नई दिल्ली, जनवरी 15: वित्त मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान जारी कर यह बात स्पष्ट कर दी कि वह भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्तता और स्वतंत्रता का सम्मान करता है। साथ ही उन सभी खबरों का खंडन किया है जिसमें कुछ यूनियनों के हवाले से कहा गया है कि नोटबंदी के दौरान उसकी ओर से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कार्यों में हस्तक्षेप किया गया।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि मीडिया में ऐसी खबरें आई हैं जिसमें कुछ यूनियनों ने भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्तता का कथित रूप से उल्लंघन का आरोप लगाया है। इस संदर्भ में यह स्पष्ट रूप से कहा जाता है कि सरकार पूरी तरह से भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्तता और स्वतंत्रता का सम्मान करती है।

Embeded Objectसरकार और रिजर्व बैंक के बीच लोक महत्व के विभिन्न मामलों पर सलाह-मशविरे होते हैं, जहां कानून के द्वारा इस तरह के विचार-विमर्श अनिवार्य होते हैं अथवा उन्हें कार्यप्रणाली के द्वारा सुलझाया जाता है। कानून द्वारा अनिवार्य विचार-विमर्श अथवा कार्यप्रणाली के माध्यम से सुलझाए गए विषयों को भारतीय रिजर्व बैंक की स्वायत्तता के उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

Embeded Objectबताया जा रहा है कि यूनाइटेड फोरम ऑफ रिजर्व बैंक ऑफिसर्स एंड इम्पलाइज की ओर से गवर्नर उर्जित पटेल को पत्र लिखकर कहा है कि रिजर्व बैंक की दक्षता और स्वतंत्रता वाली छवि उसके कर्मचारियों के दशकों की मेहनत से बनी थी, लेकिन इसे एक झटके में ही खत्म कर दिया गया। यह अत्यंत क्षोभ का विषय है।

Embeded Objectइस पत्र पर ऑल इंडिया रिजर्व बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन के समीर घोष, ऑल इंडिया रिजर्व बैंक वर्कर्स फेडरेशन के सूर्यकांत महादिक, ऑल इंडिया रिजर्व बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के सीएम पॉलसिल और आरबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन के आरएन वत्स के हस्ताक्षर हैं। इनमें से घोष और महादिक ने पत्र लिखने की पुष्टि की है। घोष ने कहा कि यह फोरम केंद्रीय बैंक के 18,000 कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है ।