नई दिल्ली, दिसंबर 21: देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 19 जनवरी 2017 तक 82.915 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का भंडारण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता की तुलना में 53 प्रतिशत है। बता दे कि यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 126 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल भंडारण का 99 प्रतिशत है। यानि की अब तक जलाशयों के जलस्तर में 2 प्रतिशत की फिर से गिरावट आई है।
बता दे कि इन 91 जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल भंडारण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्‍थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं।

उत्‍तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्‍थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल भंडारण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केंद्रीय जल आयोग (सीडब्‍ल्‍यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध भंडारण 7.28 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 40 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की भंडारण स्‍थिति 47 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत भंडारण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 49 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में भंडारण कमतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत भंडारण से भी कमतर है।

साथ ही पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्‍चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल भंडारण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध भंडारण 14.00 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 74 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की भंडारण स्‍थिति 55 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत भंडारण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 61 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में भंडारण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत भंडारण से भी बेहतर है।

पश्‍चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्‍ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल भंडारण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध भंडारण 17.55 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 65 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की भंडारण स्‍थिति 37 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत भंडारण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 61 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में भंडारण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत भंडारण से भी बेहतर है।

हालांकि मध्‍य क्षेत्र में उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड, मध्‍य प्रदेश तथा छत्‍तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल भंडारण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध भंडारण 28.50 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 67 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की भंडारण स्‍थिति 53 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत भंडारण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 48 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में भंडारण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत भंडारण से भी बेहतर है।

वहीं दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश (एपी), तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्‍यों में दो संयुक्‍त परियोजनाएं), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल भंडारण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध भंडारण 15.59 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 30 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की भंडारण स्‍थिति 28 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत भंडारण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता का 51 प्रतिशत था। इस तरह चालू वर्ष में भंडारण पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए भंडारण से बेहतर है, लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत भंडारण से कमतर है।

बता दे कि, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल भंडारण बेहतर है उनमें पंजाब, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, एपी एवं टीजी (दोनों राज्यों में दो संयुक्त परियोजनाएं), आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं कर्नाटक शामिल हैं।

उललेखनीय है कि पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल भंडारण बराबर है उनमें उत्तराखंड शामिल है। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल भंडारण कमतर है उनमें हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, केरल और तमिलनाडु शामिल हैं।