नई दिल्ली, जनवरी 11: समाजवादी पार्टी (सपा) में चुनाव चिन्ह को लेकर मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खेमे की दावेदारी पर केंद्रीय चुनाव आयोग 13 जनवरी को सुनवाई करेगा। आयोग दोनों पक्षों की दावेदारी और उनकी ओर से पेश दस्तावेजों का अध्ययन कर रहा है और इस बारे में शुक्रवार को सुनवाई का फैसला किया है। वहीं मुलायम ने पहले ही अखिलेश को उत्तर प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री बताया है।बीते सोमवार को पार्टी पर अधिकार व चुनाव चिन्ह को लेकर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव केंद्रीय चुनाव आयोग के पास पहुंचे थे। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर खुद को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताते हुए 'साइकिल' चुनाव चिन्ह पर अपनी दावेदारी ठोकी। मुलायम के बाद अखिलेश गुट की ओर से प्रो. रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल भी चुनाव आयोग पहुंचकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताते हुए 'साइकिल'चुनाव चिन्ह पर दावेदारी रखी। रामगोपाल ने आयोग से मांग की कि वह जल्द ही इस मामले में अपना निर्णय ले।

इससे पहले सोमवार को सपा में मचे घमासान के बीच मुलायम ने चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखा और साइकिल सिम्बल पर अपना दावा किया था। वहीं लखनऊ पहुंचने पर अखिलेश यादव को अगला मुख्यमंत्री कहकर इस सियासत को नई शक्ल दे दी थी। उन्होंने कहा कि पार्टी की एकता के लिए पूरा प्रयास है। पार्टी के टूटने का सवाल ही नहीं है। समाजवादी पार्टी न टूटी है और न टूटेगी।

नाव के बाद अखिलेश फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। इससे पहले उन्होंने नई दिल्ली में भी अखिलेश के प्रति नरम रवैया दिखाया था। उन्होंने मीडिया से कहा था कि उनकी पार्टी में ज्यादा विवाद नहीं है। थोड़ा-बहुत विवाद है, जो जल्द सुझला लिया जायेगा। मुलायम ने कहा कि यह मेरे और मेरे बेटे के बीच की बात है। परिवार में कोई मतभेद नहीं है।

बता दें की मुलायम विधानसभा चुनाव के बाद विधायकों द्वारा ही अपना नेता चुनने यानी मुख्यमंत्री चुने जाने की बात कह चुके हैं। वहीं जब से पार्टी के अधिकांश विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने अखिलेश के प्रति एकजुटता दिखाई है, तब से मुलायम के सुर अपने बेटे के प्रति मुलायम हो गए हैं। वहीं वह रामगोपाल पर लगातार हमलावर हैं। उन्होंने सोमवार को भी कहा कि एक ही व्यक्ति है, जो मतभेद करा रहा है। इसके अलावा उन्होंने रामगोपाल को राज्यसभा में पार्टी के नेता पद से हटाये जाने के लिए राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी को चिट्ठी लिखी है।