मुंबई, जनवरी 12: भारतीय नौसेना की स्कार्पीन क्लास स्टेल्थ पनडुब्बी श्रृंखला की दूसरी पनडुब्बी खंदेरी का गुरुवार को मुंबई स्थित मझगांव गोदी शिपयार्ड में जलावतरण किया गया है। बता दे कि पानी के अंदर या सतह पर तारपीडो के साथ-साथ पोत-रोधी मिसाइलों से वार करने और रडार से बच निकलने की उत्कृष्ट क्षमता से लैस खंदेरी के नौसेना में शामिल होने से नौसेना की ताकत में अपार वृद्धि हुई है।
खंदेरी पनडुब्बी इस वर्ष के अंत तक नौसेना को सौंपे जाने की संभावना है। मझगांव डाक शिपयार्ड लिमिटेड (एमडीएल) में वर्तमान में प्रोजेक्ट 75 के अंतर्गत 6 स्कार्पीन पनडुब्बियों का निर्माण प्रगति पर है। इसके लिए फ्रांस की सहयोगी कंपनी मैसर्स डीसीएनएस ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरित की है।

‘खंदेरी’ समुद्र में भारत की रक्षा को तैनात रहेगी। दुश्मन का पता लगते ही हमला करने में यह पूरी तरह से सक्षम है। यह पनडुब्बी तमाम तरह की मिसाइलों और परमाणु हथियारों से लैस होगी। इसकी खासियत है कि यह पानी के अंदर और उसकी सतह से भी हमला करने में सक्षम है। इससे तारपीडो के साथ-साथ ट्यूब से भी एंटी शिप मिसाइलें दागी जा सकती हैं। इसकी स्टेल्थ तकनीक इसे अन्य पनडुब्बियों के मुकाबले भी बेहतर बनाती है। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो परंपरागत पनडुब्बियों का निर्माण करते हैं।

स्कार्पीन वर्ग की प्रथम कलवरीके वर्तमान में समुद्री परीक्षण चल रहे हैं और 2017 के मध्य में इसे नौसेना में शामिल कर लिए जाने की संभावनाहै। ये पनडुब्बियां नौसेना में शामिल होने के बाद उसके परम्परागत पनडुब्बी विभाग का महत्वपूर्ण हिस्सा बनजाएंगी।

बता दे कि रक्षा राज्यमंत्री डॉ सुभाष भामरे ने भारतीय नौसेना की स्कार्पीन पनडुब्बी श्रृंखला की दूसरी पनडुब्बी खंदेरी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होने कहा कि प्रोजेक्ट 75 कलवरी देश के लिए आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण की दिशा में मील का पत्थर है।

Embeded Objectवहीं नौसेना अध्यक्ष एडमिरल सुनील लाम्बा ने अपने संबोधन में कहा कि यह एक तथ्य है कि ‘‘खंदेरी’’ की तुलना दुनिया की श्रेष्ठतम पनडुब्बियों से की जा सकती है। हमारे जहाज निर्माताओं ने पिछलेवर्षों में इसके निर्माण में उच्च अनुभव और विशेषज्ञता अर्जित की है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि 2017 में नौसेना का पनडुब्बी विभाग अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है और ऐसे में प्रोजेक्ट 75 की पनडुब्बियां नौसेना के बेड़े में शामिल होने से देश की पनडुब्बी क्षमताओं में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है।