चंडीगढ़, जनवरी 11: आखिरकार प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देश की बेटियो को समृद्ध बनाने के लिए शुरू की गयी ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ मुहिम ने अपना जादू दिखाना शुरू कर दिया है। इसकी बदौलत देशभर में लिंगानुपात के लिए सबसे बदनाम राज्य हरियाणा में पिछले 17 साल का रिकॉर्ड टूट गया। हरियाणा में पुरूषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या 900 के पार पहुंच गयी है।देश में हो रही भ्रूण हत्या को रोकना और लोगों में बेटियों के प्रति जागरुकता पैदा करने हेतु प्रधानमंत्री मोदी की मुहिम का नतीजा जन्म रजिस्ट्रेशन की सीआरएस प्रणाली है साफ साफ दिख रहा है। प्राप्त अकड़ों के अनुसार साल 2001 के बाद पहली बार साल 2016 में एक हजार लड़कों पर 900 लड़कियों का लिंगानुपात दर्ज किया गया। जो कि साल 2001 की जनगणना के मुताबिक हरियाणा में 1000 पुरूषों पर सिर्फ 861 महिलाओं थी जबकि, साल 2011 के जनगणना के मुताबिक 1000 पुरूषों पर सिर्फ 879 महिलाएं थी।

हरियाणा में लिंगानुपात समीकरण के बेहतर होने पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी खुशी जताई है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के लिए हरियाणा को चुना। लिंगानुपात में सुधार एक चुनौती थी, जिसे हमने स्वीकार किया। 2016 में जन्म के समय लिंगानुपात 914 था। जो की हम 950 पूरा करना चाहते हैं और इसके लिए हमें पड़ोसी राज्यों की मदद लेनी होगी। लेकिन यह खुशी की बात है कि हरियाणा लिंगानुपात सुधारने में शीर्ष पर है।Embeded Objectप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुहिम का शुभारंभ करते हुये कहा विशाल जनसभा था की, “बेटियों के जीवन की भीख मांगने के लिए एक भिक्षुक के रूप में आया हूं।” उन्होंने कहा था कि जब तक हमारी मानसिकता 18वीं सदी की है, हमें खुद को 21वीं सदी का नागरिक कहने का कोई अधिकार नहीं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने बेटे और बेटियों के बीच भेदभाव को खत्म करने का आह्वान किया। ऐसा करके ही कन्या भ्रूण हत्या को रोका जा सकता है।