लखनऊ, जनवरी 2: समाजवादी पार्टी में शुरू हुई पारिवारिक कलह पार्टी के विभाजन का कारण बन गयी। हाल अब यह है की सपा में दबदबा बनाकर प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे मुखिया मुलायम सिंह यादव अपने ही बेटे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मात खाकर चित हो गए है। दोनों बाप बेटे के बीच हालत इस हद तक खराब हो छके है की पार्टी पर वर्चस्व की लढाई शुरू हो गयी है। जिसके लिए चुनाव आयोग को दोनों खेमों ने पत्र भेजा है और आज मुलायम खुद शाम को चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाक़ात करेंगे।    मुलायम सिंह यादव ने पांच जनवरी को पार्टी का आपात अधिवेशन बुलाया है। इससे सत्तारुढ़ समाजवादी पार्टी का संकट और गहरा गया है। मुलायम सिंह यादव ने कल श्री रामगोपाल यादव द्वारा आयोजित अधिवेशन में पारित सभी प्रस्तावों को रद्द और अमान्य घोषित कर दिया और इन्‍हें अवैध बताया।

कल के घटनाक्रम में मुलायम सिंह यादव ने रामगोपाल यादव सहित अन्‍य सांसद नरेश अग्रवाल और किरणमॉय नन्दा को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। अब सभी की नजरें पांच जनवरी को मुलायम सिंह यादव के कदम पर टिकी हैं। उनके पुत्र और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कल समाजवादी पार्टी पर लगभग पूरा अधिकार कर लिया। उन्‍होंने शिवपाल यादव की जगह नरेश उत्तम को प्रदेश पार्टी प्रमुख नियुक्त किया।

इससे पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव के स्थान पर खुद को पार्टी प्रमुख घोषित कर दिया है। मुलायम सिंह यादव को पार्टी का संरक्षक बनाया। पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई और पार्टी नेताओं ने अखिलेश यादव को निर्विरोध पार्टी अध्‍यक्ष चुन लिया। मुलायम सिंह यादव ने इसे गैर संवैधानिक बताया। मुलायम सिंह यादव ने अपने चचेरे भाई रामगोपाल यादव को पत्र लिखा है और पांच जनवरी को पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया है।Embeded Objectवहीं भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि समाजवादी पार्टी परिवार में राजनीतिक संकट का उद्देश्‍य उत्‍तर प्रदेश में अखिलेश यादव सरकार की विफलता से लोगों का ध्‍यान हटाना है। पार्टी सचिव श्रीकांत शर्मा ने इस झगड़े को एक राजनीतिक नाटक बताते हुए समाजवादी पार्टी पर सभी मोर्चों पर विफल होने का आरोप लगाया। उन्‍होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनावों में किए गए किसी भी वादे को पूरा नहीं किया है।