नई दिल्ली, जनवरी 19: चीन द्वारा परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता पर अमेरिका पर तंज कसने के बाद गुरुवार को भारत ने जवाब देते हुये कहा की यह सदस्यता उपहार स्वरुप नहीं बल्कि परमाणु अप्रसार के रिकॉर्ड के दम पर हासिल करना चाहता है। बता दें अमेरिका के निवर्तमान ओबामा प्रशासन ने एनएसजी का सदस्य बनने की भारत की मुहिम में रोडे अटकाने के लिए चीन पर निशाना साधा था जिसके बाद चीन ने कहा था कि एनएसजी सदस्यता किसी की विदाई का तोहफा नहीं है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने गुरुवार को यहां पत्रकारवार्ता में कहा कि 'भारत उपहार के रूप में एनएसजी सदस्यता की मांग नहीं कर रहा है। भारत अपने परमाणु अप्रसार रिकार्ड पर यह मांग कर रहा है। उन्होंने कहा, ज़ाहिर है मै अन्य आवेदकों के लिए बात नहीं कर सकता। उनका इशारा पाकिस्तान के परमाणु अप्रसार संबंधित खराब रिकार्ड की ओर था जो चीन की सहायता से इन समूह में शामिल होना चाहता है।

इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि चीन भारत के प्रयास में 'अवरोधक' की तरह काम कर रहा है। राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने इस विश्वास को लेकर पूरी तरह स्पष्ट रहे हैं कि भारत एनएसजी के लिए पात्रता रखता है और अमेरिका इस समूह में भारत के प्रवेश का समर्थन करता है। जिसपर तिलमिलाए चीन ने कहा था कि, एनएसजी में परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देशों का प्रवेश विदाई उपहार नहीं हो सकता जो कि देश एक दूसरे को प्रदान कर सकें। चीन ने कहा कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत के आवेदन के संबंध में, एनएसजी में गैर एनपीटी देशों के प्रवेश के संदर्भ में हमने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है।

बता दें की एनएसजी में 48 देश शामिल है। यह संगठन परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए बनाया गया है। भारत और पाकिस्‍तान दोनों ही देश परमाणु हथियार संपन्‍न है। एनएसजी के नियमों के मुताबिक किसी भी ऐसे देश को एनएसजी की सदस्यता नहीं दी जा सकती, जिसने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं किए हैं। एनपीटी के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों - अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन तथा फ्रांस को ही परमाणु शक्तियों के रूप में स्वीकार किया जाता है। जिनमे से अधिकतर देश भारत के पक्ष में है।