नई दिल्ली, जनवरी 16: उच्‍चतम न्‍यायालय ने सोमवार को मस्तिष्क की जन्मजात विकृति से ग्रस्त 24 हफ्ते के भ्रूण को गिराने की अनुमति दे दी है। चिकित्‍सा जांच में पाया गया था कि उसके गर्भ में पल रहे बच्‍चे का सिर नहीं है। बता दें कि मुंबई कि एक महिला ने भ्रूण संबंधी परेशानियों के कारण शीर्ष अदालत से गर्भपात की अनुमति मांगी थी।शीर्ष न्‍यायालय ने कहा कि अगर मां के जीवन को खतरा है तो गर्भपात कराया जा सकता है। न्‍यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि गर्भपात की पूरी प्रक्रिया चिकित्‍सकों की एक टीम द्वारा कराई जाएगी जो इसका पूरा रिकार्ड रखेगी। सात चिकित्‍सकों वाले बोर्ड की रिपोर्ट का उल्‍लेख करते हुए न्‍यायालय ने कहा कि गर्भ में पल रहे शिशु के सर न होने के कारण जन्‍म के बाद उसे जीवित रखना संभव नहीं होगा। इस फैसले के बाद मुम्‍बई की रहने वाली महिला ने गर्भपात के लिए न्‍यायालय से इजाजत मांगी थी।Embeded Objectन्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने मुंबई के किंग एडवर्ड मैमोरियल हास्पीटल के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार करते हुए 22 साल की महिला को गर्भपात की अनुमति दी। सात सदस्यीय मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के संदर्भ में पीठ ने कहा, चिकित्सकीय साक्ष्य स्पष्ट रूप से बताते हैं कि याचिकाकर्ता को पूरी अवधि के लिए गर्भवती होने की अनुमति देने का कोई तुक नहीं है क्योंकि भ्रूण बिना खोपड़ी गर्भाशय के बाहर जीवित नहीं रहेगा।

गौरतलब है कि इस महिला को गर्भावस्था के 21 वें सप्ताह में पता चला कि उसके गर्भ में पल रहे बच्चे में यह विकृति है। जबकि गर्भावस्था के चिकित्सकीय समापन (एममटीपी) अधिनियम 1971 के तहत केवल 20 सप्ताह तक के भ्रूण का ही गर्भपपात किया जा सकता है।