जयपुर, जनवरी 21 : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने शुक्रवार रात आरक्षण के मुद्दे पर स्पष्ट कहा कि जब तक अपने देश में जातीय आधारित, जन्म आधारित, भेदभाव और असमानता रहेगी तब तक आरक्षण की सुविधा रहनी चाहिए। यहां सहसरकार्यवाह ने यहां संवाददाताओं को बताया कि संविधान के तहत दिए गए आरक्षण के प्रावधान जारी रहने चाहिए और इसमें बिना वजह किसी प्रकार का विवाद पैदा नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यही बात उन्होंने जयपुर साहित्य महोत्सव में कही थी। मैंने वहां भी यही कहा था कि, “जब तक जन्म आधारित, जातीय आधारित और अन्य सामाजिक असमानता रहेगी तो संविधान के अनुसार दिया गया आरक्षण जारी रहना चाहिए और आरएसएस उसका पूरी तरह से समर्थन करता है। यहीं आरएसएस का पक्का रूख है इसमें कोई विवाद नहीं है।”

ज्ञात हो कि जयपुर साहित्य महोत्सव में एक परिचर्चा के दौरान आरएसएस के प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य ने आरक्षण संबंधी जो बयान दिया था, उसके बाद राजनीतिक जगत में बवाल खड़ा हो गया। आरएसएस प्रचार प्रमुख के वक्तव्य को सही परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए। डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा था, “आरक्षण का विषय भारत में एक एससी/एसटी के सन्दर्भ में आया है... हमारे समाज के बंधुओं को हमने सैंकड़ों साल तक सन्मान से, सुविधाओं से, शिक्षण से वंचित रखा है... यह बहुत अन्याय हुआ है... एकदम गलत हुआ है...इसका परिभाजन करने की जिम्मेदारी हमारी है...एक विशेष जाति में पैदा होने का उसको उस से दूर रखा गया... ये ठीक नहीं है... इसलिए उनको साथ लाने के लिए आरक्षण का प्रावधान संविधान में आरम्भ से किया गया है।”

डॉ.वैद्य ने आगे कहा, “डॉ. आंबेडकरजी ने कहा है...किसी भी राष्ट्र में हमेशा के लिए ऐसा आरक्षण का प्रावधान रहना, यह अच्छा नहीं है, जल्द से जल्द इसकी आवश्यकता निरस्त हो कर सबको समान अवसर देने का समय आना चाहिए... ये जो उन्होंने कहा है और इसलिए वो आरक्षण की सेवा है... बाकि अन्य आरक्षण के बदले में सबको अवसर अधिक दिया जाए, शिक्षा अधिक दिया दी जाए... इस तरह का प्रयत्न करना चाहिए... इसके आगे आरक्षण देना थोड़ा अलगाववाद बनने वाली बात होगी, ऐसा लगता है... एससी-एसटी के पिछड़ा रहने के पीछे एक... वर्षों से किया हुआ अन्याय उसके कारणीभूत है... ऐसा अन्य स्थान पर नहीं है... इसलिए उसका उपाय अन्य तरह से ढूंढ़ाना अधिक अच्छा रहेगा, ऐसा लगता है...”

आरएसएस प्रचार प्रमुख ने अपने वक्तव्य पर एक और स्पष्टीकरण दिया है।

आरएसएस प्रचार प्रमुख की बातों के निहितार्थ को समझे बिना जानबूझकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने आरक्षण मुद्दे पर बवाल खड़ा किया, वहीं प्रिंट मीडिया ने आरक्षण पर संघ के मत की झूठी खबर छापकर जनता में भ्रम फ़ैलाने का ही काम किया है। इसके बाद भाजपा व संघ विरोधी राजनीतिक दल इस मुद्दे को आगामी विधानसभा चुनाव में वोट बटोरने के लिए भुनाने में लग गई है।