नई दिल्ली, जनवरी 12: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तमिलनाडु के पारंपरिक खेल जल्लिकट्टू पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से लगातार विरोध प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। जलिकट्टू के समर्थन में चेन्नई की मरीना बीच पर आज भारी तादाद में लोग जुट गए। दूसरी ओर तमिलनाडु के मुख्‍यमंत्री ओ पन्‍नीरसेल्‍वम जल्‍लीकट्टू के आयोजन को लेकर अध्‍यादेश लाने के मुद्दे पर आज प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात करेंगे। मुख्‍यमंत्री ने लोगों से प्रदर्शन न करने की अपील की है।कॉलेज के विद्यार्थियों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने जल्लीकट्टू के समर्थन में विरोध तेज कर दिया है। हालांकि यह विरोध संगठित तरीके से किया जा रहा है। युवा कार्यकर्ताओं ने कहा है कि इस परंपरा को अचानक हटा लेना ठीक नहीं है। उनका दावा है कि इस खेल से सांडों को कोई नुकसान नहीं होता है। चेन्नई और कोयम्बटूर सहित आंदोलन के प्रमुख केंद्रों के आसपास स्थित कई विश्वविद्यालय और कॉलेजों में एक दिन से लेकर अनिश्चित काल के लिए अवकाश की घोषणा की गई है।

इससे पहले मुख्‍यमंत्री पन्‍नीरसेल्‍वम ने कहा था कि वे और उनकी सरकार जल्लीकट्टू के आयोजन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के नक्शेकदम पर चलेगी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि जल्लिकट्टू पोंगल महोत्सव का एक अभिन्न हिस्सा है और यह त्योहार तमिलनाडु की जनता के लिए बहुत महत्व रखता है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2014 में इसे जानवरों के प्रति क्रूरता मानते हुए इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस मामले में अदालत ने यह भी कहा था कि तमिलनाडु, महाराष्ट्र या देश में कहीं भी सांढ़ों को जल्लिकट्टू में एक प्रदर्शन करने वाले पशु के रूप में या बैलगाड़ी दौड़ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

बता दें की यह मामला तब प्रकाश में आया जब सोशल मीडिया पर वायरल एक विडियो में दिखाया गया था कि जल्लिकट्टू दौड़ से पहले बैलों को शराब पिलाकर निर्दयता पूर्वक मारा जाता है। जिससे वो दौड़ शुरू होते ही गुस्से में बेतहाशा दौड़े। ज्सिके बाद कई संस्थाओ ने इसके खिलाफ आवाज बुलंद करते हुये पशु क्रूरता बताया था और इस दौड़ को रोकने के लिए याचिका दायर की।