बर्लिन, जनवरी 22: केन्द्रीय कृषि व किसान कल्‍याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने जर्मनी में आयोजित कृषि मंत्रियों के सम्मेलन में कहा की अनुसंधान कार्यक्रमों में किसानों के हितों को सर्वोच्‍च स्‍थान पर रहते हुए संसाधन उपयोग कुशलता को अधिक से अधिक इस्‍तेमाल करने की जरूरत है। साथ ही सिंह ने सुझाया की उत्‍पादन में वृद्धि करने के लिए किसानो को क्षमता आधारित सुधारो पर जादा बल देना चाहिए जो की सबसे अच्‍छा विकल्‍प साबित होगा।कृषि मंत्री ने कहा की जल, कृषि के लिए अन्‍य महत्‍वपूर्ण आदानों जैसे मृदा से भी अधिक महत्‍वपूर्ण संसाधन है और कृषि और गैर कृषि प्रयोजनों के लिए जल के अधिक प्रयोग, अकुशल सिंचाई पद्धति, कीटनाशकों के अनुचित उपयोग, खराब संरक्षण अवसंरचना तथा अभिशासन के अभाव ने पूरे विश्‍व में जल की कमी और प्रदूषण पर प्रभाव डाला है। उन्होंने कहा की भारत के विस्‍तृत क्षेत्र में जल संसाधनों का वितरण असमान है। अत: ज्‍यों ज्‍यों आय बढ़ती है त्‍यों-त्‍यों जल की आवश्‍यकता भी बढ़ती जा रही है।Embeded Objectउन्होंने बताया की यदि प्रति व्‍यक्‍ति/वर्ष जल उपलब्‍धता 1700 घन मीटर, और 1000 घनमीटर से कम हो जाती है तो अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों के अनुसार देश को जल के दबाव एवं विरल जल वाले क्षेत्र में वर्गीकृत किया जाता है। श्री सिंह ने जानकारी दी की 1544 घनमीटर प्रति व्‍यक्‍ति/वर्ष जल उपलब्‍धता के साथ भारत पहले से ही जल के दबाव वाला देश है और जल विरल वाले क्षेत्र में यह परिवर्तित हो रहा है।Embeded Objectसिंह ने कहा की सिंचाई हेतु जल के कुशल उपयोग के लिए यह आवश्‍यक है कि जल को उचित समय और पर्याप्‍त मात्रा में फसल में उपयोग किया जाए और मुख्‍य कार्य होगा (i) सिंचित क्षेत्रों में उपयोगित जल संसाधनों के कुशल उपयोग द्वारा कम जल से अधिक उत्‍पादन करना। (ii) पारिस्‍थितिक प्रणाली अर्थात्‍ वर्षा सिंचित और जलमग्‍न क्षेत्रों की उत्‍पादकता बढ़ाना। (iii) सतत ढंग से कृषि उत्‍पादन हेतु ग्रे जल के भाग का उपयोग करना।

कृषि व किसान कल्‍याण मंत्री ने कहा की अधिकतर सिंचाई परियोजनाएं 50 प्रतिशत से भी अधिक की प्राप्‍त करने योग्‍य क्षमता से नीचे के स्‍तरों पर चल रही हैं और सिंचाई प्रणाली की उत्‍पादकता और कुशलता में सुधार करने की भावी संभावना है जिसे प्रौद्योगिकीय और सामाजिक हस्‍तक्षेपों द्वारा प्राप्‍त किया जा सकता है। सिंह ने कहा की यह अनुमान लगाया गया है कि सिंचाई परियोजनाओं में कुशलता के वर्तमान स्‍तर पर 10 प्रतिशत वृद्धि करने से विद्यमान सिंचाई क्षमता से अतिरिक्‍त 14 मिलियन हैक्‍टेयर क्षेत्र की सिंचाई होगी। अत: हमें अधिक संरक्षण और वर्धित जल उपयोग क्षमता पर बल देने के साथ समेकित दृष्‍टिकोण अपनाना होगा।Embeded Objectकृषि व किसान कल्‍याण मंत्री ने कहा की हमारी संस्‍थाओं द्वारा कई प्रौद्योगिकियां विकसित की गई हैं जो ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ के उत्‍पादन को सफल बनाती है। उन्होंने बताया की विभिन्‍न स्‍थानों पर हाथ से परम्‍परागत पौध रोपण की तुलना में यांत्रिक रूप से पौध रोपण से उत्‍पादकता बढ़ेगी। आने वाले मामलों एवं समस्‍याओं के समाधान के लिए भारत में प्रचलित कृषि प्रणाली के लिए समेकित प्रयास की जरूरत है। सिंह ने कहा की इन प्रणालियों को सामाजिक रूप से स्‍वीकार्य, पर्यावरण अनुकूल तथा आर्थिक रूप से व्‍यवहार्य होना चाहिए।