नई दिल्‍ली, जनवरी 20: विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सरकार के बजट पेश करने की बात विपक्षी दलों को रास नहीं आ रही है। वही वर्ष 2012 में बजट देर से पेश करने के लिए भारतीय चुनाव आयोग ने केंद्रीय सचिवालय से उस दौरान सरकार की प्रकियाओं पर जानकारी मांगी है।भारतीय चुनाव आयोग ने केंद्रीय सचिवालय से इस बात जानकारी मांगी है कि आखिर वर्ष 2012 में बजट देर से पेश करने के लिए सरकार ने किन प्रकियाओं का पालन किया था और कौन से नियम अपनाए थे। बात दें की, पांच राज्यों में 4 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक 3 दिन पहले आम बजट को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग में अपना विरोध दर्ज कराया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इससे केंद्र की सत्तारूढ़ सरकार को फायदा हो सकता है।

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने साफ कर दिया की आम बजट पेश करने की तारीख आगे बढ़ाने को लेकर दायर याचिका पर 20 जनवरी को सुनवाई करेगा। याचिका में कहा गया है कि पांच राज्यों में चुनाव के बाद आम बजट पेश किया जाए। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका मनोहर लाल शर्मा ने दी है। बीते साल दिसम्बर में उच्चतम न्यायालय ने इस याचिका की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया था। याचिका में मांग की गई थी कि बजट मार्च के बाद पेश किया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि वह मामले की सुनवाई तय समय में करेगी।

उल्लेखनीय है कि संसद के बजट सत्र पहला चरण 31 जनवरी से 9 फरवरी तक होगा वहीं दूसरे चरण के 9 मार्च से 13 अप्रैल तक होने की संभावना है। 31 जनवरी को राष्ट्रपति का अभिभाषण और आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट रखी जाएगी। एक फरवरी को आम बजट रखा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आम बजट को पहले रखने की मंशा के पीछे अगले वित्त वर्ष के शुरु में ही विभिन्न क्षेत्रों के लिए धनराशि प्राप्त करना बताया था।