पश्चिम बंगाल, जनवरी 14 : मकर संक्रांति के पवन अवसर पर वार्षिक गंगा सागर मेला के दौरान शनिवार को चल रही ठंडी हवाओं के बीच बेहद ठंडे पानी में देश व विदेशों से आए 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में स्नान किया। पश्चिम बंगाल के सुंदरबन के विकास मंत्री मंटूराम पाखिरा के अनुसार, “लगभग 10-12 लाख श्रद्धालु सुबह से अब तक स्नान कर चुके हैं, और भी लोग पवित्र स्नान के लिए आ रहे हैं।" मान्यता है कि यहां मकर संक्रांति पर पुण्य-स्नान करने से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

पंचायत एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने बताया कि प्रशासन ने भीड़ से निपटने के लिए जरूरी बंदोबस्त किए हैं। उन्होंने कहा कि मेला परिसर में 20,000 से शौचालयों का निर्माण किया गया है, जो 2016 के मुकाबले 5,000 ज्यादा हैं। तीर्थयात्री शौचालय का सही से इस्तेमाल कर सके, इसलिए हर 10 शौचालयों पर एक स्वयंसेवक की व्यवस्था की गई है। किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए जिला प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था किया है। दक्षिण 24 परगना जिले के मजिस्ट्रेट पी.बी. सेलीम ने बताया कि मेला परिसर में 200 सीसीटीवी कमरे लगाए गए हैं और नदी में जीवनरक्षक जहाजों की संख्या बढ़ा दी गई है।

सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार

भारत की नदियों में सबसे पवित्र गंगा, गंगोत्री से निकल कर पश्चिम बंगाल में जहां उसका सागर से मिलन होता है, उस स्थान को गंगासागर कहते हैं। इसे सागरद्वीप भी कहा जाता है। यह स्थान देश में आयोजित होने वाले तमाम बड़े मेलों में से एक, गंगासागर मेला, के लिए सदियों से विश्व विख्यात है। मान्यता के अनुसार, वर्ष की 12 संक्रांत‌ियों में मकर संक्रांत‌ि का सबसे महत्व ज्यादा है। इस द‌िन सूर्य मकर राश‌ि में आते हैं और इसके साथ देवताओं का द‌िन शुरु हो जाता है।

कोलकाता से 150 किलोमीटर दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित इस द्वीप को हिंदू शुभ व पवित्र मानते हैं। इस तीर्थस्थल पर कपिल मुनि का मंदिर है, जिन्होंने भगवान राम के पूर्वज और इक्ष्वाकु वंश के राजा सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार किया था। मान्यता है कि गंगासागर की तीर्थयात्रा सैकड़ों तीर्थयात्राओं के समान है। हर किसी को यहां आना नसीब नहीं होता है। इसकी पुष्टि एक प्रसिद्ध लोकोक्ति से होती है, जिसमें कहा गया है, “सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार”। कुंभ मेला के बाद गंगा सागर दूसरा सबसे बड़ा मेला माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि इसके पवित्र जल में स्नान करने से पुण्य लाभ मिलता है।

गंगासागर में मकर संक्रांति यानी 14 जनवरी से एक हफ्ता पहले ही मेला शुरू हो जाता है, जिसमें दुनिया के विभिन्न भागों से तीर्थयात्री, साधु-संत आते हैं और संगम में स्नान कर सूर्यदेव को अर्ध्य देते हैं। मेले की विशालता के कारण बहुत लोग इसे मिनी कुंभ मेला भी कहते हैं। मकर संक्रांति के दिन यहा सूर्यपूजा के साथ विशेष तौर कपिल मुनि की पूजा की जाती है। लोग तिल, चावल और तेल का दान देते हैं। अनेक श्रद्धालु सागर देवता को नारियल अर्पित करते हैं।