बेतुलमुक़दस/यरूसलम : यहूदी, ईसाई और मुसलमानों के लिए पवित्र एवं उनके मजहब में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। बेतुलमुक़दस मुसलमानों का पहला काबा और पैगंबर हजरत मोहम्मद स:अ. का सभी पैगम्बरों की इमामत करने और मेराज़ पर रवाना होने की पाक जगह है।

हिजरी सन् 16 - खलिफा उमर फारूक के नेतृत्व में बेतुलमुकदस पर मुसलमानों का कब्जा।

हिजरी सन 478 - ईसाईयों ने मुसलमानों से जीता-करीब 70,000 मुसलमानों का कत्ले आम।

हिजरी सन् 583-सुल्तान सलाउद्दीन अयूबी, द्वारा आक्रमण - लंबी लडाई के बाद मुसलमानों का कब्जा में।

पूरे यूरोप में कोहराम। इस सदमें से कुछ समय पश्चात् पोप अरबन सालिस की मृत्यु। सून के बिशप का यूरोप भ्रमण। ईसाई धर्म की क्षति एवं मुसलमानों द्वारा ईसाई धर्मावलियों की प्रताड़ना एवं ईसा मसीह के कथित मजार को अपवित्र करने का प्रचार/प्रसार करके ईसाई यूरोप को एक किया गया। यूरोप की बड़ी कौंसिल बुलाई गई जिसमें यूरोप के सभी बादशाह, नाईट्स, जागीरदार एवं बिशप इकट्ठे हुए। फ्रांस और इंग्लैण्ड में चली आ रही लंबी लड़ाई समाप्त। दोनों बादशाह गले मिले और बेतुलमुकदस को मुसलमानों से मुक्त कराने के लिए सलीब उठाकर शपथ ली। इसके पश्चात् सभी बादशाहों नाईट्स एवं लडाकों ने सलीब उठाकर शपथ ली। जो व्यक्ति लड़ाई में नहीं गया उससे उसकी कुल आमदनी का 10 प्रतिशत सलीबी जंग का खर्चा लिया गया। जिसका नाम उथ्रे सलाउदीन (सलाउदीन टैक्स) रखा गया।

सभी चर्च के बाहर दानपत्र रखवाएं गए। यह थी तीसरी सलीबी जंग।

पवित्र युद्ध क्रूसेड (ब्तनेंक) जो फ्रेंच शब्द ब्वतेपकम का अपभ्रंश है। जिसे अरबों ने सलीबी जंग का नाम दिया। इंग्लैण्ड के बादशाह रिचर्ड ने इस युद्ध की तैयारी के लिए अपनी खास जागीरें बेच दी और खास औहदे नीलाम कर दिए। रिचर्ड ने यहां तक कह दिया कि वे लंदन को भी बेचने को तैयार है यदि कोई खरीद सके।  (अज़ तारीख मिचार्ड-पेज: 441-442)

चर्च का फतवा - जो कोई पवित्र युद्ध में दुश्मन को अधिक से अधिक क्षति पहुचाएंगा परमपिता उसके गुनाह माफ कर देगा। इंग्लैण्ड का बादशाह रिचर्ड (लॉयन हार्ट/शेर दिल), फ्रांस का बादशाह फिलिप्स तथा जर्मनी का बादशाह फेड्रिक बार बरोसा, रोम साम्राज्य, वीनस, ईटली जिनेवा तथा अन्य यूरोप के साम्राज्यों की संयुक्त सेना का बेतुलमुकदस पर आक्रमण।

तीसरी सलीबी जंग जो लगभग 4 साल तक चली जिसका अंत हिजरी सन् 588 में दोनों पक्षों में समझौते से हुआ। समझौते के अनुसार यरूशलम (बेतुलमुकदस) में ईसाईयों को आने की इजाजत मिली। केवल दो शहर सर और उक्का इसाई जीत सकें। इस युद्ध में लगभग 5 लाख से अधिक व्यक्तियों के प्राण लिए।   

सलीबी जंग के दो उद्देश्य थे। प्रथम - बेतुलमुक़दस तथा यरूशलम को मुसलमानों से मुक्त करवाना तथा दूसरा - 7वीं व 8वीं सदी में मुसलमानों द्वारा जीते गए देश/भू भाग मिस्त्र, ईराक, उत्तरी अफ्रिका, एशिया माइनर (टर्की) तथा स्पेन (दक्षिणी यूरोप) आदि को मुस्लिम आधिपत्य से खाली करना एवं इस्लाम को रोकना।

सलीबी जंगों का यह सिलसिला सन् 1095 में पोप अरबन द्वितीय की अपील से शुरू होकर लगभग 200 साल (1095-1291) तक चला। इन युद्धों ने लगभग 1.7 मिलियन प्राणों की बलि ली। इन युद्धों की भयंकरता इस तथ्य से मालूम होती है। 20 में से केवल 1 लड़ाका ही पवित्र भूमि तक पहुंच सका।समय के साथ मुस्लिम देश ज्ञान-विज्ञान/टेक्नोलोजी में पिछडते गए तथा यूरोप के इसाई देश संसार की महाशक्तियां बन गई।

वर्तमान स्वरूप

दिसम्बर 1979 - सोवियत यूनियन की सेना का अफगानिस्तान में प्रवेश/आधिपत्य।

अमेरिका, यूरोपीय देश और मुस्लिम देशों द्वारा यमन निवासी अरब मूल के कट्टरपंथी इंजीनियर ओसामा बिन लादेन के नेतृत्व में अलकायदा मुजाहीद्दीन संगठन द्वारा जिहाद । मुजाहिद तैयार करने के लिए सैकडों मदरसों की स्थापना मजहब की आड में मुजाहिदों की सेना तैयार, नास्तिक सोवियत सेना के विरूद्ध युद्ध। पश्चिमी/अरब देशों द्वारा असिमित सैनिक साज सामान तथा असिमित आर्थिक सहायता। लगभग 9 साल - 1978 से 1989 तक चले इस युद्ध ने 25000 सोवियत सैनिक, 2 लाख अफगान मुजाहिदीन मारे गए तथा लगभग 10 लाख अफगान नागरिक शरणार्थी होकर पाकिस्तान एवं कुछ ईरान में विस्थापित। इस युद्ध में सोवियत सेना की पराजय एवं जिहाद की विजय।

जिहाद - मुस्लिम जगत के हाथ में ब्रह्मास्त्र

02.08.1990 ईराक का कुवैत पर आक्रमण

28.02.1991-02.08.1991 ऑपरेशन डेजर्ट स्ट्रॉम-अमेरिका तथा मित्र राष्ट्रों द्वारा ईराक के आधिपत्य के विरुद्ध आक्रमण। मित्र राष्ट्रों को 292 तथा ईराक के लगभग सात हजार सैनिक मारे गये, 3,700 टैंक तथा 2600 बख्तरबन्द गाडियाँ, 137 वायुयान तथा 19 समुद्री जहांज नष्ट। कुवैत की आजादी-इस युद्ध में मित्र राष्ट्रों द्वारा 60 बिलियन डालर का व्यय, अधिकांष भाग का भुगतान कुवैत एवं सऊदी अरब द्वारा।

दिसम्बर वर्ष 1991 - सोवियत संघ के विघटन के साथ ही संपूर्ण विश्व मुख्यतया दो भागों में बंट गया। एक लोकतांत्रिक देश तथा दूसरा रूढ़िवादी देश दूसरे शब्दों में मुस्लिम एवं गैर मुस्लिम देश। 

11.09.2001 - अमेरिका द्वारा अरब राष्ट्र ईराक पर हमले से अफगानिस्तान का विजेता ओसामा बिन लादेन आहत, ओसामा बिन लादेन द्वारा ‘यहूदी‘ एवं ईसाईयों के विरुद्ध क्रूसेड (सलीबी जंग), का ऐलान 9/11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, न्यूयॉर्क, पेंटागन मुख्यालय, राष्ट्रपति भवन व्हाईट हाऊस तथा पेंनसिलवेनिया के परमाणु संयत्र पर यात्री वायुयानों को हाईजैक कर हमला। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में 2996 निर्दोष अमेरिकी नागरिकों की हत्या, करीब 4500 घायल।

वर्ल्ड ट्रैड सेन्टर पर मलबा हटाने के बाद स्टील का एक फ्रेम खड़ा रहा जो कि क्रॉस (सलीब) के आकार का था (कृपया चित्र देखें)।

‘‘A perfect cross was left from one of twin towers on ground zero.’’

- Eris Lambs

ओसामा ने दानव को फिर जगा दिया। ओसामा यह भूल गया कि दिसम्बर 1941 में पर्ल हार्बर पर जापानी वायुसेना द्वारा मारे गये 2140 अमेरिकी (लगभग 1400) का बदला 6 अगस्त 1945 को हिरोषिमा पर परमाणु बम (लीटिल बॉय) तथा 9 अगस्त 1945 को नागासाकी पर परमाणु बम (फैट बॉय) गिराकर 1 लाख 29 हजार से अधिक निर्दोष जापानियों को बम के धमाको के साथ जिंदा जलाकर तथा इससे दुगुने जापानियों को अपंग अपाहिज बनाकर लिया गया था। तथा आने वाले 50 सालों तक जापानी – वंश को विकलांगता दे दी। वह यूरोपियन द्वारा अमेरिका में रेड इंडियन्स तथा आस्ट्रेलिया के सामूहिक नरसंहार को भी भूल गया। 

26.09.2001 - वर्ल्ड ट्रैड सेन्टर पर हमले के ठीक 15 दिन बाद अमेरिका तथा मित्र राष्ट्रों का अफगानिस्तान पर हमला, ओसामा बिन लादेन भूमिगत। रूस के विरुद्ध अमेरिका तथा मित्र राष्ट्रों से मिली सैनिक सहायता तथा असीमित आर्थिक सहायता तथा अफगानिस्तान में अफीम/हेरोइन तथा बेषकीमती खनिज से प्राप्त धनराशि तथा मजहब की आड़ में ओसामा बिन लादेन द्वारा अमेरिका तथा मित्र राष्ट्रों द्वारा छापामार युद्ध (जिहाद) जारी, गुप्त सूचनाओं के अनुसार अमेरिका को यह विश्वास बना की इन सबके पीछे ओसामा बिन लादेन व उसके सहायक, ईराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन का हाथ है।

2003 - ईराक द्वारा सामूहिक विनाश के हथियारों का संग्रह के बहाने मित्र राष्ट्रों का हमला, शिया सरकार की स्थापना, अपदस्थ राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को सन् 2005 में फाँसी, लीबिया के राष्ट्रपति कर्नल गद्दाफी का तख्ता पलट तथा सन् 2011 में हत्या। सद्दाम के भगौडे सुन्नी सैनिकों द्वारा अल-कायदा से सांठ-गांठ करके उग्रवादी संगठन इस्लामिक स्टेट की स्थापना। सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद को अपदस्थ करने के लिए हमला। ईरान एवं रूस का असद को समर्थन इस्लामिक स्टेट द्वारा जहरीली गैस से दमिष्क में 400 बच्चों की हत्या। ईराक एवं सीरिया के 60 प्रतिशत भू-भाग पर इस्लामिक स्टेट का कब्जा। इस्लामिक स्टेट के मुखिया अबू बकर अल बगदादी द्वारा ईस्लामिक खलीफत की घोषणा एवं स्वयं को मुस्लिम जगत का खलीफा घोषित करना। जहां-जहां कभी भी मुसलमान बादशाह की हुकुमत रही। वह सभी भू-भाग ईस्लामिक जगत घोषित। सन् 2012 में अमेरिकी व मित्र राष्ट्रों की सैनाओं का ईराक से पलायन।

28.12.2011 को ईराक से अमेरिकी सेना की वापसी।

Physician for Social Responsibility का आंकलन - 9/11 के हमले के बाद 10 वर्ष बाद की अवधि में आतंक विरोधी कार्रवाई में 1.3 से 2 मिलियन ईराकी, अफगानी एवं पाकिस्तानी नागरिकों मारे जा चुके थे तथा लगभग 6 करोड़ विस्थापित।

ईराक एवं सीरिया में शिया, सुन्नी, कुर्द तथा यजीदी समुदाय के बीच गृह युद्ध। सीरिया एवं ईराक में 1000 से अधिक आतंकी संगठन अलग- अलग उद्देश्य की प्राप्ति हेतु संघर्षरत।

लीबिया - पेट्रोलियम की अपार उत्पादन के कारण उत्तरी अफ्रिका का धनी देश प्रति व्यक्ति आमदनी 11000 डॉलर। तानाशाह मोम्मर गद्दाफी (1969-2011) - गृह युद्ध, संयुक्त राष्ट्र संघ की सेनाओं द्वारा बमबारी। गद्दाफी का तख्ता पलट 20 अक्टूबर 2011 को गद्दाफी की हत्या। तब से लगातार गृह युद्ध चल रहा है। जिसमें सरकारी सैनिक गुटों के अतिरिक्त इस्लामिक स्टेट (लीबिया ब्रांच) अल कायदा, लीबिया शील्ड, अल नुसरा के साथ साथ फ्रांस, इंग्लैण्ड तथा अमेरिका के स्पेषल फोर्स के दस्ते शामिल। लीबिया के राजस्व में 90 प्रतिशत की गिरावट। लीबिया की 1/3 जनसंख्या का पडौस के देश ट्यूनिशिया आदि में शरण।

05.02.2011 - सीआईए तथा अमेरिकी नेवी सील कमाण्डो द्वारा चलाया गया ऑपरेशन Neptune Spear. इस्लामाबाद के पास एटताबाद में स्थित हवेली में ओसामा बिन लादेन की मृत्यु।

गाजा - 1967 में 6 दिन के युद्ध में ईराजइल द्वारा मिस्त्र से जीता गया 40 मीलग 70 मील का भू भाग - तीन तरफ से ईराजइल तथा एक तरफ भूमध्य सागर से घिरा हुआ। खुली जेल के नाम से विख्यात है। चरमपंथी संगठन हम्मास द्वारा सत्ता में आने के बाद भूमिगत सुरंगों का निर्माण, कोरिया से रॉकेट की खरीदारी। जुलाई 2014 में पाक माह रमजान में 3 ईराजइली युवकों की हत्या के बाद ईजराइल का गाजा पर आक्रमण - 10000 फिलीस्तीनी हताहत। लगभग 2450 की मृत्यु। 20 प्रतिशत आवासीय मकान क्षतिग्रस्त। 15 प्रतिशत फिलीस्तीनीयों का पलायन। ईजराइल के 67 सैनिक तथा 3 नागरिक हताहत। मस्जिदें एवं स्कूल क्षतिग्रस्त।

ईराक, सीरिया एवं यमन आदि में संघर्षरत कथित जिहादी संगठनों में से एक भी जिहादी गाजा में निहत्थे फिलिस्तिनीयों की मदद के लिए नही पहुंचा। 

युद्धरत ईराक, सीरिया और यमन से एक भी जिहादी गाजा के निहत्थे नागरिकों पर ईराजइली सेना का एक तरफा आक्रमण के विरूद्ध जिहाद के लिए सामने नही आया।

नाईजीरिया - मुस्लिम बाहुल अफ्रिकी देश नाईजीरिया में उग्रवादी संगठन ‘‘बोको हराम‘‘ (बोको -पाष्चात्य शिक्षा, तथा हराम - निषेध) पश्चिमी शिक्षा का विरोध करने वाले इस उग्रवादी संगठन द्वारा दिनांक 14.04.2014 को 243 स्कूल में पढने वाली लडकियों का अपहरण कर लिया जो आज तक लापता है। नाईजीरिया के गृह युद्ध में प्रतिवर्ष लगभग 4 से 4.5 हजार व्यक्ति अपनी जान गंवा रहे है।

म्यामांर - बंगाल की खाडी के तट पर स्थित म्यामांर में बसे रोहिग्या मुसलमानों के विरूद्ध हिंसा। संयुक्त राष्ट्र के विस्थापन विभाग के सूचना के अनुसार सन् 2015  की पहली तिमाही में लगभग 25000 रोहिग्या मुसलमान तस्करों की नाव में बैठकर थाईलेंड व इंडोनेशिया भागने पर मजबूर। केवल 40 प्रतिशत तट पर पहुचने में सफल। लगभग 1100 रोहिग्या मुसलमान भारत पहुचने में सफल। 

यमन - राष्ट्रपति हादी (सुन्नी मुसलमान) की सरकार के विरूद्ध बगावत। हादी ने भागकर सऊदी अरब में शरण ली। यमन पर शिया मलेशिया का कब्जा। सउदी अरब की वायुसेना के 100 F-16 आधुनिक हवाई जहांजों द्वारा हमला।

ईरान द्वारा यमन का समर्थन, छापामार युद्ध जारी

संयुक्त राष्ट्रसंघ एंव बॉडी काउंट प्रोजेक्ट के अनुसार सन् 2015 तक ईराक एवं सीरिया में हिंसात्मक संघर्ष (गृह युद्ध) में 15 लाख से अधिक मौते तथा 6 करोड से अधिक व्यक्ति बेघर।

सूडान - मुस्लिम उग्रवादी/आतंकवादी संगठन अल-शबाब सक्रिय - जहांजरानी का अपहरण एवं फिरोती वसूल करना मुख्य कार्य। कैन्या में यूनिवर्सिटी के 147 विद्याार्थियों की हत्या। वर्तमान में दक्षिण सूडान में गृह युद्ध जारी। लगभग 7500 नागरिकों की मृत्यु। सूडान की 1/4 नागरिक विदेशों में शरण लेने के लिए विवष।

अमेरिका, इंग्लैण्ड, फ्रांस जर्मनी तथा रूस। महाशक्तिशाली देश इस विनाशकारी युद्ध को आकाश/अंतरिक्ष से, लडाकू हवाई जहांज, ड्रोन तथा सेटेलाईट से नियंत्रित कर रहे है। ये देश जिस स्थान पर चाहते है अपनी ईच्छा से बम, ड्रोन, रॉकेट या कू्रज मिसाईल से आसानी से हमला कर देते है। इन देशों के वैज्ञानिक इस युद्ध को विडियो गेम का नाम भी दे चुके है। क्योंकि हजारों मील दूर बैठा हुआ ऑपरेटर उपग्रह से चित्र प्राप्त करके भूमध्य सागर में खडे विमान वाहक पोत को बमबारी करने या कू्रज मिसाईल फायर करने का आदेश देता है तथा छोडे गए मिसाईल / रॉकेट को उपग्रह की सहायता से चिन्हित स्थान पर गिरा देता है। इस युद्ध के फलस्वरूप ईराक, सीरिया यमन तथा लीबिया पाषण युग (स्टोन एज) में पहुच गए है। अफगानिस्तान पहले ही खण्डहर में परिवर्तित हो चुका है।

मस्तिष्क नियंत्रण - कुछ समय पहले सैन्य एवं रक्षा से संबंधित एक शोध पत्रिका में यह समाचार प्रकाशित हुआ था कि महाशक्तियां नरसंहार हथियारों के साथ साथ मानव मस्तिष्क को नियंत्रित करने की तकनीक पर शोध कर रहे है ताकि हथियारों के उपयोग के बगैर ही मानव मस्तिष्क पर नियंत्रण करके, इच्छानुसार कार्य करवाएं जा सके। वर्तमान में अफ्रिका महाद्धीप से लेकर सुदूर पूर्व में चल रहा आतंक/आतंकवादी गतिविधियों जिसमें मुसलमान अपने हाथों से अपने ही भाईयों को ख़ुशी ख़ुशी कत्ल कर रहा है, का वृहद अवलोकन करने से यह विश्वास हो जाता है कि महाशक्तियां मानवीय मस्तिष्क को नियंत्रित करने के शोध में सफल हो गई है।

दिनांक 23 जुलाई 2016 को मक्का मुअज्जम के ग्रेण्ड इमाम अजीज शेख जिन्हे 1999 में किंग फहद ने पदस्थापित किया था एक बयान में कहां है कि अबू बकर, अल बगदादी, ईजराइल से मिला हुआ है। अपनी बात के समर्थन में उन्होंने तर्क दिया है कि अल बगदादी ने कभी भी ईजराइल के खिलाफ कोई कदम नही उठाया तथा फिलीस्तीनियों की रक्षा के लिए कोई कार्रवाई नही की।

एक खुदा, एक नबी और एक किताब को मानने वाले आपस में ही खून खराबा करके 15 लाख से अधिक मुसलमानों को मार चुके है, हजारों को समुद्र में डूबों चुके है, बच्चों को भी जहरीली गैस से हमेशा के लिए ही सुला चुके है। और यह संघर्ष अभी जारी है जबकि तीन खुदाओं को मानने वाले संघर्षरत संगठनों / देशों को गलत संकेत ¼Wrong Signals½ देकर उन्हें चिन्हित रेखा ¼Dotted lines½ पर चलने हेतु विवष कर रहे है। यदि हम 1990 में कुवैत पर ईराकी आक्रमण से लेकर आज दिन तक राष्ट्रों की आक्रमक नीति / आतंकी संगठनों की गतिविधियों पर दृष्टि डाले तो सच सामने आता है।

इस युद्ध का संभावित परिणाम दीवार पर लिखा हुआ है ¼written on wall½ - तेल एवं खनिज सम्पदा से सम्पन्न देशों का विभाजन तथा परोक्ष / अपरोक्ष रूप से महाशक्तिशाली देश का अधिपत्य।

जिहाद का पेड़ जिसे पाकिस्तान में लगाया गया था एवं जिसके सहारे अफगान युद्ध में सोवियत सेना को पराजित होना पडा था। उसकी एक शाखा की सहायता से पाकिस्तान कश्मीरी परोक्ष युद्ध लड रहा है। घाटी में आतंकवाद एक उद्योग के रूप में उभरा है जहां पर एक पत्थर फेकने वाले 250-500 रू. झण्डा फहराने वाले को 1000-5000 रू. तथा हथगोला फेकने वाले को 10000 रू.तक दिया जाता है तथा एक आत्मघाती फिदायीन की कीमत 5 लाख से अधिक तक हो सकती है। उग्रवादी संगठन इस खर्चे के बदले में अमीर मुस्लिम देशों से 10 गुना अधिक राषि चंदे के रूप में इकट्ठा कर लेते है।

हाल ही में घाटी में 10 लाख का ईनामी मारा गया आतंकवादी बुरहान वानी इसी श्रृंखला की एक कडी था। पाकिस्तान की इस छद्म युद्ध तथा आतंकवादी संगठनों के लघु उद्योग से सबसे अधिक नुकसान कश्मीरी मुसलमान को रहा है। वास्तविकता यह है कि पत्थर/कांगडी से लडने वाला मूल कश्मीरी अभी भी लडाकू जाति नही रही है। कश्मीरी हमेशा शांतिपूर्ण रहा है उसे केवल भ्रमित करके पाकिस्तान कश्मीर समस्या को जीवित रखना चाहता है क्योंकि पाकिस्तान की सरकार का वर्चस्व ही कश्मीर समस्या पर टिका हुआ है।

बांग्लादेश - इसी क्रम में आतंकवादी संगठनों ने ढाका में गुलशन कैफे में 20 गैर मुस्लिम आदमी व औरतों का कत्ले आम करवाया। इन लोगों को इसलिए मारा गया कि उन्हें कुरान की आयते नही आती थी। इसी बांग्लादेश के किशोरगंज इलाके में ईद की नमाज जो की कुरान की आयतों के साथ ही पढी जा सकती है पर उग्रवादियों ने फायरिंग कर दी तथा बमों से हमला करके नमाजियों को मार डाला। यह आतंकवाद के विरोधाभासी चेहरे है।

अकेला भेडिया (लोन वुल्फ) 14 जुलाई 2016 को फ्रांस के स्वतंत्रता दिवस पर नीस शहर में लॉरी से आक्रमण करवाकर 84 निर्दोष व्यक्तियों की हत्या करवा दी। परंतु उग्रवादी संगठनों के इतना मालूम है कि फ्रांस जैसी महाशक्ति जब प्रतिवार करेगी तो उसमें 100 गुना अधिक निर्दोष मारे जाएंगे। नीस के बाद जर्मन में एक अफगान शरणार्थी मोहम्मद ट्रेन के अन्दर कुल्हाडी व चाकू से हमला करके चार व्यक्तियों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। दिनांक 21 जुलाई, 2016 को जर्मनी के म्यूनिख शहर में एक मॉल में ईरानी एवं जर्मन माता-पिता की संतान एक जर्मन युवक ने फायरिंग करके 10 व्यक्तियों को मार डाला।

जब कभी भी किसी एक आतंकवादी/उग्रवादी द्वारा आतंकी घटना को अंजाम दिया जाता है चाहे उसके पीछे कुछ भी कारण रहा हो परंतु उसे मुस्लिम आतंकवाद से जोड़कर देखा जाता है। इस तरह विश्व में मुसलमानों के प्रति नफरत बढती जा रही है।

टर्की - आधुनिक टर्की के निर्माता कमाल पाशा ने टर्की को धार्मिक कट्टरता से दूर रखा और यूरोपिय देशों के मुकाबले लाकर खडा कर दिया। इस्लामिक कट्टरपंथी/आतंकवादी को यह पसंद नही आया और उन्होंने जुलाई 2016 में लोकतांत्रिक सत्ता के विरूद्ध असफल सैनिक क्रांति का प्रयास किया। जिसमें लगभग 400 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई। टर्की में आपातकाल लागू।

विशेषता - उत्तरी अफ्रिका से लेकर फार ईस्ट तक चल रहे इस आतंकवाद की विशेषता यह है कि मरने वाला और मारने वाला दोनों मुसलमान है। मरने वाला नही जानता कि वह क्यों मारा गया तथा मारने वाले को भी नही पता कि उसने किसकी हत्या किस कारण से कर दी। युद्धरत मुसलमान जिस हथियार एके-47, एके-56 अथवा हैंड ग्रेनेड आदि का उपयोग करते है इस शस्त्रों और इसमें काम आने वाला एम्यूनेशन वह खुद नही बना सकते बल्कि दूसरे देशों से उचे दामों पर खरीदने पर मजबूर है। इसलिए इस युद्ध (आतंक) का अंत दीवार पर लिखा हुंआ है।

मुसलमानों के इस विनाश लीला का मुख्य कारण यह है कि मुसलमान अपने खुदा का हुक्म ‘‘इकरा’’ यानि पढ़ो और नबी का फरमान ‘‘इल्म हासिल करों चाहे तुम्हे चीन जाना पडे’’ भूल गया। मुसलिम बादशाहों/तानाशाहों/शासकों ने मुसलमानों को आधुनिक शिक्षा से अलग रखा क्योंकि उन्हे पढ़े लिखे मुसलमान से ज्यादा खतरा था। इसलिए बादशाहों व तानाशाहों के साथ साथ मुल्ला व मौलवी भी मुसलमानों को मदरसे की मजहबी शिक्षा पर जोर देते रहे और ये समझाते रहे कि ये दुनिया तो मात्र इतनी है जितनी की एक अंगुली पर पानी आ सकता है तथा आने वाली जिंदगी तो पूरे समुद्र से भी बडी है इसलिए आने वाली जिंदगी की फिक्र करों। यहां तक कि बिजली का एक बल्ब भी एडरसन (इसाई वैज्ञानिक) के द्वारा बनाया गया।

भारत - संसार का सबसे बडा लोकतंत्र - सबसे बडी आबादी (वर्तमान 129 करोड - मुस्लिम जनसंख्या लगभग 18.5 करोड) - मुसलमान भारत में अमन और शांति के साथ रह रहा है। परंतु पडौसी इस्लामी देश पाकिस्तान 1947-48, 1965 के संघर्षों में पीछे हटने तथा 1971 बांग्लादेश में आधा टूट जाने (14 दिन की लडाई में 93000 सैनिकों का समर्पण -1999 करगिल युद्ध - तत्कालीन प्रधानमंत्री तथा तत्कालीन सेनापति परवेज मुषर्रफ द्वारा वाषिंगटन जाकर राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की उपस्थिति में करगिल से बिना शर्त वापसी का ऐलान। पाकिस्तान जिसमें सरकार का वर्चस्व कश्मीर समस्या पर टिका हुआ है भारत में विरूद्ध घाटी में आतंकी संगठनों की सहायता से परोक्ष युद्ध (Proxy war) चला रहा है।

घाटी में आतंक के उद्योग सा बन गया है। अजमल कसाब और बुरहान बानी इसकी मिसाल है। भारत का मुसलमान यह अच्छी तरह से समझ गया है कि पाकिस्तान को कश्मीर या भारतीय मुसलमानों से किसी तरह की हमदर्दी नही है। और वह किसी भी स्थिति में भारतीय मुसलमानों का सहायक नही हो सकता इसलिए भारतीय मुसलमान अपनी गंगा जमुनी तहजीब का सम्मान करते हुए आतंक से दूर है।

जो मुस्लिम देश जैसे सेन्ट्रल एशिया स्थित 5 मुस्लिम देश (कजाकिस्तान, तुर्किनीस्तान) तथा मलेशिया आदि जो आतंकवाद से दूर रहे वह आगे बढ रहे है। 

इसलिए मुसलमानों को इस नाजुक समय में अक्ल और होशियारी से काम लेना चाहिये और अपने खुदा का हुक्म इकरा और नबी का फरमान ‘‘इल्म हासिल करो’’ पर अमल करके आगे बढना चाहिये ताकि वह विज्ञान और तकनीकी में यूरोपिय तथा महाशक्तिशाली देशों के समकक्ष खडे होने की काबिलियत जुटा सके और तब तक स्वयं को खून खराबा और आतंकवाद से दूर रखे।

ना समझोगे तो मिट जाओगे ए मुसलमानों

तुम्हारी दास्तां तक ना होगी दास्तानों में।।