अहमदाबाद, जनवरी 13: वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्‍मेलन का गुरुवार को गांधी नगर में समापन समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने बताया है कि तीन दिन के इस सम्‍मेलन में 25 हजार से भी ज्‍यादा सहमति पत्रों पर हस्‍ताक्षर किए गए। मुख्‍यमंत्री विजय रूपाणी ने सम्‍मेलन में प्रभागी हुए सभी विदेश प्रतिनिधियों का शुक्रिया अदा किया और सबको 2019 में होने वाले अगले वाइवरन शिखर सम्‍मेलन के लिए निमंत्रित किया।सम्मेलन में कुल 25,578 सहमति ज्ञापनों एमओयू पर दस्तखत किए गए। हालांकि यह नहीं बताया गया है कि इस करारों से राज्य में कितना निवेश आएगा। 2015 में हुए पिछले सम्मेलन में राज्य सरकार ने कहा था कि उसने कुल 22,602 एमओयू किए हैं जिनसे राज्य में 25 लाख करोड़ रुपए का निवेश आएगा। चीफ सेक्रेटरी जे एन सिंह ने बताया कि इन करार में से 70 फीसदी के पूरे होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात समिट के 70 फीसदी करार के पूरे होने का रिकॉर्ड रहा है।Embeded Objectवहीं केन्द्रीय वस्त्र मंत्री स्मृति इरानी ने कहा कि गुजरात के निवासियों की उद्यमिता भावना और निवेश के प्रवाह के मद्देनजर गुजरात की वस्त्र गाथा अभी हाल ही में शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि भारत में वस्त्र उद्योग के सबसे बड़े केन्द्रों में गुजरात को भी शुमार किये जाने के नाते यह राज्य सभी तरह के वस्त्रों की प्राप्ति का एकल केन्द्र है। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात में वस्त्र शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक भावनाएं हैं।Embeded Objectइरानी ने कहा कि वस्त्र संबंधी पाठ्यक्रमों की पेशकश करने वाले गुजरात के 28 आईटीआई में चलाए जा रहे कपड़ा क्षेत्र संबंधी कौशल विकास कार्यक्रम 75 फीसदी प्लेसमेंट का आंकड़ा दर्ज कराने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि गुजरात के दो प्रमुख संस्थान अर्थात निफ्ट और एनआईडी तथा विभिन्न इंजीनियरिंग कालेज वस्त्र प्रौद्योगिकी, वस्त्र प्रसंस्करण एवं वस्त्र इंजीनियरिंग के क्षेत्र में डिग्री की पेशकश करते हैं।Embeded Objectवस्त्र मंत्री ने कहा की 8,835 करोड़ रुपये के सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुये। वस्त्र पार्कों, वस्त्र प्रसंस्करण, मशीनरी, कालीन विकास इत्यादि जैसे क्षेत्रों में इन एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये हैं। वस्त्र मंत्री ने कहा कि भारत में कुल कपास उत्पादन का 29 फीसदी गुजरात में ही उत्पादित होता है। उन्होंने कहा कि यह इस राज्य में निहित असीम संभावनाओं के प्रति वस्त्र उद्योग के ठोस विश्वास को दर्शाता है।