसनीय थी। मैं 120 किलोग्राम के व्यक्ति को उठा रहा था और नीचे पटक रहा था। मुझे ऐसा 10 बार करना पड़ा था।” उन्होंने कहा, “मैंने यह अलग-अलग एंगल से 10 बार किया, तो इस तरह छह-साढ़े छह या सात घंटे लगे...यह बहुत मुश्किल था।" सलमान ने कहा, “मैं जब चलकर अखाड़े से बाहर आता, तो असल में दुष्कर्म की शिकार महिला के जैसा महसूस होता था। यह बेहद मुश्किल था। मैं कदम आगे नहीं बढ़ा सकता था। मैं खाना खाता और उसके बाद सीधे वजन उठाने की ट्रेनिंग के लिए चला जाता।”

हैरत की बात यह है कि मीडिया द्वारा जो ओडियो क्लिप सुनाई जा रही है उसमें सलमान के वक्तव्य के बाद वहां मौजूद पत्रकारों की हंसने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। उस समय मौजूद किसी भी पत्रकार द्वारा इस वक्तव्य की आलोचना नहीं की गई, शायद उन्हें इसमें कुछ गलत नहीं लगा तो फिर उन्हीं के द्वारा बाद में इसे उछाला क्यों गया? अगर वे वाकई में महिलाओं की भावनाओं के प्रति जागरूक थे और उन्हें बुरा लगा तो वे उसी समय सलमान को उनकी गलती का एहसास कराकर बात को खत्म कर देते, न कि उसे खबर बनाकर पूरे देश की महिलाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते। मीडिया के इस कृत्य ने ऐसी अनेक पीड़ितों के नासूरों को पुन: जीवित कर दिया है।

सलमान ने जो कहा वो तो बिना सोचे समझे कहा और इसकी कीमत भी चुका रहे हैं किन्तु मीडिया ने जो किया क्या वो भी बिना सोचे समझे या फिर सोच समझकर? लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि सलमान ने जो कहा सही कहा!

सलमान द्वारा यह कहना कि वे जब प्रैक्टिस करके रिंग से बाहर निकलते थे तो उन्हें एक रेप पीड़िता की तरह महसूस होता था। यह कथन वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है। सलमान ने शूटिंग के दौरान जो पसीना बहाया था, उसका बखान करते हुए कुछ ज्यादा ही बोल गए। शायद वे यह भूल गए कि वे अपने द्वारा भोगे गए शारीरिक कष्ट की तुलना जिस कष्ट से कर रहे हैं। बलात्कार केवल शारीरिक नहीं होता। बलात्कार एक महिला के शरीर का ही नहीं, वरन उसके मान-सम्मान, उसके मन, उसके व्यक्तित्व, स्वयं को एक मनुष्य समझनेवाला उसके अंतःकरण, इन सभी का होता है। सलमान यह भूल गए कि इस मेहनत और उससे मिलने वाले कष्ट को, उन्होंने स्वयं चुना था उनपर वह थोपा नहीं गया था। जबकि बलात्कार महिला पर जबरन होता है, कोई भी महिला किसी भी परिस्थिति में इसे चुनती नहीं है। वे यह भूल गए कि उनके द्वारा की गई इस मेहनत ने उस किरदार को जीवित कर दिया जिसे वह परदे पर निभा रहे हैं, लेकिन बलात्कार उस महिला को जीते जी मार डालता है, और वह महिला अपना शेष जीवन एक जिंदा लाश की तरह बिताती है। हमारा देश अभी उस नर्स अरुणा शानबाग को भूला नहीं है जो बलात्कार के कारण 42 साल तक कोमा में चली गईं थीं और 66 साल की उम्र में कोमा में ही इस दुनिया से बिदा हो गईं।

वे यह भूल गए कि उनके द्वारा एक "रेप पीड़िता" के बराबर झेले गए कष्ट से उन्हें नाम शोहरत पैसा तालियां तारीफ सब मिलेगी, उनकी फैन फौलोइंग बढ़ेगी, लेकिन एक रेप पीड़िता को मिलती है बदनामी। उसे समाज में मुंह छिपाकर घूमना पड़ता है और न्याय पाने की आस में उसकी सारी जमा पूंजी खत्म हो जाती है, फिर भी न्याय नहीं मिल पाता (निर्भया को ही देख लें)। वे यह भूल गए कि उनकी शारीरिक मेहनत से ऊपजी उनकी पीड़ा एक दिन के आराम से या किसी पेनकिलर (दर्दनाशक दवा) से कम हो जाएगी, लेकिन रेप पीड़िता का जख्म और दर्द दोनों जीवनभर के नासूर बन जाते हैं। शरीर के घाव भर भी जाएं पर मन और अंतरात्मा तो छलनी हो ही जाते हैं। कहते हैं कि समय के साथ सारे घाव भर जाते हैं लेकिन शायद यह ही एक घाव होता है जिसका इलाज तो समय के पास भी नहीं होता। सलमान यह भूल गए कि कई बलात्कार पीड़िता तो आत्महत्या तक कर लेती हैं, क्या उन्हें रिंग से बाहर आने के बाद अपनी पीड़ा के कारण कभी आत्महत्या करने का विचार आया था? वे भूल गए कि बलात्कार तो महिला का होता है लेकिन उसके दंश से ऊपजी पीड़ा को उसका पूरा परिवार भोगता है। क्या सलमान के रिंग से बाहर आने के बाद उनके दर्द से उनका परिवार भी कराहता था?  

यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं, सलमान साहब क्योंकि आप आज के यूथ आइकान हैं। आपकी जबरदस्त फैन फौलोइंग है। आप से आज का युवा प्रोत्साहित होता है। आप सफलता के चरम पर हैं। सफलता के साथ उसका नशा भी आता है और उससे जिम्मेदारी भी उपजती है। यह सफलता प्राप्त करनेवाले पर निर्भर करता है कि वह इसके नशे में चूर होता है या फिर उससे मिलनेवाली जिम्मेदारी के अहसास से अपने व्यक्तिगत में और निखार लाता है।

देश के प्रति अपने फर्ज को निभाने के लिए आवश्यक नहीं कि सीमा पर जाकर खून ही बहाया जाए। हम सब जहां भी हैं जिस क्षेत्र में भी हैं उसी जगह से देशहित में आचरण करना भी देश सेवा होती है। जिस देश ने सलमान को सिर-आँखों पर बैठाया, उस देश के युवाओं पर उनके आचरण का क्या असर होगा। अगर वो इतना ही ध्यान में रखकर देश के युवाओं के सामने एक उचित एवं अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करें, तो यह भी एक तरह की देश सेवा ही होगी।