नई दिल्ली, जनवरी 15: उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे शराब की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने के अपने आदेश को संशोधित करने से इंकार कर दिया है। सड़कों के नजदीक शराब की दुकानों की मौजूदगी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए न्यायालय ने यह आदेश दिया था। बता दें की 1 लाख 40 हजार लोग हर साल सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। इनमें से अधिकतर हादसों की वजह शराब पीकर गाड़ी चलाना है।पन्‍द्रह दिसम्‍बर को दिये अपने आदेश में न्‍यायालय ने सभी राष्ट्रीय और राज्‍यों के राजमार्गों की 500 मीटर की सीमा के अंदर सभी शराब की दुकानें हटाने का आदेश दिया था। न्‍यायालय ने राष्‍ट्रीय राजमार्गों पर लगे विज्ञापन भी हटाने को कहा था। यह प्रतिबंध इस वर्ष एक अप्रैल से लागू होना है। इससे पहले न्यायालय ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा था कि दुकानों की संख्या बढ़ाने से बेहतर है कि लोगों के घर तक ही शराब पहुँचा दी जाए।

शीर्ष न्यायालय ने कहा था की, सभी राज्यों में राष्ट्रीय राज्यमार्गों पर या उसके आसपास पड़ने वाली शराब की दुकानों के लिए लाइसेंस खत्म कर दिए जाएंगे। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि ये दुकान लाइसेंस में दिए गए वक्त तक शराब बेच सकेंगे। हालांकि, उनके लाइसेंस का नवीकरण नहीं होगा। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अगुआई वाली पीठ ने दिया था।

गैर सरकारी संगठन ने अपनी याचिका में कहा था कि हाइवे पर आसानी से शराब की उपलब्धता नशे में गाड़ी चलाने को बढ़ावा देता है। बता दें कि राज्यमार्गों पर शराब की दुकानों को खोलने के लिए लगातार जारी होती निविदाओं को लेकर मुख्य न्यायाधीश ने सरकार की मंशा पर पहले ही सवाल खड़े किए थे। न्यायालय ने गत अगस्त में इस मामले में केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया था। न्यायालय ने साफ किया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 से हर नागरिक को मिला जीवन का अधिकार बेहद अहम है। राज्यों को इसका सम्मान करते हुए अपनी नीति में बदलाव करना होगा।