चेन्नई, जनवरी 9: अपोलो अस्पताल आखिरकार पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के चिकित्सीय जांच संबंधी कागजात अदालत में जमा करने को तैयार हो गया है। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने सभी दस्तावेज केवल अदालत को ही देगी।  
मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा भेजे गए नोटिस के प्रत्युत्तर में अपोलो ने सोमवार को अपना पक्ष रखते हुए सभी जरूरी कागजात पेश करने की बात कही है। जयललिता मामले में अपोलो अस्पताल की रजामंदी के बाद उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 फरवरी, 2017 की तारीख तय की है। इस दौरान, न्यायालय ने राज्य व केंद्र सरकार को भी अपना पक्ष रखने के लिए हलफनामा देने को कहा है।

बता दें कि जयललिता की सामान्य मौत पर संदेह को लेकर एक व्यक्ति जोसेफ द्वारा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल किया गया था। जिसमें कहा गया था कि जयललिता की बीमारी के दौरान कभी किसी को उनके पास जाने का मौका नहीं मिला। उनकी मृत्‍यु की वजहों की भी जानकारी नहीं दी गई। केवल चुनिंदा लोग ही उनके करीब थे। मृत्‍यु के बाद भी उनकी बीमारी और मौत की वजहों की जानकारी बाहर नहीं निकल पाई। ऐसे में अब जयललिता से संबंधित सारी बातें सार्वजनिक की जानी चाहिए।

इसलिए जोसेफ ने यह जनहित याचिका दायर की  जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री की दवाइयों और चिकित्सा को लेकर सभी जानकारियों सामने लाने की बात निहित थी। ऐसे में उच्च न्यायालय ने अपोलो अस्पताल को नोटिस भेज सारी जानकारी न्यायालय में पेश करने को कहा था।

गौर हो कि तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और एआईएडीएमके प्रमुख जे. जयललिता का 5 दिसंबर को निधन हो गया था। बता की मृत्यु से एक दिन पहले जयललिता की हृदय गति रुक गई थी जबकि उसी दिन दोपहर में पार्टी ने कहा था कि वो स्वस्थ हो चुकी हैं और अस्पताल से घर जाने के लिए तैयार हैं। जयललिता की मृत्यु की घोषणा को लेकर भी काफी गफलत बनी रही थी।