नई दिल्ली, जनवरी 12: तमिलनाडु के पारंपरिक त्योहार ‘पोंगल’ में इसबार पशुओं का खेल नहीं दिखाया जाएगा। शनिवार को सर्वोच्च न्यायालय ने शनिवार से पहले फैसला देने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया है। वहीं इस फैसले के बाद से कल पोंगल में पशुओ का खेल नहीं हो सकेगा जिसकी वजह से तमिलनाडु कि सियासत गरमाने लगी है।मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जल्लीकट्टू से जुड़े केंद्र सरकार के पिछले साल के अधिसूचना पर फैसले का मसौदा तैयार है, लेकिन इसे शनिवार से पहले सुनाना संभव नहीं है। क्योकि किसी पीठ को समय से पहले फैसला सुनाने के लिए कहना उचित नहीं है।

मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम इस मसले पर कोर्ट के आदेश के खिलाफ जाने का संकेत दे चुके हैं। बुधवार को उन्होंने कहा था कि वे और उनकी सरकार जल्लीकट्टू के आयोजन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के नक्शेकदम पर चलेगी। इससे पहले मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि जल्लिकट्टू पोंगल महोत्सव का एक अभिन्न हिस्सा है और यह त्योहार तमिलनाडु की जनता के लिए बहुत महत्व रखता है।

गौरतलब है कि सर्वोच्च नयायालय ने 2014 में इसे जानवरों के प्रति क्रूरता मानते हुए इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस मामले में अदालत ने यह भी कहा था कि तमिलनाडु, महाराष्ट्र या देश में कहीं भी सांढ़ों को जल्लिकट्टू में एक प्रदर्शन करने वाले पशु के रूप में या बैलगाड़ी दौड़ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।Embeded Objectइसके बाद बीते साल शीर्ष अदालत ने इस पर तमिलनाडु सरकार की पुनर्विचार याचिका को भी खारिज कर दिया था। उधर, केंद्र सरकार ने आठ जनवरी 2016 को एक अधिसूचना जारी कर जल्लीकट्टू पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया था। कई संस्थाओं ने उच्चतम न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी थी जिसके बाद शीर्ष अदालत ने अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

यह मामला तब प्रकाश में आया जब सोशल मीडिया पर वायरल एक विडियो में दिखाया गया था कि जल्लिकट्टू दौड़ से पहले बैलों को शराब पिलाकर निर्दयता पूर्वक मारा जाता है। जिससे वो दौड़ शुरू होते ही गुस्से में बेतहाशा दौड़े। ज्सिके बाद कई संस्थाओ ने इसके खिलाफ आवाज बुलंद करते हुये पशु क्रूरता बताया था और इस दौड़ को रोकने के लिए याचिका दायर की।