बीजिंग, जनवरी 17: चीन ने अमेरिका पर तंज कसते हुये कहा है कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता किसी की विदाई का तोहफा नहीं है। बता दें की महज एक दिन पहले ही अमेरिका के निवर्तमान ओबामा प्रशासन ने एनएसजी का सदस्य बनने की भारत की मुहिम में रोडे अटकाने के लिए चीन पर निशाना साधा था।चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि, एनएसजी में परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देशों का प्रवेश विदाई उपहार नहीं हो सकता जो कि देश एक दूसरे को प्रदान कर सकें। चुनयिंग ने कहा कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत के आवेदन के संबंध में, एनएसजी में गैर एनपीटी देशों के प्रवेश के संदर्भ में हमने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है।

चीनी प्रवक्ता ने कहा, चीन 48-सदस्यीय इस समूह में सदस्यता पाने के भारत के प्रयासों को बाधित कर रहा है, जबकि अधिकतर देश उसका समर्थन कर रहे हैं। चीन के विरोध का मुख्य आधार है कि भारत परमाणु अप्रसार संधि का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है। चीन एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देशों के प्रवेश के बारे में दो स्तरीय रुख अपनाना चाहता है।

इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि चीन भारत के प्रयास में 'अवरोधक' की तरह काम कर रहा है। दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों की सहायक विदेश मंत्री निशा देसाई बिस्वाल ने कहा कि जो स्पष्ट रुप से एक अवरोधक है जिसका निदान करने की जरुरत है और वह चीन है। उन्होने कहा था कि, राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने इस विश्वास को लेकर पूरी तरह स्पष्ट रहे हैं कि भारत एनएसजी के लिए पात्रता रखता है और अमेरिका इस समूह में भारत के प्रवेश का समर्थन करता है।

बता दें की एनएसजी में 48 देश शामिल है। यह संगठन परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए बनाया गया है। भारत और पाकिस्‍तान दोनों ही देश परमाणु हथियार संपन्‍न है। एनएसजी के नियमों के मुताबिक किसी भी ऐसे देश को एनएसजी की सदस्यता नहीं दी जा सकती, जिसने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं किए हैं। एनपीटी के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों - अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन तथा फ्रांस को ही परमाणु शक्तियों के रूप में स्वीकार किया जाता है। जिनमे से अधिकतर देश भारत के पक्ष में है।