नई दिल्ली, जनवरी 17: अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रायसीना डायलॉग के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुये प्रधानमंत्री मोदी ने कहा की पड़ोसियों के बारे में उनकी नीति समूचे दक्षिण एशिया में शांति और भाईचारे के संबंधों पर आधारित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अलग-अलग वजहों से दुनियाभर में बड़े बदलाव हो रहे हैं और 2014 में हिन्दुस्तान के लोगों ने बदलाव के लिए हमारी सरकार को मौका दिया। इसदौरान प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान को दोटूक कहा कि अगर वह भारत से बातचीत चाहता है तो उसे आतंकवाद से दूर होना होगा। भारत के महत्वाकांक्षी भू-राजनीतिक सम्मेलन रायसीना डायलॉग में 65 देशों के 250 से ज़्यादा प्रतिनिधि ले रहे हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद को धर्म से अलग मानता है तथा अच्छे और बुरे आतंकवाद के बीच कृत्रिम भेद को खारिज करने में यकीन रखता है। मोदी ने कहा कि पाकिस्तान अगर भारत के साथ बातचीत चाहता है तो उसे आतंकवाद का रास्ता छोड़ना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और चीन के बीच भले ही कुछ मतभेद हों लेकिन दोनों देशों को एक-दूसरे की मुख्य चिंताओं के प्रति संवेदनशील होने तथा क्षेत्र में शांति और प्रगति के लिए काम करने की जरूरत है।

उन्होने पाकिस्तान और चीन का नाम लिए बिना कहा कि दोनों बड़े पड़ोसी देशों को क्षेत्र में शांति और प्रगति के लिए आपसी चिंताओं और हितों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान दिखाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका के चलते दो बड़े पड़ोसी देशों के साथ कुछ मुद्दों पर मतभेद होना अस्वाभाविक नहीं है। ऐसे में रिश्तों को साधने और क्षेत्र में शांति और प्रगति एवं विकास के लिए दोनों देशों को आपसी मुख्य चिंताओं और हितों के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान दिखाना होगा।Embeded Objectप्रधानमंत्री ने कहा की राष्ट्रों के उदय के साथ ही यह उचित आवाज उठने लगी है कि कुछ देशों की नीति के तहत ही वैश्विक ऐजेंडा तय नहीं होना चाहिए। ऐसे में बहिष्कार की वृत्ति और झुकाव के प्रति हमें मजबूती से खड़ा होना होगा। हम भारत को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं। मोदी ने कहा कि केवल अपने फायदे की बात करना हमारी संस्कृति नहीं रही है। 'सबका साथ, सबका विकास' केवल भारत के लिए नहीं है बल्कि पूरे विश्व के लिए है।Embeded Objectउन्होंने कहा हमारा सामरिक झुकाव हमारे सांस्कृतिक संस्कारों द्वारा जनित है जो यथार्थवाद, सह-अस्तित्व, सहयोग और सहभागिता पर आधारित है। उन्होंने कहा कि यह हमारे राष्ट्रीय हितों को स्पष्ट और जिम्मेदार तौर पर अभिव्यक्त करता है। भारतीयों की समृद्धि और हमारे नागरिकों की सुरक्षा देश और विदेशों में सर्वोपरि महत्व रखती है। लेकिन केवल स्वयं का हित न ही हमारी संस्कृति और न ही हमारे व्यवहार में है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता अपने नजदीक और भौगोलिक रूप से करीबियों के साथ संपर्क का पुनर्निर्माण, रिश्तों के पुल तैयार करना और भारत के साथ फिर जोड़ना शामिल है।

भारत आर्थिक प्राथमिकताओं के आधार पर संबंधों का विस्तार करना चाहता है। भारत की मानव संसाधन से जुड़ी शक्ति को मजबूत कर उनकी सरकार उसे वैश्विक युवा प्रतिभाओं से जोड़ना और आवश्कता व अवसर उपलब्ध कराना चाहती है। भारत विकास भागीदारी के विस्तार को हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के द्वीपों, कैरिबियन द्वीपों और अफ्रीका के महान महाद्वीप, अमेरिका के जीवंत राष्ट्रों तक ले जाना चाहता है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक चुनौतियों पर भारतीय आख्यान तैयार करना चाहता है। वैश्विक संस्थाओं और संगठनों को विन्यास, मज़बूती और पुनर्निर्माण में मददद करने के अलावा योग और आयुर्वेद जैसी भारत की सभ्यता विरासत का वैश्विक भलाई के लिए दुनिया तक पहुंचना चाहता है।Embeded Objectअफगानिस्तान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि दूरी और पारगमन की कठिनाइयों के बावजूद भारतअफगान के संस्थानों और क्षमताओं के विकास के लिए देश के पुनर्निर्माण में मदद कर रहा है। अफगानिस्तान के संसद भवन का निर्माण और भारत-अफगानिस्तान मैत्री बांध दो ऐसे उदाहरण हैं जो भारत के अफगान विकास के प्रति समर्पण और साझेदारी को दर्शाते हैं। वहीं यूरोप के साथ हमने भारत के विकास के लिए समझौते किए। हमनें स्मार्ट सिटी बनाने के लिए मदद ली। हमने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से भी विकास के लिए सहयोग पर बात की है। ग्लोबलाइजेशन के साथ चुनौतियां भी हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग से लड़ने के लिए हमने कड़े कदम उठाए हैं और हमने प्रयास शुरू कर दिए हैं।